Lord Shiva: सावन महीने में घर में लगा रहे हैं भोलेनाथ की तस्वीर, तो इन बातों का रखें विशेष ध्यान

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jul 31, 2022, 07:07 PM IST

Lord Shiv Murti In Sawan: सावन के महीने में शिव भक्त भगवान शिव की भक्ति में लीन हो जाते हैं। सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन अगर आप भगवान शिव की प्रतिमा घर ला रहे हैं तो कई बातों का ध्यान देना बेहद जरूरी है।

Lord Shiva: सावन महीने में घर में लगा रहे हैं भोलेनाथ की तस्वीर, तो इन बातों का रखें विशेष ध्यान
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Right Direction Of Lord Shiva In House: सावन का महीना सबसे पावन महीना माना जाता है। सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि सावन के महीने में भगवान शिव की विधि विधान से पूजा करने पर हर मनोकामना पूरी होती है। सावन के महीने में भक्त भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए मंदिरों में जाते हैं, वहीं कुछ भक्त पूजा करने के लिए घर में भगवान शिव की मूर्ति व तस्वीर स्थापित करते हैं। ऐसा माना जाता है कि सावन के महीने में भगवान शिव की मूर्ती को घर में स्थापित करना बेहद शुभ होता है, लेकिन इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं ज्योतिषशास्त्र के अनुसार घर में भगवान शिव की तस्वीर लाने से पहले किन बातों का ध्यान देना जरूरी होता है।

ऐसी तस्वीर न लगाएं

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार घर में कभी भी भगवान शिव के रौद्र रूप व तांडव करते हुए मूर्ति या तस्वीर नहीं लगाना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव की संहार रूप वाली तस्वीर कभी भी घर नहीं लाना चाहिए। इससे परिवार के सदस्यों के बीच नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

ऐसी तस्वीर करें स्थापित

घर में भगवान शिव की तस्वीर स्थापित कर रहे हैं तो भगवान शिव की ऐसी तस्वीर लाएं जिसमें वह कैलाश पर्वत पर विराजमान हों या नंदी पर विराजित हों,  जिसमें उनके चेहरे पर मुस्कान हों ऐसी तस्वीर ही घर लाना शुभ होता है।

इस दिशा में लगाएं तस्वीर

देवी देवता की तस्वीर लगाना घर में शुभ माना जाता है। सावन के महीने में अगर आप भगवान शिव की तस्वीर घर में लगाना चाहते हैं तो इसके लिए उत्तर दिशा सबसे सही रहेगा। भगवान शिव को उत्तर दिशा प्रिय है। इस दिशा में भगवान शिव का निवास स्थान यानी कैलाश पर्वत है। इसलिए घर में भगवान शिव की तस्वीर उत्तर दिशा में ही लगानी चाहिए।

(डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।)

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