Lohri Dulla Bhatti Ki Kahani: दुल्ला भट्टी और सुंदरी-मुंदरी की कहानी
- Authored by: Srishti
- Updated Jan 13, 2026, 06:56 PM IST
Lohri Dulla Bhatti Ki Kahani (दुल्ला भट्टी और सुंदरी-मुंदरी की कहानी): सुंदर मुंदरिये हो, तेरा कौन विचारा हो... दुल्ला भट्टी वाला हो, दुल्ले ती विआई....। आपने भी लोहड़ी पर्व के दौरान लोगों को दुल्ला भट्टी का नाम बोलते या गाते सुना होगा। दुल्ला भट्टी और सुंदरी-मुंदरी की पूरी कहानी आप यहां से पढ़ सकते हैं।
दुल्ला भट्टी और सुंदरी-मुंदरी की कहानी (AI Generated)
Lohri Dulla Bhatti Ki Kahani (दुल्ला भट्टी और सुंदरी-मुंदरी की कहानी): लोहड़ी के दिन हर किसी के मुंह परदुल्ला भट्टी कान रहता है। लेकिन ये दुल्ला भट्टी हैं कौन थे और दुल्ला भट्टी की कहानी क्या है, इसके बारे में आपको शायद ही पता हो। यहां हम आपको दुल्ला भट्टी और सुंदरी-मुंदरी की कहानी बता रहे हैं। इस कहानी को लोहड़ी के दिन जरूर पढ़ा जाता है। यहां से आप भी इस कहानी को पढ़ें-
दुल्ला भट्टी और सुंदरी-मुंदरी की कहानी (Dulla Bhatti And Sundri Mundri Story)-
मान्यता है कि मुगल काल में दुल्ला भट्टी नाम का एक बहादुर योद्धा था, जिसने मुगलों के जुल्म-सितम के खिलाफ बड़ा कदम उठाया था। एक गांव में सुंदरदास नाम का एक गरीब किसान रहता था जिसकी सुंदरी और मुंदरी नाम की दो बेटियां थीं। उन दोनों सुंदर बहनों को जमींदार अगवा करके ले आए थे और उन लड़कियों के चाचा उनकी रक्षा करने में असमर्थ थे। ये दोनों लड़कियां मुगल सरदारों के अत्याचारों का शिकार बनने वाली थीं।
दुल्ला भट्टी को जैसे ही इन गरीब लड़कियों के बारे में पता चला तो उसने लड़कियों को मुक्त करवाया। गांव का नम्बरदार भी लड़कियों के पिता सुंदर दास को मजबूर कर रहा था कि वह अपनी बेटियों की शादी उससे कर दे। सुंदर दास ने ये बात जाकर दुल्ला भट्टी को बता दी। दुल्ला भट्टी ने नम्बरदार को सबक सिखाने के लिए उसके खेत जला दिए और फिर लोहड़ी के दिन जंगल में आग जलाकर उन लड़कियों का हिन्दू लड़कों से विवाह भी करवाया।
दुल्ला भट्टी ने खुद ही दोनों का कन्यादान किया। हालांकि, जब उपहार देने की बात आई तो उस समय दुल्ला भट्टी के पास कुछ नहीं था। ऐसे में उसने एक सेर शक्कर देकर दोनों को विदा किया। लोग दुल्ला भट्टी को निडरता, संघर्ष, सत्य के प्रतीक के रूप में जानते हैं। इसलिए ही लोहड़ी के दिन लोग इनकी कहानी सुनते हैं।