हम सभी ने कभी न कभी ‘हवाई चप्पल’ जरूर पहनी होगी। ये चप्पलें कामकाजी, सस्ती, आरामदायक और टिकाऊ होती हैं। सबसे बड़ी बात तो यह कि ये हर एक घर में आसानी से मिल जाती हैं। मगर क्या आपने कभी सोचा है कि इन्हें हवाई चप्पल क्यों कहा जाता है और हवाई का मतलब क्या है? अगर नहीं तो चलिए आज इस सवाल का जवाब जानते हैं।
सबसे पहले तो यह बता दें कि हवाई चप्पल का हवाई जहाज या फिर हवा से कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि इन चप्पलों के फीते V या Y शेप की होती है, जो देखने में थोड़ी बहुत जहाज जैसी लगती है, लेकिन हवाई शब्द का इससे कोई मतलब नहीं है बल्कि इसकी असली वजह कुछ और ही है।
इतिहासकारों की माने तो, हवाई चप्पल का नाम अमेरिका के हवाई द्वीप (Hawaii Island) से जुड़ा हुआ है। जहां शुरुआत में ‘टी’ नाम के एक पेड़ से निकले रबर का इस्तेमाल करके चप्पलें तैयार की जाती थीं। इसी वजह से इन चप्पलों को ‘हवाई चप्पल’ कहा जाने लगा।
अब रही बात चप्पलों के डिजाइन की तो इन चप्पलों का डिजाइन भी काफी पुराना है। बताया जाता है कि यह जापान की पारंपरिक चप्पलें ‘जोरी’ और ‘गेटा’ से मिलता-जुलता है। कहा जाता है कि 1800 के दशक में जब जापानी मजदूर हवाई द्वीप गए, तो वे अपने साथ इस डिजाइन के चप्पलों को लेकर गए थे। बाद में इसी डिजाइन की चप्पलें पूरी दुनिया में फैल गईं।
धीरे-धीरे यह चप्पलें अमेरिका से होते हुए पूरी दुनिया में लोकप्रिय हो गईं। युद्ध के समय सैनिकों ने इन्हें खूब इस्तेमाल किया। बाद में आम लोगों के बीच भी यह बेहद लोकप्रिय हो गईं। इन चप्पलों को ब्राजील की एक मशहूर कंपनी हवाइआनाज़ (Havaianas) ने भी इन्हें बड़े लेवल पर बनाया और फिर ये चप्पलें दुनिया भर में फैल गईं।
भारत में हवाई चप्पल को घर-घर तक पहुंचाने का काम बाटा (Bata) जैसी कंपनियों ने किया। आज यह चप्पल हर किसी के लिए जरूरी चीजों में से एक बन चुकी है। इसके बिना तो पैर की उलझन मिट ही नहीं सकती।
कुछ लोग हवाई चप्पल में हवाई शब्द के पीछे की वजह यह भी मानते हैं कि ये चप्पलें बहुत हल्की होती हैं, इसलिए इन्हें ‘हवाई’ यानी ‘हवा जैसी हल्की’ कहा जाता है।