UPI New Rules: बदल गए यूपीआई के नियम, Google Pay, PhonePe, Paytm के यूजर्स होंगे प्रभावित

UPI New Rule: यदि आप भी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) का इस्तेमाल करते हैं तो आपके लिए बहुत बड़ी खबर है। आप कोई भी यूपीआई जैसे Bhim, Google Pay, PhonePe और Paytm ही क्यों ना इस्तेमाल करते हों, आपके लिए यह खबर बहुत ही जरूरी है। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि फरवरी में यूपीआई के कई सारे नियम बदल गए हैं जिनके बारे में जानना आपके लिए बहुत जरूरी है।

Authored by: प्रदीप पाण्डेयUpdated Feb 5 2026, 08:13 IST
फरवरी 2026 से यूपीआई (UPI) से जुड़े नए नियम लागू होने जा रहे हैं, जिनका सीधा असर Google Pay, PhonePe और Paytm जैसे लोकप्रिय पेमेंट एप्स के यूज़र्स पर पड़ेगा। इन बदलावों का मकसद डिजिटल लेनदेन को पहले से ज्यादा तेज, सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है। नए नियमों में ट्रांजैक्शन स्पीड, सुरक्षा मानकों और यूज़र कंट्रोल पर खास फोकस किया गया है।01 / 08

फरवरी 2026 से यूपीआई (UPI) से जुड़े नए नियम लागू होने जा रहे हैं, जिनका सीधा असर Google Pay, PhonePe और Paytm जैसे लोकप्रिय पेमेंट एप्स के यूज़र्स पर पड़ेगा। इन बदलावों का मकसद डिजिटल लेनदेन को पहले से ज्यादा तेज, सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है। नए नियमों में ट्रांजैक्शन स्पीड, सुरक्षा मानकों और यूज़र कंट्रोल पर खास फोकस किया गया है।

तेज होंगे UPI ट्रांजैक्शन02 / 08

तेज होंगे UPI ट्रांजैक्शन

2026 के नए नियमों के तहत अब यूपीआई ट्रांजैक्शन और उनसे जुड़े API रिस्पॉन्स अधिकतम 10 सेकंड में पूरे करने होंगे। पहले यह सीमा 30 सेकंड थी। इससे भुगतान के दौरान होने वाली देरी कम होगी और पीक टाइम में भी ट्रांजैक्शन ज्यादा भरोसेमंद रहेंगे।

API यानी एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस वह डिजिटल सिस्टम है, जिसके जरिए आपका यूपीआई एप बैंक से बैलेंस की पुष्टि करता है और सामने वाले बैंक को भुगतान स्वीकार करने का संदेश भेजता है। इस प्रक्रिया के तेज होने से पूरे सिस्टम की रफ्तार बढ़ेगी।03 / 08

API यानी एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस वह डिजिटल सिस्टम है, जिसके जरिए आपका यूपीआई एप बैंक से बैलेंस की पुष्टि करता है और सामने वाले बैंक को भुगतान स्वीकार करने का संदेश भेजता है। इस प्रक्रिया के तेज होने से पूरे सिस्टम की रफ्तार बढ़ेगी।

बढ़ते डिजिटल भुगतान को मिलेगा सपोर्ट04 / 08

बढ़ते डिजिटल भुगतान को मिलेगा सपोर्ट

भारत में डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है और यूपीआई रोज नए रिकॉर्ड बना रहा है। ऐसे में रियल-टाइम प्रोसेसिंग को मजबूत करना जरूरी हो गया है। नए नियमों से हाई-ट्रैफिक समय में भी Google Pay, PhonePe और Paytm जैसे प्लेटफॉर्म पर ट्रांजैक्शन अटकने की समस्या कम होगी। (सांकेतिक फोटो-Istock)

सुरक्षा और यूजर कंट्रोल होंगे मजबूत05 / 08

सुरक्षा और यूजर कंट्रोल होंगे मजबूत

नए यूपीआई नियमों में सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। खासतौर पर हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन के लिए ज्यादा सख्त वेरिफिकेशन होगा। भुगतान से पहले स्पष्ट कन्फर्मेशन प्रॉम्प्ट दिखेंगे, ताकि गलती से पेमेंट न हो। इसके अलावा, सब्सक्रिप्शन या ऑटो-डेबिट जैसे रिकरिंग पेमेंट्स को मैनेज और कैंसिल करना पहले से आसान होगा।

निष्क्रिय UPI IDs पर लग सकती है रोक06 / 08

निष्क्रिय UPI IDs पर लग सकती है रोक

जो यूपीआई आईडी लंबे समय से इस्तेमाल नहीं की गई हैं, उन्हें अस्थायी रूप से सीमित किया जा सकता है। दोबारा इस्तेमाल करने से पहले यूज़र को री-वेरिफिकेशन करना होगा। इससे पुराने या भूले हुए अकाउंट्स के जरिए होने वाली धोखाधड़ी को रोका जा सकेगा।

फेल ट्रांजैक्शन का समाधान होगा तेज07 / 08

फेल ट्रांजैक्शन का समाधान होगा तेज

नए नियमों के अनुसार, अटके या फेल हुए पेमेंट्स को बैंक और यूपीआई एप्स को पहले से ज्यादा तेजी से सुलझाना होगा। कई मामलों में यह समाधान कुछ घंटों के भीतर किया जाएगा। साथ ही, यूज़र्स को ट्रांजैक्शन स्टेटस के बारे में साफ और स्पष्ट जानकारी मिलेगी।

कलेक्ट रिक्वेस्ट पर लगेगी सीमा08 / 08

कलेक्ट रिक्वेस्ट पर लगेगी सीमा

यूपीआई कलेक्ट रिक्वेस्ट यानी पैसे मांगने के नोटिफिकेशन पर भी नियंत्रण किया जाएगा। स्पैम और अनचाहे पेमेंट प्रॉम्प्ट से बचने के लिए रोज़ मिलने वाली कलेक्ट रिक्वेस्ट की संख्या सीमित की जा सकती है। साथ ही, ट्रस्टेड कॉन्टैक्ट्स को ज्यादा स्पष्ट रूप से दिखाया जाएगा।

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