2026 के नए नियमों के तहत अब यूपीआई ट्रांजैक्शन और उनसे जुड़े API रिस्पॉन्स अधिकतम 10 सेकंड में पूरे करने होंगे। पहले यह सीमा 30 सेकंड थी। इससे भुगतान के दौरान होने वाली देरी कम होगी और पीक टाइम में भी ट्रांजैक्शन ज्यादा भरोसेमंद रहेंगे।
भारत में डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है और यूपीआई रोज नए रिकॉर्ड बना रहा है। ऐसे में रियल-टाइम प्रोसेसिंग को मजबूत करना जरूरी हो गया है। नए नियमों से हाई-ट्रैफिक समय में भी Google Pay, PhonePe और Paytm जैसे प्लेटफॉर्म पर ट्रांजैक्शन अटकने की समस्या कम होगी। (सांकेतिक फोटो-Istock)
नए यूपीआई नियमों में सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। खासतौर पर हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन के लिए ज्यादा सख्त वेरिफिकेशन होगा। भुगतान से पहले स्पष्ट कन्फर्मेशन प्रॉम्प्ट दिखेंगे, ताकि गलती से पेमेंट न हो। इसके अलावा, सब्सक्रिप्शन या ऑटो-डेबिट जैसे रिकरिंग पेमेंट्स को मैनेज और कैंसिल करना पहले से आसान होगा।
जो यूपीआई आईडी लंबे समय से इस्तेमाल नहीं की गई हैं, उन्हें अस्थायी रूप से सीमित किया जा सकता है। दोबारा इस्तेमाल करने से पहले यूज़र को री-वेरिफिकेशन करना होगा। इससे पुराने या भूले हुए अकाउंट्स के जरिए होने वाली धोखाधड़ी को रोका जा सकेगा।
नए नियमों के अनुसार, अटके या फेल हुए पेमेंट्स को बैंक और यूपीआई एप्स को पहले से ज्यादा तेजी से सुलझाना होगा। कई मामलों में यह समाधान कुछ घंटों के भीतर किया जाएगा। साथ ही, यूज़र्स को ट्रांजैक्शन स्टेटस के बारे में साफ और स्पष्ट जानकारी मिलेगी।
यूपीआई कलेक्ट रिक्वेस्ट यानी पैसे मांगने के नोटिफिकेशन पर भी नियंत्रण किया जाएगा। स्पैम और अनचाहे पेमेंट प्रॉम्प्ट से बचने के लिए रोज़ मिलने वाली कलेक्ट रिक्वेस्ट की संख्या सीमित की जा सकती है। साथ ही, ट्रस्टेड कॉन्टैक्ट्स को ज्यादा स्पष्ट रूप से दिखाया जाएगा।