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महंगाई की मार से बेहाल किचन! प्याज-लहसुन, तेल-चीनी, दूध-सब्जी सब महंगे, आखिर कैसे चले घर?

फिल्म 'पीपली लाइव' का यह गाना- 'सखी सईया तो खूब ही कमात है महंगाई डायन खाये जात है' मौजूदा समय के लिए एक बार फिर मौजू हो गया है। चौतरफा महंगाई से आम आदमी का बजट बिगड़ गया है।

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महंगाई की मार
Authored by: आलोक कुमार
Updated Aug 25, 2026, 18:43 IST
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दुनियाभर में छिड़ा युद्ध रोज सुर्खियां बटोर रहा है, लेकिन हमारे देश में करोड़ों परिवार भी एक अदृश्य युद्ध 'महंगाई डायन' से लड़ रहा है। यह ऐसी जंग है, जिसका कोई शोर-शराबा नहीं है, लेकिन इसकी तपिश हर घर की रसोई और हर परिवार की जेब में साफ महसूस की जा रही है। महंगाई से जूझता आम आदमी आज बेबसी के उस चौराहे पर खड़ा है, जहां हर गुजरते दिन के साथ उसकी थाली से एक-एक निवाला कम होता जा रहा है। प्याज-लहसुन से लेकर खाद्य तेल, चीनी, दूध और हरी सब्जियों तक की बढ़ती कीमतों ने घर का हिसाब-किताब उलट-पुलट कर रख दिया है।

इस आमसान छूती महंगाई का सबसे बड़ा असर उस परिवार पर हुआ है, जो पहले ही अपनी जरूरतों को काट-छांटकर घर चला रहा है। प्रोटीन, फल, दूध और पौष्टिक आहार जैसी चीजों से पहले ही समझौता हो रहा था, लेकिन अब बढ़ती महंगाई उसे और पीछे धकेल रही है। रसोई में खड़ी गृहणियां सोचने को मजबूर है कि दाल कम करें, तेल कम करें, सब्जी बदलें या फिर दूध और फल का खर्च घटाएं? थाली पर महंगाई का यह चौतरफा हमला सिर्फ जेब पर चोट नहीं कर रहा, बल्कि सवाल यह है कि महंगाई की इस आंच में आम आदमी अपनी थाली, सेहत और घर का बजट आखिर कब तक बचा पाएगा?

आखिर क्या-क्या महंगा हुआ?

अगर आप पिछले कुछ महीनों के राशन और सब्जी के बिल उठाकर देखें, तो आपको समझ आएगा कि महंगाई में बढ़ोतरी किसी एक चीज तक सीमित नहीं है। इसने रसोई की पूरी की पूरी बास्केट को अपनी चपेट में ले लिया है।

प्याज और लहसुन: रसोई के ये दो आधार स्तंभ सबसे ज्यादा झटका दे रहे हैं। लहसुन के दाम कई शहरों में डबल हो गए हैं। वहीं, प्याज भी सामान्य कीमतों से लगभग दोगुने दाम पर बिक रहा है। हरा धनिया और अदरक के दा में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई है, जिससे घरों के खाने-पीने के खर्च पर दबाव बढ़ गया है।

हरी सब्जियां: टमाटर, गोभी, भिंडी, लौकी और बीन्स- हर हरी सब्जी के दाम आम आदमी की पहुंच से बाहर हो रहे हैं। बारिश के मौसम की मार और ट्रांसपोर्टेशन का खर्च सब्जियों के दामों में लगातार आग लगा रहा है।

खाने का तेल और चीनी: खाना पकाने का तेल (सोयाबीन, सरसों, सनफ्लावर) और चीनी, जो हर घर की बुनियादी जरूरतें हैं, उनके दामों में भी 10% से 15% तक की बढ़ोतरी देखी गई है।

दूध और डेयरी उत्पाद: पिछले एक-डेढ़ साल में दूध की कीमतों में कई बार बढ़ोतरी हो चुकी है। दूध महंगा होने से दही, पनीर, मक्खन और छाछ जैसी बुनियादी चीज़ें भी महंगी हो गई हैं।

20 मई से 24 अगस्त 2026: प्रमुख खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी

वस्तु20 मई औसत कीमत24 अगस्त औसत कीमतकुल बढ़ोतरी% बढ़ोतरी
प्याज₹25.59₹43.53₹17.9470.11%
चीनी₹46.65₹63.05₹16.4035.16%
लहसुन₹37.42₹44.42₹7.0018.71%
आलू₹21.01₹22.97₹1.969.33%
बैंगन₹40.18₹43.46₹3.288.16%
चावल₹43.24₹46.05₹2.816.50%
सरसों तेल₹189.43₹200.21₹10.785.69%
टमाटर₹36.91₹38.51₹1.604.33%
उड़द दाल₹118.21₹122.36₹4.153.51%
सोया तेल₹159.89₹165.02₹5.133.21%
Source: Department of Consumer Affairs

त्योहारों से पहले बिगड़ा किचन का बजट

त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले ही महंगाई ने आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। चीनी से लेकर दाल, चावल, तेल और सब्जियों तक के दाम तेजी से बढ़े हैं। जुलाई से 24 अगस्त के बीच चीनी ₹45 से बढ़कर 65 रुपये प्रति प्रति किलो तक पहुंच गई, जबकि चावल ₹90 से ₹105 किलो पहुंच गया। अरहर दाल ₹120 से बढ़कर ₹150 किलो और सरसों तेल ₹200 प्रति किलो तक हो गया। चाय पत्ती के दाम भी ₹350 से बढ़कर ₹450 किलो हो गए। सब्जियों में प्याज सबसे ज्यादा महंगा हुआ और ₹30 से बढ़कर ₹60 किलो तक पहुंच गया। भिंडी ₹30 से ₹60, फूलगोभी ₹50 से ₹100 और लौकी ₹40 से ₹80 किलो हो गई। लगातार बारिश और बाढ़ से सप्लाई प्रभावित होने को कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।

ड्राई फ्रूट्स की कीमत भी बढ़ी

त्योहारों में इस्तेमाल होने वाले ड्राई फ्रूट्स ने भी बजट पर दबाव बढ़ाया है। काजू की कीमत करीब ₹1,000 किलो से बढ़कर ₹1,500 किलो पहुंच गई। यानी एक किलो काजू पर ₹500 ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है। बादाम भी ₹800 से बढ़कर करीब ₹1,100 किलो हो गया है। ऐसे में त्योहारों पर मेहमानों के लिए ड्राई फ्रूट्स खरीदना भी पहले के मुकाबले महंगा पड़ेगा।

₹10 हजार का किचन बजट अब पड़ेगा भारी

अगर किसी परिवार का रसोई का बजट ₹10,000 है तो दाल, तेल, चीनी, सब्जियों और दूसरे सामान की कीमत बढ़ने के बाद उसी बजट में पहले जितना सामान खरीदना मुश्किल होगा। परिवारों के सामने अब दो विकल्प हैं- या तो महीने का बजट बढ़ाएं या फिर खाने-पीने की चीजों में कटौती करें। ऐसे में फल, ड्राई फ्रूट्स, दूध की मात्रा, बाहर खाना और दूसरी गैर-जरूरी चीजों पर खर्च कम किया जा सकता है।

रसोई का बजट

रसोई का बजट

खाने-पीने के समान क्यों महंगे हो रहे हैं?

खाने-पीने के समान के दाम बढ़ने के पीछे केवल दुकानदारों की मुनाफाखोरी नहीं है। इसके पीछे देश के कई राज्यों में भारी बारिश प्रमुख वजह है। मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में भारी बारिश से लहसुन और प्याज की खड़ी फसल सड़ गई, जिससे बाजार में सप्लाई बहुत कम हो गई। भारी बारिश से हरी सब्जियां खेतों में ही खराब हो गई है। इससे दाम तेजी से बढ़े हैं। इसके अलावा हाल के दिनों में सप्लाई चेन प्रभावित होने से दाम बढ़े हैं।

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