IPL 2026 का पहला सुपर ओवर सीजन के 38वें मैच में सामने आया। इसमें लखनऊ को बहुत ही बुरी हार का सामना करना पड़ा। कोलकाता ने पहली ही गेंद में लखनऊ को मात दे दी। चलिए आपको बताते हैं कि सुपर ओवर कैसे शुरू हुआ और कोलकाता ने कैसे इसमें बाजी मारी।
इस मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुए कोलकाता नाईट राइडर्स ने 7 विकेट खोकर 155 रन बनाए। शुरुआत में तो केकेआर की पारी लड़खड़ाई नजर आ रही थी, लेकिन रिंकू सिंह ने अंत में 83 रनों की नाबाद पारी खेलकर केकेआर को सम्मानित स्कोर तक पहुंचाया।
लखनऊ सुपर जायंट्स को आखिरी ओवर में जीत के लिए 17 रन चाहिए था और केकेआर की तरफ से गेंदबाजी करने कार्तिक त्यागी आए। उन्होंने ओवर में दो नोबॉल डाली, जिससे यह मुकाबला आखिरी गेंद तक पहुंचा। अब लखनऊ को आखिरी गेंद पर जीतने के लिए 7 रन चाहिए था और स्ट्राइक पर मोहम्मद शमी थे।
मोहम्मद शमी ने कार्तिक त्यागी की आखिरी गेंद पर छक्का जड़कर लखनऊ को सुपर ओवर तक पहुंचाया। यहां से लग रहा था कि मुकाबला अब काफी रोमांचक होने वाला है और जिस तरह लखनऊ की टीम ने लड़ाई लड़ी है, उससे वह सुपर ओवर में मैच जीत भी सकती है।
लखनऊ की तरफ से सुपर ओवर खेलने के लिए निकोलस पूरन और एडन मारक्रम आए। वहीं केकेआर की तरफ से गेंदबाजी का भार सुनील नरैन ने संभााला। सुनील नरैन ने अपनी पहली ही गेंद पर निकोलस पूरन को जीरो रन पर बोल्ड आउट करके तहलका मचा दिया।
निकोलस पूरन के आउट होने के बाद लखनऊ के कप्तान ऋषभ पंत बैटिंग के लिए आए। उन्होंने सुनील नरैन की दूसरी गेंद पर सिंगल लिया और अब स्ट्राइक पर एडन मारक्रम पहुंचे। सुनील नरैन ने मारक्रम को तीसरी गेंद फेंकी जो उन्होंने हवा में उछाल दिया। इस गेंद पर रोमेन पॉवेल और रिंकू सिंह ने मिलकर एडन मारक्रम का जबरदस्त कैच लिया।
एडन मारक्रम के आउट होने के बाद लखनऊ के लिए सुपर ओवर समाप्त हो गया। लखनऊ ने अपने सुपर ओवर में मात्र 1 रन बनाए और कोलकाता नाईट राइडर्स को जीत के लिए 2 रनों का लक्ष्य दिया। इसके बाद कोलकाता के लिए रिंकू सिंह और रोमेन पॉवेल बल्लेबाजी के लिए आए।
प्रिंस यादव ने रिंकू सिंह को पहली गेंद डाली, जिसे उन्होंने चौका लगाकर KKR को सुपर ओवर जितवा दिया। रिंकू सिंह ने पहली ही गेंद पर मैच खत्म कर दिया। प्रिंस ने वाइड यॉर्कर डालने की कोशिश की, लेकिन वह ठीक से गेंद डाल नहीं पाए। रिंकू ने बल्ले का मुंह खोला और गेंद को ऑफ-साइड में स्क्वायर की तरफ खेल दिया। स्वीपर पर खड़ा फील्डर काफी अंदर था और उसके पास गेंद को बाउंड्री तक पहुंचने से रोकने का कोई मौका नहीं था।