ऑस्ट्रिया के वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में चीन ने 5.34 अरब मीट्रिक टन खनिजों का उत्पादन किया। यह दुनिया के कुल खनिज उत्पादन का करीब 26.9 प्रतिशत है। यानी दुनिया में उत्पादित हर चार टन खनिज में से करीब एक टन चीन से आता है। चीन की इस बढ़त की सबसे बड़ी वजह उसका विशाल कोयला उत्पादन है। अकेले चीन ने करीब 4.8 अरब मीट्रिक टन कोयले का उत्पादन किया, जिससे वह वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ा उत्पादक बना हुआ है।
इस लिस्ट में अमेरिका दूसरे स्थान पर है। अमेरिका ने वर्ष 2024 में 2.39 अरब मीट्रिक टन खनिजों का उत्पादन किया, जो वैश्विक उत्पादन का 12.1 प्रतिशत है। हालांकि यह चीन के मुकाबले आधे से भी कम है। रूस तीसरे स्थान पर रहा, जबकि भारत चौथे स्थान पर पहुंच गया। भारत ने 1.41 अरब मीट्रिक टन खनिजों का उत्पादन किया, जो दुनिया के कुल उत्पादन का 7.1 प्रतिशत है। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया पांचवें स्थान पर रहा।
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कोयला उत्पादक देश है। इसके अलावा देश में लौह अयस्क, बॉक्साइट, चूना पत्थर और कई अन्य महत्वपूर्ण खनिजों का भी बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। बुनियादी ढांचे के विकास, ऊर्जा क्षेत्र की बढ़ती मांग और औद्योगिक विस्तार के कारण भारत का खनिज उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। यही वजह है कि भारत वैश्विक खनिज बाजार में अपनी स्थिति लगातार मजबूत कर रहा है।
खनिज उत्पादन की लिस्ट में कई ऐसे देश शामिल हैं, जो तेल और गैस के बड़े उत्पादक भी हैं। इंडोनेशिया छठे, सऊदी अरब सातवें, कनाडा आठवें, ईरान नौवें और ब्राजील दसवें स्थान पर हैं। ऑस्ट्रेलिया लौह अयस्क, बॉक्साइट और लिथियम उत्पादन में दुनिया का अग्रणी देश है। वहीं इंडोनेशिया निकेल उत्पादन में नंबर-1 माना जाता है। रूस तेल, गैस, सोना और कई बेस मेटल्स का प्रमुख उत्पादक है।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में एशिया-प्रशांत क्षेत्र ने दुनिया के कुल खनिज उत्पादन का 50.3 प्रतिशत हिस्सा तैयार किया। यानी दुनिया के आधे से अधिक खनिज इसी क्षेत्र से आए। इस उपलब्धि में चीन, भारत, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया की सबसे बड़ी भूमिका रही। खास बात यह है कि अगर चीन को इस आंकड़े से अलग भी कर दिया जाए, तब भी एशिया-प्रशांत क्षेत्र दुनिया के करीब 23.4 प्रतिशत खनिज उत्पादन के साथ सबसे मजबूत क्षेत्रों में शामिल रहता है।
खनिज उत्पादन में उत्तरी अमेरिका दूसरे स्थान पर रहा, जिसकी हिस्सेदारी 15.9 प्रतिशत रही। इसके बाद यूरोप का योगदान 12 प्रतिशत और मध्य पूर्व का 11.6 प्रतिशत रहा। वहीं अफ्रीका की हिस्सेदारी 5.5 प्रतिशत रही। हालांकि अफ्रीका कोबाल्ट और प्लैटिनम जैसे महत्वपूर्ण खनिजों का बड़ा उत्पादक है। दक्षिण अमेरिका का योगदान 4.7 प्रतिशत रहा, जहां तांबा और लिथियम का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है।
visualcapitalist के मुताबिक रिपोर्ट बताती है कि दुनिया के टॉप 25 देश मिलकर वैश्विक खनिज उत्पादन का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा पैदा करते हैं। इसका मतलब है कि पूरी दुनिया की ऊर्जा, निर्माण और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी सप्लाई चेन काफी हद तक कुछ चुनिंदा देशों पर निर्भर है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी देश में खनिज उत्पादन उसकी प्राकृतिक संपदा, ऊर्जा संसाधनों, औद्योगिक क्षमता और घरेलू मांग पर निर्भर करता है। जिन देशों के पास भरपूर प्राकृतिक संसाधन और मजबूत उद्योग हैं, वे वैश्विक बाजार में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।
दुनिया में इलेक्ट्रिक वाहन, रिन्यूएबल एनर्जी, इंफ्रास्ट्रक्चर और हाई-टेक उद्योगों की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में कोयला, लौह अयस्क, लिथियम, निकेल, तांबा और अन्य खनिजों की जरुरत भी तेजी से बढ़ेगी। इसी वजह से चीन, भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और अन्य बड़े खनिज उत्पादक देशों का वैश्विक सप्लाई चेन में महत्व आने वाले वर्षों में और बढ़ने की संभावना है। खनिज संसाधनों पर मजबूत पकड़ रखने वाले देश भविष्य की ऊर्जा और औद्योगिक अर्थव्यवस्था में निर्णायक भूमिका निभाते रहेंगे।