रेलवे की पटरियां केवल लोहे की नहीं होती हैं, उनके नीचे बिछे पत्थरों का भी एक महत्वपूर्ण योगदान होता है। इन पत्थरों को 'बैलास्ट' (Ballast) कहा जाता है। अगर ये पत्थर नहीं होंगे, तो रेलगाड़ियां सुरक्षित नहीं चल पाएंगी। आइए, सात स्लाइडों के जरिए जानते हैं कि आखिर ये पत्थर पटरियों पर क्या काम करते हैं।
यह पत्थर रेल की पटरियों को एक मजबूत और स्थिर आधार प्रदान करते हैं। इनके बिना, पटरियां जमीन में धंस सकती हैं या हिल सकती हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका रहती है।
जब एक भारी रेलगाड़ी पटरियों से गुजरती है, तो बैलास्ट रेल और स्लीपर्स पर पड़ने वाले भार को चारों ओर फैला देते हैं। इससे जमीन पर एक ही जगह पर दबाव नहीं पड़ता है, जो पटरियों की सुरक्षा के लिए जरूरी है।
नुकीले और खुरदरे होने के कारण, ये पत्थर बारिश का पानी को आसानी से बहकर निकल जाने देते हैं। इससे पटरियों पर पानी जमा नहीं होता है और वे सूखी रहती हैं, जो उनकी लंबी उम्र के लिए महत्वपूर्ण है।
बैलास्ट की नियमित रूप से जांच और रखरखाव किया जाता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे सही ढंग से काम कर रहे हैं। यह पटरियों की सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
बैलास्ट रेलगाड़ी के चलने से होने वाले कंपन को अवशोषित कर लेते हैं, जिससे सफर आरामदायक बनता है और पटरियों को नुकसान नहीं पहुंचता है।
ये पत्थर स्लीपर्स को पटरियों के नीचे मजबूती से जकड़ कर रखते हैं, जिससे वे इधर-उधर नहीं हिलते हैं। यह पटरियों की स्थिरता के लिए आवश्यक है।
पत्थर पटरियों को तापमान में होने वाले बदलावों के प्रभाव से भी बचाते हैं। वे गर्मी और सर्दी में पटरियों को फैलने या सिकुड़ने से रोकने में मदद करते हैं।