नीम करौली बाबा का नाम सुनते ही सबसे पहले कैंची धाम याद आता है, लेकिन उनकी आध्यात्मिक विरासत सिर्फ नैनीताल तक सीमित नहीं है। देश के कई शहरों में ऐसे हनुमान मंदिर और आश्रम हैं, जिनका संबंध बाबा से रहा है।
इन मंदिरों की चर्चा ऐसे समय में हो रही है जब नीम करौली बाबा पर बनी फिल्म ‘हनुमान अंश’ लगातार सुर्खियों में है। विशाल चतुर्वेदी निर्देशित यह फिल्म बाबा के जीवन और उनकी हनुमान भक्ति पर आधारित है।
नैनीताल की खूबसूरत वादियों में स्थित हनुमानगढ़ी सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि पहाड़ों के बीच सुकून तलाशने वालों के लिए भी खास जगह है। मंदिर पहाड़ी पर स्थित है और यहां नीम करौली बाबा की परंपरा से जुड़ा आश्रम भी रहा है। बाबा ने 1951 में यहां आश्रम की शुरुआत की थी। कैंची धाम घूमने के साथ इसे अपनी यात्रा में शामिल किया जा सकता है।
कानपुर के पनकी क्षेत्र में स्थित हनुमान मंदिर नीम करौली बाबा से गहरे तौर पर जुड़ा माना जाता है। मंदिर का उद्घाटन जनवरी 1964 में हुआ था। बाबा से जुड़ी कई भक्त-कथाएं यहां की पहचान का हिस्सा हैं। धार्मिक यात्रा के साथ कानपुर शहर घूमने का प्लान हो तो यह पड़ाव खास हो सकता है।
शिमला जाएं तो प्रसिद्ध संकटमोचन हनुमान मंदिर को भी यात्रा सूची में रखा जा सकता है। नीम करौली बाबा से जुड़े मंदिरों की सूची में इसका उल्लेख मिलता है और यह कालका-शिमला मार्ग के पास तारादेवी क्षेत्र में स्थित है। देवदार और पहाड़ी वातावरण के बीच हनुमान जी के दर्शन यात्रा को आध्यात्मिक रंग देते हैं।
वृंदावन आमतौर पर कृष्ण भक्ति के लिए जाना जाता है, लेकिन यहां नीम करौली बाबा की आध्यात्मिक यात्रा की महत्वपूर्ण स्मृतियां भी जुड़ी हैं। आश्रम में हनुमान मंदिर है और यही वह स्थान है जहां बाबा ने अपने जीवन का अंतिम समय बिताया। वृंदावन की मंदिर यात्रा के बीच यह जगह आपको एक अलग आध्यात्मिक अनुभव दे सकती है।
अगर आप धार्मिक पर्यटन के साथ प्रकृति और शांति का अनुभव करना चाहते हैं, तो नैनीताल की हनुमानगढ़ी, कानपुर का पनकी, शिमला का संकटमोचन और वृंदावन आश्रम चार अलग-अलग तरह के अनुभव देते हैं। इन जगहों पर पहुंचकर महसूस होता है कि नीम करौली बाबा की विरासत किसी एक धाम तक सीमित नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग आध्यात्मिक पड़ावों में आज भी जीवंत है।