सीए यानी चार्टर्ड अकाउंटेंसी की डिग्री भारत में काफी प्रतिष्ठित माना जाता है। सीए का मुख्य फोकस अकाउंटिंग, ऑडिटिंग, टैक्सेशन, फाइनेंशियल रिपोर्टिंग और कॉर्पोरेट फाइनेंस जैसे क्षेत्रों पर रहता है।
सीए करने के बाद उम्मीदवार चार्टर्ड अकाउंटेंट के तौर पर प्रैक्टिस कर सकते हैं या कंपनियों में फाइनेंस, ऑडिट, टैक्स और अकाउंटिंग से जुड़ी जिम्मेदारियां संभाल सकता है।
सीए करने के बाद आप उम्मीदवार चार्टर्ड अकाउंटेंट के तौर पर प्रैक्टिस कर सकते हैं या कंपनियों में फाइनेंस, ऑडिट, टैक्स और अकाउंटिंग से जुड़ी जिम्मेदारियां संभाल सकता है।
जिन छात्रों की रुचि शेयर बाजार, निवेश, एसेट मैनेजमेंट या इन्वेस्टमेंट बैंकिंग में है, उनके लिए सीएफए एक उपयोगी विकल्प हो सकता है।
ऐसे में अगर आपकी रुचि अकाउंटिंग, टैक्स, ऑडिट और कंपनी की वित्तीय व्यवस्था समझने में है, तो आपके लिए सीए बेहतर विकल्प हो सकता
वहीं यदि आपका लक्ष्य निवेश, शेयर बाजार, रिसर्च और पोर्टफोलियो मैनेजमेंट में करियर बनाना है, तो CFA पर विचार किया जा सकता है।
यदि पैकेज की बात करें तो किसी एक कोर्स को हमेशा सबसे ज्यादा सैलरी वाला कहना संभव नहीं है। शुरुआती वेतन कंपनी, जॉब प्रोफाइल, अभ्यर्थी की स्किल और अनुभव पर निर्भर करता है।