क्या आप जानते हैं कि 1990 के उस खौफनाक हमले ने 'दीदी' की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी थी? सफेद सूती साड़ी, हवाई चप्पल और आंखों में क्रांति लिए ममता बनर्जी के संघर्ष की वो 10 दुर्लभ तस्वीरें, जो भारतीय राजनीति के एक सुनहरे और कड़े दौर की गवाह हैं।
अगस्त 1990 में हजरा मोड़ पर हुए हमले के बाद सिर पर पट्टी बंधी ममता दीदी की तस्वीर। यह वही दौर था जब उनके सिर पर 16 टांके लगे थे।
1990 के दशक में जब ममता बनर्जी ने बंगाल की राजनीति में अपनी आवाज बुलंद की। जवानी के वो दिन जब जोश और जुनून ही उनकी असली ताकत थी।
पुलिसिया कार्रवाई के बीच सड़क पर बैठकर विरोध जताती ममता बनर्जी। इसी जुझारूपन ने उन्हें 'अग्निपुत्री' की पहचान दिलाई थी।
पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री ज्योति बसु के साथ एक ही फ्रेम में ममता बनर्जी। संघर्ष और वैचारिक मतभेद के बीच यह एक ऐतिहासिक पल है।
सफेद साधारण सूती साड़ी और कंधों पर झोला लटकाए ममता बनर्जी की जवानी की एक दुर्लभ फोटो, जो उनकी सादगी का प्रमाण है।
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ ममता बनर्जी की एक पुरानी तस्वीर, जब वे कांग्रेस की उभरती हुई तेज-तर्रार नेता हुआ करती थीं।
TMC की प्रमुख ममता बनर्जी का युवा दौर और राजनीतिक सफर बेहद संघर्षपूर्ण रहा है, जिसमें उन्होंने एक साधारण कार्यकर्ता से 'स्ट्रीट फाइटर' और फिर मुख्यमंत्री तक का सफर तय किया
अटल जी के मंत्रिमंडल में रेल मंत्री के रूप में कार्य करते हुए ममता बनर्जी की एक दुर्लभ फोटो। दोनों के बीच आपसी सम्मान के कई किस्से मशहूर हैं।
पहली बार रेल मंत्री बनने के बाद पुराने नेताओं और फाइलों के बीच काम करती ममता दीदी। यहीं से उन्होंने आम आदमी की रेल का सपना बुना था।
कालीघाट के अपने छोटे से घर में यादों के बीच ममता बनर्जी। कल और आज के बीच उनकी सादगी का अटूट रिश्ता।