16,627 फीट की ऊंचाई पर स्थित 'तांगगुला' दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे स्टेशन है। यहां का नजारा जितना जादुई है, उतना ही खतरनाक भी; क्योंकि इस स्टेशन पर आकर ट्रेनें धीमी तो होती हैं, लेकिन किसी भी यात्री को नीचे पैर रखने की इजाजत नहीं है। आखिर क्यों
तांगगुला रेलवे स्टेशन को खास तौर पर किंगहाई-तिब्बत रेलवे प्रोजेक्ट के लिए बनाया गया था, ताकि यह चीन की मुख्य भूमि और बहुत दूर तिब्बती स्वायत्त क्षेत्र के बीच एक जुड़ाव बन सके।
यह स्टेशन खुद एक बेसिक बिल्डिंग है जहां कोई एक्टिव पैसेंजर सर्विस या परमानेंट स्टाफ नहीं है। हालांकि, ट्रेनें इस जगह पर रेगुलर धीमी हो जाती हैं, जिससे यात्रियों को नजारा देखने का समय मिल जाता है।
तांगगुला रेलवे स्टेशन पर पैसेंजर ट्रेनें नहीं रुकतीं यानी इस स्टेशन पर कोई उतरता या चढ़ता नहीं है। यह मुख्य रूप से एक फंक्शनल, बिना स्टाफ वाला स्टॉप है।
यहां यात्री उतर नहीं सकते, लेकिन ट्रेन रुकती है और बाहर के मनोरम दृश्यों को देखने का मौका मिलता है। यहां कि ट्रेन में ऑक्सीजन की सुविधा दी जाती है ताकि यात्रियों को कोई दिक्कत ना हो।
ट्रेन में हवाई जहाज की तरह प्रेशराइज्ड केबिन, यात्रियों के लिए पर्सनल आउटलेट के साथ ऑक्सीजन सप्लाई सिस्टम, ऊंचाई की बीमारी की चेतावनी कार्ड और इमरजेंसी के लिए ट्रेंड मेडिकल स्टाफ है।
बर्फ की चादर और बादलों को चीरकर गुजरने वाला यह चमत्कारी रेल रूट सीधे तिब्बत की राजधानी ल्हासा तक पहुंच प्रदान करता है। इंजीनियरिंग का यह अजूबा यात्रियों को एक ऐसा सफर कराता है जिसे वे जिंदगी भर नहीं भूल पाते।