यह दुनिया का सबसे बड़ा देश है जहां कोई स्थायी नदी नहीं है। यहां “वाडी” नाम की सूखी धाराएं बारिश के समय ही भरती हैं। पानी के लिए देश मुख्य रूप से भूजल पर निर्भर है। डिसेलिनेशन भी तेजी से बढ़ रहा है।
रेगिस्तानी और समतल भूभाग के कारण यहां नदियां और झीलें नहीं हैं।देश पूरी तरह तकनीक आधारित जल स्रोतों पर निर्भर है। डिसेलिनेशन मुख्य स्रोत है। भूजल भी सीमित मात्रा में उपलब्ध है।
यहां प्राकृतिक नदियां नहीं हैं। समुद्री पानी को मीठा बनाकर इस्तेमाल किया जाता है। डिसेलिनेशन प्लांट्स यहां की लाइफलाइन हैं। पानी का बेहद सावधानी से उपयोग किया जाता है।
यहां नदियां और झीलें दोनों का अभाव है। अत्यधिक गर्मी और कम बारिश बड़ी चुनौती है। समुद्री पानी को मीठा बनाकर उपयोग किया जाता है। जल संरक्षण यहां बेहद जरूरी है।
पहले यहां समुद्र के नीचे मीठे पानी के स्रोत थे, लेकिन अब ये लगभग खत्म हो चुके हैं। आज देश पूरी तरह डिसेलिनेशन पर निर्भर है। जल संकट एक बड़ा मुद्दा बन चुका है।
यहां स्थायी नदियां नहीं हैं, लेकिन “वाडी” मौजूद हैं। ये मौसमी धाराएं बारिश में ही बहती हैं। पारंपरिक ‘अफलाज’ सिस्टम से पानी बांटा जाता है। यह सिस्टम सदियों पुराना है।
यह एक बेहद समतल द्वीप देश है। यहां नदियां बनने की कोई संभावना नहीं है। पानी मुख्य रूप से बारिश और भूजल से मिलता है। जल स्रोत बेहद संवेदनशील और सीमित हैं।