भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है। हर दिन यहां लगभग 13,000 यात्री ट्रेनों का संचालन किया जाता है। जिसमें लंबी दूरी और छोटी दूरी के लिए चलने वाली सभी ट्रेनें शामिल है।
प्रतिदिन भारत में 2 से 3 करोड़ लोग ट्रेन में यात्रा करते हैं। आज भी भारत में यात्रा के लिए सबसे आरामदायक परिवहन ट्रेन को माना जाता है।
भारत में हर दिन हजारों ट्रेनों का संचालन किया जाता है, जिसमें करोड़ों लोग यात्रा करते हैं। आपने भी ट्रेन में कभी न कभी यात्रा जरूर की होगी। ऐसे में आपको भी नेटवर्क की समस्या का सामना करना पड़ा होगा। कमजोर नेटवर्क होने के कारण कॉल करना तो दूर मैसेज भी सेंड नहीं होते हैं।
पहले के समय में नेटवर्क की समस्या को फिर भी आम मान लिया जाता था, लेकिन वर्तमान समय में भी अगर आप ट्रेन में यात्रा करते हैं तो आपको कमजोर नेटवर्क की समस्या का सामना करना पड़ता है। आइए जानते हैं कि इसके पीछे की मुख्य वजह क्या है?
ट्रेन में मोबाइल नेटवर्क का कमजोर होने की बड़ी वजह उसका रूट होता है। ट्रेन अक्सर गांवों, जंगलों और पहाड़ी इलाकों से गुजरती है। इन स्थानों पर मोबाइल टावर की संख्या बहुत कम होती है। यही कारण है कि सिग्नल कमजोर पड़ जाते हैं।
ट्रेन की बनावट भी मोबाइल नेटवर्क को प्रभावित करती है। क्योंकि ट्रेन का ढांचा पूरी तरह से धातु का बना होता है, जो काफी हद तक रेडियो सिग्नल को रोकता है। यह भी एक वजह है कि ट्रेन में यात्रा के दौरान सिग्नल बार-बार गिरते रहते हैं।
कई बार मोबाइल में नेटवर्क पूरे होते हैं लेकिन इंटरनेट की स्पीड इतनी धीमी होती है कि एक मैसेज तक सेंड करना मुश्किल हो जाता है। इसके पीछे की वजह है यह है कि ट्रेन में एक ही समय पर भारी संख्या में लोग मोबाइल डाटा का इस्तेमाल कर रहे होते हैं। ऐसे में एक ही टावर पर अधिक यूजर लोड होने से स्पीड पर असर पड़ता है।