उत्तर प्रदेश में एक ऐसा अनोखा पुल मौजूद है, जिसे देखकर लोग हैरान रह जाते हैं। इस पुल की सबसे खास बात यह है कि इसके नीचे नदी बहती है, जबकि ऊपर से नहर गुजरती है। इंजीनियरिंग का यह अद्भुत नमूना यूपी के कासगंज जिले में स्थित है, जिसे “नदरई का पुल” कहा जाता है। स्थानीय लोग इसे “झाल का पुल” और “अंग्रेजी पुल” के नाम से भी जानते हैं।
यह ऐतिहासिक पुल आज भी अपनी मजबूत बनावट और अनोखे डिजाइन के कारण लोगों को आकर्षित करता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुल के नीचे काली नदी बहती है, जबकि उसके ऊपर से गंगा नहर गुजरती है। नदी और नहर का यह संगम देखने वालों को रोमांचित कर देता है और यहां का नजारा बेहद सुकून देने वाला माना जाता है।
नदरई पुल का निर्माण ब्रिटिश शासन के दौरान वर्ष 1885 से 1889 के बीच कराया गया था। हैरानी की बात यह है कि उस समय पुल बनाने में न तो सीमेंट का इस्तेमाल हुआ था और न ही लोहे की सरिया का। इसे चूना, अरहर की दाल का पानी, चना और गुड़ जैसी पारंपरिक सामग्रियों से तैयार किया गया था।
करीब चार साल में बनकर तैयार हुए इस पुल की मजबूती आज भी लोगों को चौंका देती है। इतने वर्षों बाद भी पुल से पानी का रिसाव नहीं होता, जो उस दौर की बेहतरीन इंजीनियरिंग तकनीक का उदाहरण माना जाता है।
इस पुल की संरचना को और खास बनाते हैं इसके बीच-बीच में बने छोटे-छोटे अहाते। इन्हें स्थानीय भाषा में “चोर अहाते” कहा जाता है। माना जाता है कि पुराने समय में लोग इन जगहों का इस्तेमाल छिपने के लिए करते थे। हालांकि, ये अहाते सिर्फ छिपने की जगह नहीं थे, बल्कि पुल को अतिरिक्त मजबूती देने के लिए भी बनाए गए थे। यही कारण है कि यह पुल आज भी मजबूती से खड़ा है।
दरअसल, जब गंगा नहर का निर्माण किया जा रहा था, तब उसके रास्ते में काली नदी आ रही थी। इंजीनियरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि नहर के पानी को नदी में मिलाए बिना आगे कैसे ले जाया जाए, ताकि सिंचाई व्यवस्था प्रभावित न हो। इसके समाधान के तौर पर नदी के ऊपर पुल बनाया गया और उसके ऊपर से नहर निकाली गई।
आज यह पुल सिर्फ एक ऐतिहासिक धरोहर ही नहीं, बल्कि भारतीय इंजीनियरिंग कौशल का शानदार उदाहरण भी माना जाता है। दूर-दूर से लोग इस अनोखी संरचना को देखने के लिए यहां पहुंचते हैं।
Jun 14, 2026