अधिकतर छात्रों का सपना एम्स से एमबीबीए करने का होता है। हालांकि यहां नीट यूजी में टॉप रैंक वालों को ही एडमिशन मिल पाता है। यही कारण है कि कुछ ही छात्रों को यहां एडमिशन मिल पाता है। ऐसे में क्या आप जानते हैं कि भारत में कुल कितने एम्स हैं? किस एम्स में एमबीबीएस की कितनी सीटें हैं। यदि आप भी नहीं जानते हैं तो यहां जान लीजिए।
बता दें भारत में कुल 25 से 26 एम्स (AIIMS) संस्थान स्वीकृत हैं, जिनमें से लगभग 20 एम्स कार्यरत हैं और शेष पर निर्माण या विकास का कार्य चल रहा है। प्रमुख एम्स की बात करें तो इसमें नई दिल्ली, भोपाल, जोधपुर, पटना, भुवनेश्वर, रायपुर और ऋषिकेश है।
बता दें एम्स नई दिल्ली में एमबीबीएस की कुल 132 सीटें हैं। इसमें भारतीय छात्रों के लिए 125 सीटें हैं, जिसमें सामान्य वर्ग के लिए 55 सीटें, अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 32, अनुसूचित जाति के लिए 18 सीटें, अनुसूचित जनजाति के लिए 9 और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS कोटा के लिए 11 सीटें आरक्षित हैं। वहीं विदेशी नागरिकों के लिए 7 सीटें हैं।
एम्स भोपाल की बात करें तो यहां एमबीबीएस की 125 सीटें हैं। यहां ऑल इंडिया कोटा के तहत एमसीसी काउंसलिंग के जरिए एडमिशन मिलता है। जबकि एम्स जोधपुर में एमबीबीएस की 150 सीटें हैं।
एम्स पटना में भी 125 सीटें हैं। इसमें अनारक्षित वर्ग (General Category) के लिए 55 सीटें, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 32, अनुसूचित जाति (SC) के लिए 18 सीटें, अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए 9 और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए 12 से 13 सीटें हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो एम्स भुवनेश्वर में भी 125 सीटें हैं। एम्स रायपुर में भी 125 सीटें हैं।
एम्स में एमबीबीएस या किसी भी अन्य मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के लिए छात्रों के एनटीए की ओर से आयोजित नीट यूजी यानी नेशनल एलिजिबिलिटी एंट्रेंस टेस्ट में टॉप की रैंकिंग होनी चाहिए। इसके बाद मेडिकल काउंसलिंग कमेटी की ओर से आयोजित ऑल इंडिया कोटा में शामिल होना होगा।ध्यान रहे यह सभी जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार की गई है। अधिक जानकारी के लिए संबंधित एम्स की वेबसाइट पर विजिट करें।