हिमाचल प्रशासन ने इस बार बाढ़ नियंत्रण कार्यों के लिए पुरानी तकनीक के बजाय वैज्ञानिक और अधिक प्रभावी तरीकों को अपनाने पर जोर दिया है। जल शक्ति सचिव अभिषेक जैन ने स्पष्ट किया कि सेंट्रल वाटर कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर ब्यास नदी के किनारों को मजबूत किया जा रहा है। इसका मकसद केवल तात्कालिक राहत नहीं, बल्कि आपदा के समय स्थाई सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
तैयारियों का जायजा लेने के लिए सचिव ने खुद अटल टनल से लेकर कुल्लू तक ब्यास नदी के किनारे-किनारे पैदल सफर कर संवेदनशील इलाकों का निरीक्षण किया। उन्होंने पिछले सालों में आई विनाशकारी बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन किया और अधिकारियों को निर्देश दिए कि भविष्य में ऐसी किसी भी घटना को रोकने के लिए तटबंधों (Embankments) का निर्माण पूरी मजबूती के साथ किया जाए।
मनाली के प्रसिद्ध 'आलू ग्राउंड' के पास 700 मीटर के दायरे में करीब 8 करोड़ रुपये की लागत से बाढ़ नियंत्रण कार्य युद्ध स्तर पर चल रहे हैं। यह इलाका पर्यटन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है, इसलिए यहां की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि यह कार्य समय सीमा के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।
जल शक्ति विभाग 30 करोड़ रुपये की लागत से 2100 मीटर लंबे हिस्से में सुरक्षा दीवार का निर्माण कर रहा है। राहत की बात यह है कि इस बड़े प्रोजेक्ट को 15 अप्रैल तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे मानसून आने से काफी पहले ही नदी के किनारे स्थित बस्तियों को सुरक्षा कवच मिल जाएगा।
बाढ़ के खतरे को कम करने के लिए प्रशासन ने 11 प्रमुख स्थानों पर 'ड्रेजिंग' (नदी की खुदाई कर गहराई बढ़ाना) का प्रस्ताव तैयार किया है। इससे नदी की जल प्रवाह क्षमता बढ़ेगी और पानी किनारों को तोड़कर आबादी वाले क्षेत्रों में नहीं घुसेगा। नदी के प्राकृतिक मार्ग को सुगम बनाना इस साल की रणनीति का मुख्य हिस्सा है।
सड़कों और बुनियादी ढांचे को बचाने के लिए लोक निर्माण विभाग भी मुस्तैद है। विभाग द्वारा 800 मीटर के दायरे में 24 करोड़ रुपये की लागत से निर्माण कार्य किए जा रहे हैं, जिनमें से 15 करोड़ का काम पहले ही पूरा हो चुका है। बाकी काम जून तक समाप्त करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि पर्यटकों की आवाजाही मानसून में भी सुरक्षित रहे।
अभिषेक जैन ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी विभाग आपसी तालमेल के साथ काम करें। जिला उपायुक्त की अध्यक्षता में हर महीने समीक्षा बैठक होगी, जिसमें नेशनल हाईवे अथॉरिटी (NHAI) की भागीदारी भी अनिवार्य की गई है। इसका उद्देश्य यह है कि सड़क, पुल और नदी के सुरक्षा कार्य एक-दूसरे में बाधा न बनें।