दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से लेकर दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे, समृद्धि एक्सप्रेसवे, दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, मुंबई-बेंगलुरू एक्सप्रेसवे जैसे देश में तमाम एक्सप्रेसवे बनाए जा रहे हैं।
जब किसी ऐसी जगह पर सड़क का निर्माण किया जाता है, जहां पहले से सड़क नहीं है तो ऐसी सड़क को ग्रीनफील्ड कहा जाता है। ऐसी सड़क को बनाने के लिए बड़े स्तर पर जमीन अधिग्रहण की आवश्यकता पड़ती है।
जब किसी पुरानी सड़क को ही चौड़ा किया जाता है या पहले से मौजूद सड़क की जगह पर ही नई सड़क बनाई जाती है तो ऐसी सड़क को ब्राउनफील्ड कहा जाता है।
इस तरह से कह सकते हैं कि जब पहले से मौजूद सड़क के अलाइनमेंट साथ कोई एक्सप्रेसवे बनाया जाता है तो उसे ब्राउनफील्ड एक्सप्रेसवे कहा जाता है और जब बिल्कुल नए रूट पर एक्सप्रेसवे बनाते हैं तो उसे ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे कहते हैं।
जब सड़क का निर्माण कॉन्क्रीट का इस्तेमाल करके किया जाता है तो उनसे कॉन्क्रीट सड़क कहते हैं। भारी ट्रैफिक वाली सड़कों को इस विधि से बनाया जाता है।
छोटे पत्थरों से बनी एक ढीली सड़क यानी ग्रैवेल, जिसे कम ट्रैफिक दबाव वाले क्षेत्रों में बनाया जाता है। इसी तरह मिट्टी से बनी अस्थायी ग्रामीण सड़कों को अर्दन रोड्स कहा जाता है।
यह सड़कें एक चिपचिपे काले पदार्थ यानी बिटुमिन से तैयार होती हैं। यह बिटुमिन सड़क बनाने वाली सामग्री जिसमें कंकर भी शामिल होते हैं को बांधकर रखता है।
डामर और समुच्चय के मिश्रण से बनी सड़क की एक सामान्य और लचीली सतह को ब्लैकटॉप सड़क कहा जाता है।