चिड़िया को चुगते लगभग सभी ने कभी न कभी देखा होगा, लेकिन कभी नोटिस दिया है कि चिड़िया पत्थर के टुकड़े भी निगल जाती है....ऐसा क्यों? क्या ऐसा पर्याप्त खाना न मिलने की वजह से होता है या फिर उन्हें पता ही नहीं क्या खाने की चीज है और क्या नहीं। बता दें, इसके पीछे यह दोनों ही कारण नहीं है। (image - chatgpt)
ज्यादातर लोगों के मन में सवाल आएगा कि वजह कुछ भी हो, पत्थर या कंकड़ खाने से चिड़िया की मौत क्यों नहीं होती, तो आइये सारे सवालों के जवाब समझते हैं।
वास्तव में ये पत्थर या कंकड़ ही चिड़िया की जान बचाने का काम करते हैं। आपको पता होगा कि चिड़िया के मुंह में दांत नहीं होते हैं, इसलिए वो दाना पीसकर या चबाकर नहीं खा सकती है। ऐसे में जब कोई चिड़िया छोटे पत्थर या कंकड़ निगलती है, तो ये उसके पेट के एक हिस्से (गिजार्ड) में इकट्ठा हो जाते हैं।
अब जब चिड़िया दाना निगलती है तो उसके पेट में गिजार्ड नाम का हिस्सा एक्टिव हो जाता है। और फिर मजबूत मांसपेशियों की मदद से गिजार्ड में मौजूद छोटे पत्थर/कंकड़ दाने को कूटने-पीसने का काम करते हैं। इससे खाना जल्दी पचता है और शरीर को पोषण मिल जाता है।
चिड़िया आमतौर पर दाना चुगते समय, जमीन पर छोटे कंकड़ दिखने पर, या जब वह बीज, अनाज, सख्त दाना ज्यादा खाती है, तो ऐसे छोटे कंकड़ निगल लेती है।
नहीं, चिड़िया इन पत्थरों के बेकार होने के बाद मुंह या मल त्यागने वाले रास्ते से निकाल सकती है। दरअसल, ये कंकड़ आपस में लड़ते हैं, जिस वजह से ये एक समय के बाद चिकने होने लगते हैं, जिसके बाद इन्हें निकालकर दूसरे नए धारदार पत्थर खा लिए जाते हैं।
ज्यादातर दाना खाने वाले पक्षी जैसे कबूतर, मुर्गी, गौरैया आदि ऐसा करते हैं। मांस खाने वाले पक्षियों में यह आदत कम होती है या अलग तरह से होती है।