नोएडा में जिस महिला को जालसाजों ने डिजिटल अरेस्ट करके रखा वह एक फाइनेंस मैनेजर की पत्नी है। 12 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखने के बाद जालसाजों ने उससे 30 लाख रुपये ऐंठ लिए। बता दें कि कानूनी रूप से डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई प्रावधान नहीं है, यह जालसाजों का दिया हुआ शब्द है।
जालसाज ने ट्राई यानी टेलिफोन रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया का कर्मचारी बनकर महिला को व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल किया था। उसने बताया कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल करके करोड़ों रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग हुई है। ध्यान रहे कि TRAI के कर्मचारी किसी को ऐसे कॉल नहीं करते।
आधार कार्ड से मनी लॉन्ड्रिंग की बात कहकर जालसाज ने फोन लखनऊ के चंदनपुर ताने में ट्रांसफर करने का झांसा दिया। जालसाज ज्यादातर समय ऐसे शहर में आधे-एक घंटे में आने को कहते हैं, जहां पहुंचना 8-10 घंटे से पहले संभव नहीं है।
महिला को 12 दिन तक मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और RTGS के जरिए 30 लाख रुपये ट्रांसफर करवाए गए। इन 12 दिनों तक महिला दफ्तर जाने सहित अपने सभी काम निपटाती रही और ठग नॉर्मल कॉल पर निगरानी करते रहे। कोई फोन पर इस तरह से परेशान करे तो अपनों से बात करें, आपकी मेहनत की कमाई बच सकती है।
जालसाज अब भी महिला को कॉल करके धमकी दे रहे हैं। साइबर थाना पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज करके जांच शुरू कर दी है। ठगों ने महिला से HDFC, ICICI, SBI और एक अन्य खाते में रुपये ट्रांसफर करवाए। किसी के इस तरह डराने-धमकाने पर रुपये ट्रांसफर न करें।
प्रतीक विस्टेरिया में रहने वाली प्रियंका बंसल को एक वीडियो कॉल आयी और बताया गया कि वह ट्राई का कर्मचारी है। उसने बताया कि प्रियंका के आधार से एक मोबाइल नंबर लिया गया है, जो करोड़ों की मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल है और उनके नाम से शिकायत मिली है। यहां पर Timesnowhindi की तरफ से हमारी सलाह है कि अपने आधार कार्ड का वर्चुअल नंबर ही किसी को दें।
वीडियो कॉल पर पुलिस ड्रेस में बैठे व्यक्ति ने प्रियंका को कहा गया कि इस मामले की सीबीआई जांच होगी। साथ ही कहा कि परिवार में इसकी जानकारी किसी को न दें। अगर ऐसा हुआ तो नोएडा पुलिस तुरंत उनके बेटे और पूरे परिवार को गिरफ्तार कर लेगी। पुलिस या सीबीआई जांच में परिवार को न बताने की बात पर आपके कान खड़े हो जाने चाहिए।
जालसाजों ने प्रियंका को डराकर उनका आधार नंबर और अन्य पर्सनल कागजात ले लिए। खाते की जांच आरबीआई की तरफ से किए जाने की बात भी ठगों ने कही। इस बीच 12 दिन लगे और 14 सितंबर को ठगों ने काता वेरिफाई करने के नाम पर RTGS के जरिए रकम ट्रांसफर करवा ली। हमारी सलाह है कि किसी को भी ऑनलाइन अपने जरूरी कागजात न दें।