अब तक 9 मुख्यमंत्रियों के बेटों की हुई बिहार की राजनीति में एंट्री; कोई बना 'किंगमेकर' तो किसी के हिस्से आया संघर्ष

बिहार की राजनीति में दशकों से 'समाजवाद' और 'परिवारवाद' के बीच एक महीन रेखा रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जो हमेशा से राजनीति में परिवारवाद के घोर विरोधी रहे हैं, अब उनके जीवन में भी एक बड़ा मोड़ आया है। उनके बेटे निशांत कुमार के जनता दल (यूनाइटेड) में शामिल होने के साथ ही बिहार के सियासी गलियारों में एक नई चर्चा शुरू हो गई है। बिहार के लोकतांत्रिक इतिहास में नीतीश कुमार अब ऐसे 9वें मुख्यमंत्री बन गए हैं, जिनकी विरासत को संभालने के लिए उनके पुत्र ने चुनावी राजनीति की दहलीज पर कदम रखा है।

Authored by: निशांत तिवारीUpdated Mar 9 2026, 10:46 IST
नीतीश की विरासत: निशांत का 'इंजीनियरिंग' से 'पॉलिटिक्स' तक का सफरImage Credit : PTI/Official Social Media01 / 07

नीतीश की विरासत: निशांत का 'इंजीनियरिंग' से 'पॉलिटिक्स' तक का सफर

नीतीश कुमार के इकलौते बेटे निशांत कुमार अब तक सार्वजनिक जीवन और चकाचौंध से दूर रहे हैं। पिता की तरह पेशे से इंजीनियर निशांत का झुकाव अब तक अध्यात्म की ओर अधिक देखा गया था। अविवाहित निशांत की राजनीति में एंट्री ऐसे समय में हुई है जब नीतीश कुमार खुद राज्यसभा की ओर रुख कर रहे हैं। हालांकि नीतीश हमेशा लालू परिवार पर 'परिवारवाद' को लेकर हमलावर रहे हैं, लेकिन अब निशांत पर जेडीयू के भविष्य और अपने पिता की साफ-सुथरी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने का बड़ा जिम्मा है। (चित्र: PTI)

लालू के लालों की जोड़ी: तेजस्वी और तेज प्रताप की संघर्ष भरी राहImage Credit : PTI/Official Social Media02 / 07

लालू के लालों की जोड़ी: तेजस्वी और तेज प्रताप की संघर्ष भरी राह

राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की राजनीतिक विरासत उनके दोनों बेटों, तेजस्वी और तेज प्रताप के कंधों पर है। तेजस्वी यादव जहां पार्टी के सर्वेसर्वा और चेहरा बनकर उभरे हैं, वहीं बड़े बेटे तेज प्रताप ने अपनी अलग राह चुनते हुए 'जनशक्ति जनता दल' बनाई। हालांकि, 2025 के विधानसभा चुनाव में दोनों भाइयों के लिए डगर कठिन रही। तेजस्वी के नेतृत्व में महागठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा, वहीं तेज प्रताप अपनी महुआ सीट भी नहीं बचा सके। परिवारवाद के आरोपों के बीच दोनों भाई अभी भी अपने पिता जैसा जन आधार तलाश रहे हैं। (चित्र साभार: PTI)

कर्पूरी ठाकुर के पुत्र: रामनाथ ठाकुर का सफल राजनीतिक ग्राफImage Credit : PTI/Official Social Media03 / 07

कर्पूरी ठाकुर के पुत्र: रामनाथ ठाकुर का सफल राजनीतिक ग्राफ

जननायक कर्पूरी ठाकुर की सादगी वाली विरासत को उनके बेटे रामनाथ ठाकुर ने बखूबी संभाला है। जेडीयू के कद्दावर नेता और राज्यसभा सांसद रामनाथ ठाकुर वर्तमान में केंद्र सरकार में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री हैं। वह नीतीश सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं। उन्होंने खुद को एक गंभीर और भरोसेमंद राजनेता के रूप में स्थापित किया है, जो अपने पिता के सिद्धांतों को सत्ता के गलियारों में जीवंत रखे हुए हैं। (चित्र साभार: X/Ramnath Thakur)

मांझी परिवार: संतोष सुमन और 'हम' की राजनीतिक पैठImage Credit : PTI/Official Social Media04 / 07

मांझी परिवार: संतोष सुमन और 'हम' की राजनीतिक पैठ

पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमन इस समय बिहार सरकार में मंत्री हैं। मांझी ने नीतीश कुमार से अलग होने के बाद 'हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा' (HAM) का गठन किया था। संतोष सुमन अपने पिता के साये में रहकर न केवल पार्टी का काम देख रहे हैं, बल्कि एनडीए गठबंधन के भीतर दलित राजनीति के एक महत्वपूर्ण चेहरे के रूप में उभर रहे हैं। जीतन राम मांझी खुद इस समय केंद्र में मंत्री की भूमिका निभा रहे हैं। (चित्र साभार: X/Santosh Suman)

दरोगा राय से जगन्नाथ मिश्रा तक: विरासत और व्यक्तिगत पहचानImage Credit : PTI/Official Social Media05 / 07

दरोगा राय से जगन्नाथ मिश्रा तक: विरासत और व्यक्तिगत पहचान

कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे पूर्व सीएम दरोगा राय के बेटे चंद्रिका राय ने राजनीति में लंबा समय बिताया, लेकिन वे अपने पिता जैसा कद हासिल नहीं कर सके। फिलहाल वह जेडीयू में हैं। वहीं, पूर्व सीएम जगन्नाथ मिश्रा की विरासत को उनके बेटे नीतीश मिश्रा आगे बढ़ा रहे हैं। नीतीश मिश्रा ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है और वे वर्तमान में भाजपा के विधायक और पूर्व मंत्री के रूप में बिहार की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। (चित्र साभार:Facebook/Chandrika Ray/PTI)

क्रिकेट के मैदान से संसद तक: कीर्ति आजाद Image Credit : PTI/Official Social Media06 / 07

क्रिकेट के मैदान से संसद तक: कीर्ति आजाद

पूर्व मुख्यमंत्री भागवत झा आजाद के बेटे कीर्ति आजाद की कहानी थोड़ी अलग है। उन्होंने राजनीति में आने से पहले क्रिकेट की दुनिया में नाम कमाया और 1983 विश्व कप विजेता टीम का हिस्सा रहे। कीर्ति आजाद ने अपना राजनीतिक सफर भाजपा से शुरू किया, लेकिन बाद में कांग्रेस और फिर टीएमसी का दामन थाम लिया। वे कई बार सांसद रहे और अपनी बेबाक बयानबाजी के लिए जाने जाते हैं। (चित्र साभार: PTI)

निखिल कुमार और संजय कुमार दास: राज्यपाल से लेकर विधायक तक की पारीImage Credit : PTI/Official Social Media07 / 07

निखिल कुमार और संजय कुमार दास: राज्यपाल से लेकर विधायक तक की पारी

पूर्व मुख्यमंत्री सत्येंद्र नारायण सिन्हा के बेटे निखिल कुमार ने राजनीति में गरिमापूर्ण स्थान बनाया और वे दिल्ली के पुलिस कमिश्नर रहने के बाद राज्यपाल जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर भी रहे। वहीं, दलित नेता और पूर्व सीएम रामसुंदर दास के बेटे संजय कुमार दास भी विधायक बने, हालांकि वे राज्य की राजनीति में बहुत गहरा प्रभाव छोड़ने में सफल नहीं रहे। (चित्र साभार: केरल लोकभवन)

End of Photo Gallery
Subscribe to our daily Newsletter!