असम में विधानसभा चुनावों को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। 9 अप्रैल को चुनाव हैं, जिसको लेकर राज्य जोरशोर से तैयारियां चल रही हैं, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि इसका असर पर्यटन पर नकारात्मक नहीं पड़ा है। काजीरंगा नेशनल पार्क में पर्यटकों की संख्या में ठीकठाक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों से इसका अंदाजा लग रहा है। केवल स्थानीय लोग ही नहीं बल्कि बाहरी सैलानी भी हाल-फिलहाल काजीरंगा की सफारी का लुत्फ उठा रहे हैं।
ब्रह्मपुत्र नदी के मैदानी इलाकों में स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल 'काजीरंगा नेशनल पार्क' इन दिनों पर्यटकों की पहली पसंद बना हुआ है। इसका एक कारण सरकार की काजीरंगा में गैंडों के संरक्षण की प्राथमिकता भी है। साल 2025 में काजीरंगा में गैंडे के शिकार की एक भी घटना न होना सरकार के प्रभावी सुरक्षा उपायों का प्रमाण है। लेकिन गैंडों के साथ पर्यटक यहां कुछ और भी जीवों को देखने आते हैं।
काजीरंगा आने वाले हर पर्यटक की पहली पसंद 'भारतीय एक सींग वाला गैंडा' है। दुनिया की सबसे बड़ी गैंडा आबादी वाला यह पार्क इन दिनों सैलानियों से गुलजार है। ऊंची घासों और दलदली इलाकों में चरते हुए इन विशालकाय शाकाहारी जीवों को देखना एक जादुई अनुभव होता है। पर्यटकों के लिए हाथी सफारी गैंडों के सबसे करीब जाने का सबसे रोमांचक जरिया बनी हुई है।
गैंडों के अलावा एशियाई हाथी काजीरंगा के मुख्य आकर्षणों में से एक हैं। हाथियों के बड़े-बड़े झुंडों को घास के मैदानों और वन क्षेत्रों से गुजरते हुए देखना पर्यटकों को रोमांचित कर देता है। वहीं, काजीरंगा को टाइगर रिजर्व का दर्जा भी प्राप्त है। यहां बंगाल टाइगर का घनत्व भारत के अन्य संरक्षित क्षेत्रों की तुलना में काफी अधिक है। हालांकि बाघों को देखना थोड़ा मुश्किल होता है, लेकिन उनकी एक झलक पाने की उम्मीद में सैलानी घंटों जीप सफारी करते नजर आते हैं।
काजीरंगा की आर्द्रभूमि (Wetlands) 'बारासिंघा' यानी दलदली हिरणों का घर है। अपनी विशिष्ट सींगों के लिए पहचाने जाने वाले ये हिरण खुले मैदानों में अक्सर देखे जा सकते हैं। इनके साथ ही विशाल 'जंगली पानी वाली भैंस' (Wild Water Buffalo) भी यहां की पहचान है। ब्रह्मपुत्र नदी के बाढ़ के मैदानों में इन जीवों की मौजूदगी काजीरंगा के इकोलॉजी तंत्र को और भी समृद्ध बनाती है।
सफारी के दौरान पर्यटकों को सबसे ज्यादा 'हॉग डियर' यानी पाढ़ा हिरण देखने को मिलते हैं। ये आकार में छोटे होते हैं और अक्सर जलाशयों के किनारे चरते हुए पाए जाते हैं। इसके अलावा, काजीरंगा के घने जंगलों में 'स्लॉथ बियर' (भालू) भी पाए जाते हैं। हालांकि ये थोड़े शर्मीले स्वभाव के होते हैं और फलों या दीमकों की तलाश में शाम के समय अधिक सक्रिय होते हैं, लेकिन किस्मत अच्छी हो तो पर्यटकों को इनका दीदार भी हो जाता है।
काजीरंगा केवल बड़े जानवरों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पक्षी प्रेमियों के लिए भी स्वर्ग है। यहां सैकड़ों प्रजातियों के देशी और प्रवासी पक्षी देखे जा सकते हैं। वहीं, पार्क के जंगली इलाकों में भारतीय तेंदुआ (Leopard) भी निवास करता है। सुबह और शाम की सफारी के दौरान अगर आप शांत रहें, तो झाड़ियों के बीच छिपे इन शिकारी जीवों को देखना एक शानदार अनुभव बन जाता है।