अब अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजार रैंकिंग में ताइवान केवल अमेरिका, चीन, जापान और हांगकांग से पीछे है। यह उपलब्धि इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि ताइवान का आकार और आबादी भारत की तुलना में बेहद छोटी है। इसके बावजूद निवेशकों का भरोसा ताइवान पर लगातार बढ़ रहा है। खास बात यह है कि ताइवान की यह सफलता टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI सेक्टर की वजह से आई है।
पिछले कुछ वर्षों में पूरी दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। AI टेक्नोलॉजी के लिए हाई-परफॉर्मेंस चिप्स की जरूरत होती है और इन्हीं चिप्स के निर्माण में ताइवान दुनिया का सबसे बड़ा खिलाड़ी बन चुका है। AI की बढ़ती मांग ने ताइवानी टेक कंपनियों को जबरदस्त फायदा पहुंचाया। इसी वजह से वहां के शेयर बाजार में तेज उछाल देखने को मिला और विदेशी निवेशकों का भरोसा भी मजबूत हुआ।
ताइवान की इस सफलता के पीछे सबसे बड़ा नाम Taiwan Semiconductor Manufacturing Company यानी TSMC का है। यह कंपनी दुनिया की सबसे बड़ी सेमीकंडक्टर निर्माता कंपनी मानी जाती है। ताइवान के बेंचमार्क इंडेक्स में TSMC की हिस्सेदारी करीब 42% तक पहुंच चुकी है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह कंपनी ताइवान की अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार के लिए कितनी महत्वपूर्ण है।
TSMC उन एडवांस्ड चिप्स का निर्माण करती है जिनका इस्तेमाल दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियां करती हैं। इनमें Nvidia, Apple, AMD और Qualcomm जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं। AI टेक्नोलॉजी के बढ़ते उपयोग के कारण इन कंपनियों को ज्यादा चिप्स की जरूरत पड़ रही है। इसका सीधा फायदा TSMC को मिला और कंपनी के शेयरों में इस साल करीब 49% की तेजी दर्ज की गई।
भारत की अर्थव्यवस्था ताइवान से कहीं बड़ी है। भारत की आबादी 140 करोड़ से ज्यादा है और यहां लाखों कंपनियां शेयर बाजार में लिस्टेड हैं। इसके अलावा भारत में रिटेल निवेशकों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। इसके बावजूद भारत का शेयर बाजार ताइवान से पीछे रह गया। इसकी सबसे बड़ी वजह यह मानी जा रही है कि भारत में अभी तक AI और सेमीकंडक्टर सेक्टर में उतनी मजबूत पकड़ नहीं बन पाई है, जितनी ताइवान ने बना ली है।
ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों ने पिछले कई वर्षों से टेक्नोलॉजी मैन्युफैक्चरिंग पर खास ध्यान दिया है। खासकर सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में उन्होंने दुनिया भर में मजबूत पहचान बनाई। आज जब AI का दौर शुरू हुआ तो इन देशों को इसका सीधा फायदा मिला। निवेशकों ने तेजी से उन बाजारों की ओर रुख किया जो AI और चिप निर्माण से जुड़े हुए थे। इससे ताइवान के शेयर बाजार में रिकॉर्ड तेजी देखने को मिली।
ताइवान की यह उपलब्धि भारत के लिए एक बड़ा संकेत मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में AI, सेमीकंडक्टर और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक ताकत बन सकते हैं। यदि भारत को वैश्विक शेयर बाजार में मजबूत स्थिति बनानी है तो उसे टेक्नोलॉजी और चिप निर्माण सेक्टर में तेजी से निवेश बढ़ाना होगा। साथ ही रिसर्च, इनोवेशन और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को भी मजबूत करना होगा। ताइवान ने दिखा दिया है कि छोटा देश होने के बावजूद सही रणनीति और टेक्नोलॉजी पर फोकस करके दुनिया के बड़े बाजारों को चुनौती दी जा सकती है।