Rahu-Ketu Gochar 2026 Date, Effect & Upay: राहु और केतु को नवग्रहों का हिस्सा माना जाता है, लेकिन मुख्यरूप से ये छाया ग्रह कहलाते हैं। इन दोनों ग्रहों को अधिकतर लोग एक जैसे मानते हैं, परन्तु इनका प्रभाव एक-दूसरे से पूरी तरह से विपरित है। राहु को जहां व्यक्ति के साथ अचानक होने वाली घटनाओं का जिम्मेदार माना जाता है, वहीं केतु मनुष्य को सांसारिक मोह-माया से मुक्त करने में मदद करते हैं। इसके अलावा राहु का संबंध तकनीक, आधुनिक क्षेत्रों से जुड़े कार्यों और गुप्त चीजों व रोगों से भी है। केतु की बात करें तो वो यात्राओं और आत्म-ज्ञान का शुभ-अशुभ संकेत देते हैं। चलिए अब जानें अगस्त 2026 में राहु-केतु ग्रहों की स्थिति में होने वाले बदलावों और राशियों पर होने वाले असर के बारे में। साथ ही आपको राहु-केतु गोचर के दौरान करने वाले शुभ उपायों के बारे में पता चलेगा।
राहु-केतु गोचर का समय
द्रिक पंचांग के मुताबिक, साल 2026 में अगस्त के महीने में दूसरी तारीख को छाया ग्रह राहु के साथ-साथ केतु का भी नक्षत्र गोचर होगा। ग्रहों के सेनापति के नक्षत्र धनिष्ठा में जहां राहु ग्रह का गोचर होगा, वहीं केतु अपने खुद के नक्षत्र मघा में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाते हुए द्वितीय पद में गोचर करेंगे। बता दें ये दो बड़ी ज्योतिषीय घटनाएं रविवार के दिन सुबह 12 बजकर 8 मिनट के आसपास घटने वाली हैं।
राहु-केतु गोचर से किन 3 राशियों को लाभ होगा?
राहु ग्रह का नक्षत्र गोचर और केतु का अपने ही नक्षत्र में पद परिवर्तन करना ज्योतिष गणना के अनुसार मेष राशि के साथ-साथ कन्या राशि और कुंभ राशि वालों के लिए अच्छा रहेगा।
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़ें: ग्रहों के राजा करेंगे गोचर, बनेगी सूर्य-चंद्र की युति, इन 3 राशियों को होगा महालाभ
राहु-केतु गोचर का राशियों पर प्रभाव
- मेष राशि
- कन्या राशि
- कुंभ राशि
राहु-केतु गोचर के दौरान करने वाले उपाय
शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नियमित रूप से दान करें। गोचर के दौरान आप तिल, दाल, कपड़े, तेल और बर्तनों का दान कर सकते हैं। इसके अलावा बेजुबान जानवरों की सेवा करें। खासकर, पक्षियों को दाना डालने और चींटियों को मीठी चीज खिलाने से आपको लाभ हो सकता है। इसके अलावा राहु-केतु ग्रह के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए आप मंत्र उच्चारण भी कर सकते हैं।
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़ें: शुक्र गोचर से इन 3 राशि वालों के करियर और रिश्तों में आएगा सुधार
डिस्क्लेमर: यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।
