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Monsoon Health Tips: बारिश के मौसम में गर्भवती महिलाएं UTI से कैसे बचें? जानें एक्सपर्ट के बताए टिप्स

Monsoon Health Tips: मानसून में गर्भवती महिलाओं में UTI का खतरा बढ़ जाता है। इस लेख में एक्सपर्ट से जानिए पब्लिक टॉयलेट इस्तेमाल करते समय बरती जाने वाली जरूरी सावधानियां और खानपान से जुड़ी सलाह।

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मानसून के लिए हेल्थ टिप्स

Monsoon Health Tips: मानसून का मौसम जितना सुहाना लगता है, गर्भवती महिलाओं के लिए उतना ही परेशानी भरा भी हो सकता है। बारिश के दौरान बढ़ी हुई नमी, कम पानी पीने की आदत और प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में होने वाले बदलाव मिलकर यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI During Pregnancy) का खतरा बढ़ा देते हैं। यदि समय पर इसका इलाज न हो तो यह इंफेक्शन किडनी तक पहुंच सकता है और कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम का कारण बन सकता है। इसमें समय से पहले प्रसव (Preterm Birth) जैसी जटिलताओं का जोखिम भी शामिल है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि आखिर मानसून में UTI का खतरा क्यों बढ़ता है और इससे बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। इसके लिए हमने बात की प्रसूति और स्त्री रोग विशेषज्ञ, डॉ. सृष्टि साल्वटकर से...

मानसून और प्रेगनेंसी का 'डबल रिस्क' क्या है

प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सृष्टि साल्वटकर के अनुसार, गर्भावस्था में बढ़ता हुआ यूटेरस (गर्भाशय) ब्लैडर और यूरिन नलिकाओं पर दबाव डालता है। इसकी वजह से कई बार पेशाब पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाता, जिसे मेडिकल भाषा में Urinary Stasis कहा जाता है। जब यूरिन लंबे समय तक ब्लैडर में ठहरता है, तो बैक्टीरिया को बढ़ने का मौका मिलता है।

मानसून में वातावरण की अधिक नमी, पसीना और निजी अंगों के आसपास लंबे समय तक बनी रहने वाली सीलन बैक्टीरिया की वृद्धि के लिए अनुकूल माहौल तैयार करती है। यही कारण है कि इस मौसम में गर्भवती महिलाओं में UTI का खतरा सामान्य दिनों की तुलना में अधिक देखा जाता है।

मानसून में कौन सी गलतियां बढ़ाती हैं UTI का खतरा

1. सिंथेटिक कपड़े पहनना

बारिश के मौसम में सिंथेटिक फैब्रिक नमी को लंबे समय तक रोककर रखते हैं। इससे बैक्टीरिया और फंगस तेजी से बढ़ सकते हैं। विशेषज्ञ कॉटन के ढीले और सांस लेने वाले (Breathable) कपड़े पहनने की सलाह देते हैं।

2. कम पानी पीना

मानसून में अक्सर प्यास कम महसूस होती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि शरीर को पानी की जरूरत कम हो गई है। गर्भवती महिलाओं को दिनभर में लगभग 2.5 से 3 लीटर तरल पदार्थ (डॉक्टर की सलाह और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार) लेना चाहिए ताकि बैक्टीरिया पेशाब के जरिए बाहर निकलते रहें।

3. इंटिमेट हाइजीन न रखना

सिर्फ सफाई करना ही काफी नहीं है। टॉयलेट के बाद हमेशा Front-to-Back यानी आगे से पीछे की ओर साफ करें। इससे आंतों के बैक्टीरिया यूरिनरी ट्रैक्ट तक पहुंचने का खतरा कम होता है।

मानसून में कौन सी गलतियां बढ़ाती हैं UTI का खतरा

मानसून में कौन सी गलतियां बढ़ाती हैं UTI का खतरा

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प्रोबायोटिक्स भी सेहत के लिए हैं जरूरी

विशेषज्ञों के मुताबिक, दही, छाछ और अन्य प्रोबायोटिक खाद्य पदार्थ शरीर के अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देते हैं। ये आंत (Gut Microbiome) और वैजाइनल माइक्रोबायोम के संतुलन को बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। स्वस्थ माइक्रोबायोम हानिकारक बैक्टीरिया की संख्या बढ़ने से रोकने में सहायक होता है। हालांकि, प्रोबायोटिक्स UTI का इलाज नहीं हैं, लेकिन संतुलित आहार का हिस्सा बनकर संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं।

क्या प्रेगनेंसी में क्रैनबेरी जूस पीना चाहिए

UTI की बात आते ही अक्सर क्रैनबेरी जूस का नाम लिया जाता है। रिसर्च बताती है कि क्रैनबेरी में मौजूद कुछ तत्व बैक्टीरिया को ब्लैडर की दीवार से चिपकने से रोकने में मदद कर सकते हैं, लेकिन गर्भावस्था में इसके फायदे के प्रमाण सीमित हैं। इसलिए इसे UTI के इलाज का विकल्प नहीं माना जाता। यदि कोई गर्भवती महिला क्रैनबेरी जूस लेना चाहती है, तो पहले अपने गायनेकोलॉजिस्ट से सलाह जरूर लें, क्योंकि बाजार में मिलने वाले कई जूस में शुगर की मात्रा काफी अधिक होती है।

पब्लिक टॉयलेट यूज करने के सेफ्टी गाइड

स्थिति/आदतक्या करें (Safety Tip)क्यों जरूरी है?
टॉयलेट सीट का इस्तेमालअपने बैग में टॉयलेट सीट सैनिटाइजर स्प्रे या डिसइन्फेक्टेंट वाइप रखें और जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल करें।सतह पर मौजूद कीटाणुओं के संपर्क का जोखिम कम करने में मदद मिलती है।
हाथों की सफाईटॉयलेट इस्तेमाल करने के बाद साबुन और पानी से कम से कम 20 सेकंड तक हाथ धोएं या हैंड सैनिटाइजर का उपयोग करें।संक्रमण फैलाने वाले बैक्टीरिया और वायरस से बचाव होता है।
फ्लश करने का सही तरीकायदि ढक्कन (Lid) उपलब्ध हो तो फ्लश करने से पहले उसे बंद करें।फ्लश के दौरान पानी की महीन बूंदों (Toilet Plume) के फैलने का जोखिम कम हो सकता है।
पेशाब न रोकेंलंबे समय तक यूरिन रोककर न रखें, जरूरत महसूस होते ही टॉयलेट जाएं।ब्लैडर में बैक्टीरिया के पनपने का खतरा कम होता है और UTI का जोखिम घट सकता है।

कैसे पहचानें प्रेगनेंसी में UTI के संकेत

  • बार-बार पेशाब आना पेशाब में जलन या दर्द तेज बुखार
  • ब्लैडर पर बच्चे का दबाव पेशाब से तेज दुर्गंध कमर या पीठ में तेज दर्द
  • हल्की असहजता धुंधला या खून मिला पेशाब उल्टी या तेज कंपकंपी

मानसून में UTI का खतरा सिर्फ मौसम की वजह से नहीं, बल्कि प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में होने वाले प्राकृतिक बदलावों की वजह से भी बढ़ जाता है। अच्छी इंटिमेट हाइजीन, पर्याप्त पानी और तरल पदार्थ, कॉटन के कपड़े, प्रोबायोटिक युक्त संतुलित आहार और समय पर डॉक्टर से सलाह—ये सभी कदम मां और शिशु दोनों को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि संक्रमण के शुरुआती संकेत भी दिखाई दें तो उन्हें सामान्य मानकर टालने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना सबसे सुरक्षित विकल्प है।

gulshan kumar
गुलशन कुमार author

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लो... और देखें

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