8वां वेतन आयोग: 65% तक बढ़ सकती है लेवल 1 कर्मचारियों की सैलरी, जानिए आखिर कैसे?

8th Pay Commission Salary Hike : केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजर अब 8वें वेतन आयोग पर टिकी हुई है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि मौजूदा महंगाई और बढ़ते खर्चों को देखते हुए सैलरी स्ट्रक्चर में बड़े बदलाव की जरुरत है। खासतौर पर निचले स्तर के कर्मचारियों का मानना है कि मौजूदा सैलरी में बड़े शहरों में गुजारा करना मुश्किल हो गया है। इसलिए वे बेसिक सैलरी, हाउस रेंट अलाउंस (HRA), ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TPTA) और फैमिली यूनिट बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

Authored by: रामानुज सिंहUpdated Jul 3 2026, 14:50 IST
​अभी कितनी मिलती है सैलरी और भत्ते?​Image Credit : Istock01 / 07

​अभी कितनी मिलती है सैलरी और भत्ते?​

फिलहाल लेवल-1 के एक एंट्री लेवल कर्मचारी की बेसिक सैलरी 18,000 रुपये है। अगर वह दिल्ली जैसे X कैटेगरी शहर में काम करता है तो उसे 30% HRA यानी 5,400 रुपये मिलते हैं। इसके अलावा ट्रांसपोर्ट अलाउंस करीब 2,800 रुपये मिलता है, जिसमें महंगाई भत्ते (DA) का हिस्सा भी शामिल है। कुल मिलाकर उसकी ग्रॉस सैलरी करीब 37,080 रुपये बनती है।

​कर्मचारी संगठन क्या मांग कर रहे हैं?​Image Credit : Istock02 / 07

​कर्मचारी संगठन क्या मांग कर रहे हैं?​

ऑल इंडिया NPS एम्प्लॉइज फेडरेशन (AINPSEF) समेत कई बड़े संगठन चाहते हैं कि HRA की दरें बढ़ाई जाएं। उनकी मांग है कि X शहरों में HRA 36%, Y शहरों में 24% और Z शहरों में 12% हो। वहीं ट्रांसपोर्ट अलाउंस कम से कम 9,000 रुपये होना चाहिए। उनका कहना है कि दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों में किराया और यात्रा खर्च बहुत ज्यादा है, इसलिए मौजूदा भत्ते काफी नहीं हैं।

​फैमिली यूनिट बढ़ाने की मांग क्यों?​Image Credit : Istock03 / 07

​फैमिली यूनिट बढ़ाने की मांग क्यों?​

7वें वेतन आयोग में परिवार की खपत यूनिट 3.0 मानी गई थी। इसमें कर्मचारी, उसका जीवनसाथी और दो बच्चों को शामिल किया गया था। लेकिन कर्मचारी संगठन अब इसे 4.4 या 5 यूनिट तक बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। इसमें माता-पिता को भी शामिल किया जाएगा। उनका कहना है कि आज के समय में परिवार का खर्च पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा बढ़ चुका है।

​फैमिली यूनिट बढ़ने से फिटमेंट फैक्टर पर असर​Image Credit : Istock04 / 07

​फैमिली यूनिट बढ़ने से फिटमेंट फैक्टर पर असर​

अगर फैमिली यूनिट 3.0 से बढ़कर 4.4 हो जाती है, तो यह करीब 46.66% की बढ़ोतरी होगी। इससे फिटमेंट फैक्टर भी बढ़ सकता है। अभी मौजूदा गणना के हिसाब से फिटमेंट फैक्टर 1.58 है। अगर नई फैमिली यूनिट को जोड़ा जाए तो यह 2.05 तक पहुंच सकता है। सरकार इसे राउंड फिगर में 2.10 कर सकती है। इसका सीधा फायदा बेसिक सैलरी में दिखेगा।

​नई सैलरी का गणित कैसे बनेगा?​Image Credit : Istock05 / 07

​नई सैलरी का गणित कैसे बनेगा?​

अगर 2.1 फिटमेंट फैक्टर लागू होता है तो 18,000 रुपये की बेसिक सैलरी बढ़कर 37,800 रुपये हो जाएगी। इसके बाद 2% DA जोड़ने पर 756 रुपये मिलेंगे। अगर HRA 36% कर दिया जाता है तो यह 13,608 रुपये होगा। वहीं ट्रांसपोर्ट अलाउंस 9,000 रुपये तय होने पर DA जोड़कर यह 9,180 रुपये तक पहुंच सकता है। इस तरह कुल ग्रॉस सैलरी 61,344 रुपये हो जाएगी।

​65% तक बढ़ सकती है कुल सैलरी​Image Credit : Istock06 / 07

​65% तक बढ़ सकती है कुल सैलरी​

मौजूदा ग्रॉस सैलरी 37,080 रुपये है, जबकि प्रस्तावित बदलावों के बाद यह 61,344 रुपये तक जा सकती है। यानी कुल मिलाकर करीब 65% की बढ़ोतरी संभव है। यह बढ़ोतरी खासतौर पर निचले स्तर के कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है, क्योंकि उनकी आय में सीधा और बड़ा इजाफा होगा।

​सरकार के फैसले पर टिकी सबकी नजर​Image Credit : Istock07 / 07

​सरकार के फैसले पर टिकी सबकी नजर​

हालांकि अभी ये सिर्फ कर्मचारी संगठनों की मांगें हैं और अंतिम फैसला सरकार को लेना है। अगर सरकार इन सिफारिशों को मान लेती है, तो लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है। 8वें वेतन आयोग से जुड़े फैसलों का असर आने वाले समय में सरकारी कर्मचारियों की जिंदगी और उनके खर्चों पर सीधा पड़ेगा।

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