Habits That Damage Your Gut: अक्सर लोग सोचते हैं कि उम्र बढ़ने पर ही पाचन कमजोर होता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि आजकल कई लोगों का डाइजेशन समय से पहले ही कमजोर होने लगा है। इसका सबसे बड़ा कारण हमारी बदलती लाइफस्टाइल और खानपान है। पेट के अंदर मौजूद लाखों-करोड़ों अच्छे बैक्टीरिया, जिन्हें माइक्रोबायोम कहा जाता है, पाचन, इम्यूनिटी और मेटाबॉलिज्म को संभालते हैं। लेकिन जब रोजमर्रा की आदतें बिगड़ जाती हैं तो यह संतुलन टूटने लगता है। इसका असर सूजन, गैस, कमजोर पाचन और कई बीमारियों के खतरे के रूप में दिख सकता है। अच्छी बात यह है कि थोड़े से बदलाव करके गट हेल्थ को फिर से बेहतर बनाया जा सकता है।
प्रोसेस्ड और कम फाइबर वाला खाना
आजकल लोगों की डाइट में पैकेज्ड और प्रोसेस्ड फूड काफी बढ़ गया है। ऐसे खाने में फाइबर कम और प्रिजर्वेटिव ज्यादा होते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह गट की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचा सकते हैं और अच्छे बैक्टीरिया की संख्या घटा देते हैं। जब माइक्रोबायोम का संतुलन बिगड़ता है तो पाचन कमजोर होने लगता है और धीरे-धीरे गट की उम्र बढ़ने लगती है।
जरूरत से ज्यादा दवाइयां लेना
कई लोग छोटी-छोटी समस्याओं में भी एंटीबायोटिक या दर्द की दवाइयां ले लेते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसी दवाइयों का बार-बार इस्तेमाल गट के अच्छे बैक्टीरिया को खत्म कर सकता है। इससे माइक्रोबायोम का संतुलन बिगड़ता है और पाचन से जुड़ी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेना गट हेल्थ के लिए सही नहीं माना जाता।
तनाव और खराब नींद भी डाइजेशन पर डालते हैं असर
लंबे समय तक रहने वाला तनाव और कम नींद भी गट हेल्थ को नुकसान पहुंचाते हैं। जब शरीर लगातार तनाव में रहता है तो हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिससे पाचन प्रक्रिया धीमी पड़ सकती है। इसके कारण गैस, एसिडिटी और पेट फूलने जैसी परेशानियां बढ़ सकती हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार अच्छी नींद और तनाव कम करना गट हेल्थ सुधारने के लिए जरूरी है।
कम एक्टिव लाइफस्टाइल भी बनती है वजह
दिनभर बैठकर काम करना या शारीरिक गतिविधि कम होना भी गट के लिए ठीक नहीं है। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि नियमित शारीरिक गतिविधि गट माइक्रोबायोम की विविधता को बेहतर बनाती है और पाचन को सक्रिय रखती है। वहीं लंबे समय तक बैठने की आदत डाइजेशन को धीमा कर सकती है और गट हेल्थ पर असर डाल सकती है।
कैसे फिर से बेहतर हो सकती है गट हेल्थ
अच्छी बात यह है कि गट काफी लचीला होता है और सही आदतों से जल्दी सुधर भी सकता है। रोज की डाइट में फाइबर से भरपूर खाना, दही या अन्य फर्मेंटेड फूड शामिल करना, नियमित एक्सरसाइज करना और अच्छी नींद लेना माइक्रोबायोम को संतुलित रखने में मदद करता है। जब ये छोटी-छोटी आदतें रोज अपनाई जाती हैं तो डाइजेशन बेहतर होता है और शरीर भी लंबे समय तक स्वस्थ रह सकता है।
डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
