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काम खत्म फिर भी दिमाग अशांत, थेरेपिस्ट जेफ्री मेल्तजर से जानें खाली समय में भी चैन ना मिल पाने की असली वजह

मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट और थेरेपिस्ट जेफ्री मेल्तजर के अनुसार, छुट्टी या खाली समय मिलने पर शांत न बैठ पाने की इस स्थिति को रिलैक्सेशन एंग्जायटी कहा जाता है।

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थेरेपिस्ट से जानें खाली समय में रिलेक्स न कर पाने की असली वजह (Photo: iStock)

जब हम किसी काम में बहुत व्यस्त होते हैं तो सोचते हैं कि जब ये निपट जाएगा तो चैन से आराम करूंगा। ये ठीक उसी तरह से है जैसे हम पूरे पांच दिन काम करने के बाद वीकेंड्स का इंतजार बेसब्री से करते हैं। समस्या तब होती है जब फुर्सत मिलने के बाद भी हमें चैन नहीं मिल पाता है। अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो जान लीजिए कि आप अकेले नहीं हैं।

मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट और थेरेपिस्ट जेफ्री मेल्तजर के अनुसार, छुट्टी या खाली समय मिलने पर शांत न बैठ पाने की इस स्थिति को रिलैक्सेशन एंग्जायटी कहा जाता है। जेफ्री मेल्तज ने विस्तार से बताया है कि ऐसा क्यों होता है और इससे निपटने के क्या उपाय हैं:

खाली समय में क्यों बढ़ती है बेचैनी?

हसल कल्चर और प्रोडक्टिविटी का दबाव: आज के दौर में हमारी पहचान इस बात से तय होने लगी है कि हम कितने व्यस्त हैं। जब हम खाली बैठते हैं, तो हमारा सब कॉन्शियस माइंड हमें यह एहसास कराने लगता है कि हम अपना समय बर्बाद कर रहे हैं या किसी से पीछे छूट रहे हैं।

फ्लाइट मोड में अटका दिमाग: पूरे हफ्ते लगातार डेडलाइन्स और तनाव में काम करने के कारण हमारा नर्वस सिस्टम हमेशा अलर्ट मोड पर रहता है। जब अचानक काम रुकता है, तो दिमाग उस शांति को समझ नहीं पाता और उसे एक अनजाने खतरे की तरह देखने लगता है।

खुद से भागने की आदत: व्यस्तता कई बार हमें अपनी दबी हुई भावनाओं, अनसुलझी चिंताओं या जीवन के तनावों से भटकाए रखती है। जैसे ही काम का शोर बंद होता है, ये भावनाएं सतह पर आ जाती हैं, जिससे हम अनकम्फर्टेबल महसूस करने लगते हैं।

रिलैक्स होना सीखने के 4 असरदार तरीके

थेरेपिस्ट जेफ्री मेल्तजर का मानना है कि काम की तरह आराम करना भी एक हुनर है, जिसे अभ्यास से सीखा जा सकता है:

कुछ न करने का अपराधबोध छोड़ें

यह स्वीकार करें कि आराम करना कोई अपराध या आलस नहीं है, बल्कि शरीर और दिमाग की बुनियादी जरूरत है। जिस तरह फोन को चार्ज किए बिना इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, उसी तरह बेहतर काम करने के लिए रिचार्ज होना जरूरी है।

अचानक नहीं, धीरे-धीरे ब्रेक लें

यदि आपका दिमाग लगातार काम करने का आदी है, तो अचानक पूरे दिन खाली बैठना मुश्किल हो सकता है। काम के घंटों से ब्रेक के मोड में जाने के लिए ट्रांजिशन टाइम बनाएं।

स्ट्रक्चर्ड रिलैक्सेशन

अगर खाली बैठना आपको एंक्सियस करता है, तो आराम को भी एक एक्टिविटी की तरह प्लान करें। इससे दिमाग को एक दिशा मिलती है और वह भटकता नहीं है।

डिजिटल डिटॉक्स अपनाएं

छुट्टी के दिन ऑफिस के ईमेल्स और सोशल मीडिया से दूरी बनाएं। स्क्रीन पर दूसरों की परफेक्ट लाइफ देखने से तुलनात्मक तनाव पैदा होता है, जो आपकी छुट्टी का मजा खराब कर देता है।

तमाम मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि आराम का मतलब बिस्तर पर लेटे रहने के साथ ही मन का शांत और तनावमुक्त होना भी है। अगली बार जब छुट्टी के दिन आपको बेचैनी महसूस हो, तो खुद पर दबाव न डालें। खुद को थोड़ा समय दें और याद रखें कि आपका मूल्य केवल आपकी प्रोडक्टिविटी से तय नहीं होता।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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