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World Breastfeeding Week: दूध बन रहा है कम और बच्चे का नहीं भर रहा पेट? आज ही सुधार लें ये 5 गलतियां

World Breastfeeding Week: क्या आपको लगता है कि बच्चे का पेट मां के दूध से नहीं भर रहा है? इसकी वजह हमेशा दूध की कमी नहीं होती है। इसके लिए 5 आम गलतियां हो सकती हैं।

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विश्व स्तनपान सप्ताह

World Breastfeeding Week: हर साल 1 से 7 अगस्त तक मनाया जाने वाला World Breastfeeding Week माताओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने का अवसर है। कई नई मदर्स की सबसे बड़ी चिंता होती है कि उनका दूध पर्याप्त बन रहा है या नहीं। जब बच्चा बार-बार रोता है या बार-बार दूध मांगता है तो अक्सर यह मान लिया जाता है कि दूध कम बन रहा है। हालांकि, कई बार इसकी वजह दूध की कमी नहीं बल्कि स्तनपान से जुड़ी कुछ सामान्य गलतियां होती हैं। अच्छी बात यह है कि इन गलतियों (Breastfeeding Mistakes) में सुधार करके अधिकांश मामलों में ब्रेस्ट मिल्क की सप्लाई बेहतर की जा सकती है।

1. जरूरत के अनुसार दूध पिलाएं

कई माताएं हर 3-4 घंटे का इंतजार करती हैं, जबकि नवजात शिशु को उसकी मांग (On-demand Feeding) के अनुसार दूध पिलाना चाहिए। जितनी बार बच्चा स्तनपान करेगा, शरीर को उतना ही अधिक दूध बनाने का संकेत मिलेगा। शुरुआती महीनों में 24 घंटे में 8 से 12 बार स्तनपान सामान्य माना जाता है।

2. गलत लैचिंग न करें

यदि बच्चा स्तन को सही तरीके से नहीं पकड़ रहा है तो वह पर्याप्त दूध नहीं पी पाता और स्तन भी पूरी तरह खाली नहीं हो पाता। इससे शरीर को दूध बनाने का पर्याप्त संकेत नहीं मिलता है। सही लैचिंग में बच्चे का मुंह केवल निप्पल नहीं बल्कि उसके आसपास का गहरा हिस्सा (एरिओला) भी ढकता है।

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3. बार-बार फॉर्मूला दूध न दें

जब बिना चिकित्सकीय सलाह के बार-बार फॉर्मूला दूध दिया जाता है तो बच्चा कम स्तनपान करता है। इससे स्तनों की उत्तेजना घटती है और धीरे-धीरे दूध का उत्पादन भी कम हो सकता है। इसलिए किसी डॉक्टर की सलाह या किसी खास कारण से फॉर्मूला दूध की जरूरत न हो, तो पहले स्तनपान को प्राथमिकता देना बेहतर माना जाता है।

4. डाइट का ध्यान रखना

स्तनपान कराने वाली मां को संतुलित आहार, पर्याप्त प्रोटीन, हरी सब्जियां, दालें, फल और पर्याप्त पानी की जरूरत होती है। इन दिनों में अत्यधिक डाइटिंग, भोजन छोड़ना या शरीर में पानी की कमी दूध बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। पर्याप्त आराम और अच्छी नींद भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

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5. तनाव और थकान को इग्नोर न करें

मानसिक तनाव, चिंता और लगातार थकान से दूध निकालने वाले हार्मोन (लेट-डाउन रिफ्लेक्स) पर असर पड़ सकता है। परिवार का सहयोग, पर्याप्त आराम, हल्की वॉक, गहरी सांस लेने जैसी तकनीकें और सकारात्मक माहौल स्तनपान को आसान बना सकते हैं।

कैसे पहचानें कि बच्चे को पर्याप्त दूध मिल रहा है?

एक्सपर्ट्स की मानें तो बच्चे का हर बार रोना भूख का संकेत नहीं होता है। यदि बच्चा दिन में कई बार पेशाब कर रहा है, उसका वजन उम्र के अनुसार बढ़ रहा है, स्तनपान के बाद वह शांत दिखाई देता है और डॉक्टर उसकी वृद्धि को सामान्य बता रहे हैं, तो आमतौर पर यह पर्याप्त दूध मिलने का संकेत होता है।

कब डॉक्टर या लैक्टेशन एक्सपर्ट से मिलें?

यदि बच्चे का वजन नहीं बढ़ रहा है, पेशाब कम हो रहा है, वह बहुत सुस्त रहता है या स्तनपान के दौरान मां को लगातार दर्द होता है, तो तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ या लैक्टेशन काउंसलर से सलाह लेनी चाहिए। समय पर सही मार्गदर्शन मिलने से अधिकांश स्तनपान संबंधी समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।

नवजात बच्चे की सेहत से जुड़ी सलाह

मां का दूध शिशु के लिए संपूर्ण पोषण का सबसे अच्छा स्रोत माना जाता है। अधिकांश मामलों में दूध की कमी किसी गंभीर बीमारी से नहीं बल्कि गलत स्तनपान तकनीक, अनियमित फीडिंग, तनाव या खराब दिनचर्या से जुड़ी होती है। World Breastfeeding Week हमें याद दिलाता है कि सही जानकारी, परिवार का सहयोग और विशेषज्ञ की सलाह से मां और बच्चे दोनों के लिए स्तनपान का सफर अधिक सुरक्षित, सहज और सफल बनाया जा सकता है।

gulshan kumar
गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

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