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अगर बच्चा खिलौनों से करता है बातें तो घबराएं नहीं, दिमागी विकास का हिस्सा है, जानिए क्या है कनेक्शन

Why toddlers Attached With Toys: छोटे बच्चे अक्सर किसी खास खिलौने या वस्तु से गहरा लगाव बना लेते हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है? बता दें कि बच्चों के इस व्यवहार के पीछे छिपे कुछ मनोवैज्ञानिक कारण हैं। खिलौने उनके भावनात्मक और मानसिक विकास में अहम भूमिका निभाते हैं। चलिए जानते हैं कैसे यह आदत बच्चों के विकास से जुड़ी है...

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बच्चों के विकास और खिलौनों से खलने का कनेक्शन

Why toddlers Attached With Toys: बच्चों की मासूमियत हर किसी का दिल जीत लेती है। छोटे बच्चों की शरारतें देखकर हम अक्सर अपने बचपन की यादों में खो जाते हैं। लेकिन कई माता-पिता एक बात देखकर हैरान भी हो जाते हैं - उनका बच्चा किसी खास खिलौने या वस्तु के बिना कहीं जाने से मना कर देता है। वह उस खिलौने से कई बार बातें करता है और हमेशा उसे अपने साथ रखना चाहता है। ऐसे में पेरेंट्स के मन में सवाल उठता है कि आखिर बच्चे ऐसा क्यों करते हैं और बेजान चीजों से इतना लगाव क्यों हो जाता है। आइए जानते हैं इसके पीछे की असली वजह।

बच्चे के लिए खास बन जाता है खिलौना

कई माता-पिता देखते हैं कि उनका बच्चा किसी एक खास खिलौने के बिना कहीं जाना नहीं चाहता। जो चीज़ हमें साधारण लगती है, वही धीरे-धीरे बच्चे के लिए भावनात्मक सहारा बन जाती है। यह खिलौना बच्चे को सुरक्षा और अपनापन महसूस कराता है, इसलिए वह उसे हमेशा अपने पास रखना चाहता है।

डर, थकान या उदासी में खिलौना देता है सुकून

अक्सर बच्चे अपने पसंदीदा खिलौने को तब कसकर पकड़ते हैं, जब वे थके हुए हों, डर महसूस कर रहे हों या उदास हों। ऐसे समय में खिलौना उन्हें मानसिक शांति, सुरक्षा और आराम का एहसास देता है। खिलौने के साथ खेलते समय उन्हें यह भी महसूस होता है कि यहां उन्हें कोई टोकने वाला नहीं है, इसलिए वे बिना झिझक उससे बात भी करते हैं।

खिलौनों से बात करके सीखते हैं सोशल बिहेवियर

बहुत से बच्चे अपने खिलौनों से बात करते हुए नजर आते हैं। वे कभी खिलौने को डांटते हैं, कभी उससे सवाल पूछते हैं और कभी उसे प्यार से समझाते हैं। दरअसल, ऐसा करके बच्चे सामाजिक व्यवहार सीखते हैं। इससे उन्हें दया, गुस्सा, प्यार और सहानुभूति जैसी भावनाओं को समझने और व्यक्त करने में मदद मिलती है।

खेल के जरिए समझते हैं दिनभर की घटनाएं

टॉडलर अक्सर दिनभर हुई घटनाओं को खेल के जरिए दोहराते हैं। अगर बच्चा खिलौनों के साथ खाना खिलाने, सुलाने या बाहर ले जाने जैसा खेल खेलता है, तो इसका मतलब है कि वह अपने दिनभर के अनुभवों को समझने की कोशिश कर रहा है। यह प्रक्रिया बच्चों को नई परिस्थितियों को समझने और अपने विचारों को व्यवस्थित करने में मदद करती है।

माता-पिता को क्या करना चाहिए

अगर बच्चे का किसी खिलौने से ज्यादा लगाव है, तो इसे रोकने की बजाय समझने की जरूरत है। ऐसे कम्फर्ट ऑब्जेक्ट्स बच्चों को सुरक्षा का एहसास देते हैं और उन्हें अपनी भावनाओं को संभालना सीखने में मदद करते हैं। इस समय माता-पिता को धैर्य रखना चाहिए और बच्चे को प्यार व समझदारी के साथ सपोर्ट करना चाहिए।

बच्चों का यह लगाव बिल्कुल सामान्य है

बच्चों का किसी खिलौने या वस्तु से लगाव पूरी तरह सामान्य बात है। यह उनके मानसिक और भावनात्मक विकास का एक अहम हिस्सा होता है। इससे बच्चों को सुरक्षा, आराम और आत्मविश्वास मिलता है। माता-पिता को इसे एक सकारात्मक अनुभव के रूप में देखना चाहिए और बच्चे के विकास का स्वाभाविक चरण समझना चाहिए।

यह लेख मूल रूप से गौरंगी (Gaurangi) द्वारा लिखा गया है, वह टाइम्स नाउ नवभारत के साथ बतौर इंटर्न जुड़ी हुई हैं।

डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।

Vineet
विनीतauthor

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विषयों पर गहरी समझ है। इन्होंने हेल्थ, फिटनेस, न्यूट्रिशन और सप्लीमेंट के फील्ड में प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी किए हैं। वे 6 साल से इस फील्ड से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 7,000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। विनीत की खासियत उनकी रिसर्च-बेस्ड लेखन शैली और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिखी गई जानकारीपूर्ण स्टोरीज हैं।

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