कई बार होता है कि हम घर से निकले, कुछ दूर चले और फिर अचानक याद आया कि मोबाइल तो घर पर ही रह गया। ऑफिस पहुंचे तो पता चला कि लैपटॉप का चार्जर भूल आए हैं। किसी दोस्त का जन्मदिन याद था, लेकिन शुभकामनाएं देना भूल गए। किसी का नाम जुबान पर आकर भी याद नहीं आया। अगर आपके साथ भी ऐसा अक्सर होता है, तो जरूरी नहीं कि आपकी याददाश्त कमजोर हो रही हो।
क्या कहता है भूलने का मनोविज्ञान
मनोविज्ञान कहता है कि कई बार भूलने की वजह हमारी याददाश्त नहीं, हमारा ध्यान या अटेंशन होता है। होता ये है कि इंसानी दिमाग कैमरे की तरह हर चीज रिकॉर्ड नहीं करता। वह पहले तय करता है कि कौन सी जानकारी जरूरी है। उसी के बाद उसे अपनी मेमोरी में सेव करता है। अगर जानकारी ठीक से दर्ज ही नहीं हुई, तो बाद में उसे याद करना भी मुश्किल होगा। यही वजह है कि बहुत से लोग चाबी हाथ में लेकर पूरे घर में चाबी ढूंढ़ते रहते हैं।
मनोवैज्ञानिक इसे एबसेंट माइंडेडनेस कहते हैं। यानी काम करते समय दिमाग का पूरी तरह उस काम में मौजूद न होना। मशहूर मनोवैज्ञानिक डेनियल शैक्टर ने The Seven Sins of Memory में इसे याददाश्त की सबसे सामान्य कमजोरियों में गिना है। उनके अनुसार हम अक्सर इसलिए भूलते हैं क्योंकि उस पल हमारा ध्यान कहीं और था।
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मॉडर्न लाइफ में बढ़ी है समस्या
आधुनिक जीवन ने इस समस्या को और बढ़ा दिया है। आज एक ही समय में मोबाइल पर नोटिफिकेशन आ रहे हैं। लैपटॉप पर ईमेल खुली है। बैकग्राउंड में कोई वीडियो चल रहा है। दिमाग लगातार एक काम से दूसरे काम पर छलांग लगा रहा है। न्यूरोसाइंस बताता है कि इंसानी मस्तिष्क असली मायनों में मल्टीटास्किंग नहीं करता। वह बहुत तेजी से काम बदलता है। हर बदलाव के साथ ध्यान थोड़ा-थोड़ा बंटता है। यही बंटा हुआ ध्यान बाद में भूलने का कारण बनता है।
क्या बहुत खराब है भूलना
कुछ लोगों का सवाल है कि क्या इस तरह से भूलना बुरा है? मनोविज्ञान कहता है कि हमेशा ऐसा नहीं होता है। हमारा दीमाग गैर जरूरी जानकारी को हटाता भी है। अगर ऐसा न हो, तो नई बातें सीखना मुश्किल हो जाएगा। यानी भूलना भी दिमाग की एक स्वाभाविक और उपयोगी प्रक्रिया है। समस्या तब होती है, जब रोजमर्रा के जरूरी काम लगातार प्रभावित होने लगें।
मनोवैज्ञानिक यह भी मानते हैं कि तनाव, नींद की कमी और लगातार मानसिक दबाव याददाश्त को सबसे पहले प्रभावित करते हैं। जब दिमाग तनाव से जूझ रहा होता है, तो नई जानकारी को व्यवस्थित तरीके से संग्रहित करना कठिन हो जाता है। यही कारण है कि परीक्षा के दिनों, नौकरी के दबाव या भावनात्मक तनाव के समय लोग सामान्य से अधिक चीजें भूलने लगते हैं।
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क्या बार-बार भूल जाना कोई बीमारी है?
जरूरी नहीं। अगर भूलने की आदत धीरे-धीरे बढ़ रही हो, बातचीत, रास्ते, परिचित लोगों या रोजमर्रा के कामों को प्रभावित करने लगे, तब एक्सपर्ट्स से सलाह लेना उचित होता है। वैसे अगर आप सिर्फ मोबाइल, चाबी या किसी छोटे काम को बार-बार भूल जाते हैं, तो इसकी वजह आपकी व्यस्त जीवनशैली और बंटा हुआ ध्यान होता है।
हो सकता है समस्या आपकी याददाश्त में नहीं, उस दुनिया में हो, जिसने आपके दिमाग को एक साथ बहुत सारी चीजों में उलझा रखा है। कई बार दिमाग भूलता नहीं है। उसे सिर्फ इतना समय ही नहीं मिलता कि वह किसी बात को ठीक से याद रख सके।
