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शादी में थोड़ा 'गुलाम' बनना भी है जरूरी- मनोविज्ञान से जानिए कितनी सही है राजीव खंडेलवाल की सलाह

मनाोविज्ञान कहता है कि अपने पार्टनर का गुलाम बनने का ये कतई मतलब नहीं होता कि आप पूरी तरह से अपने पार्टनर के कंट्रोल में हो। यहां गुलाम वो है जो रिश्ते की मजबूती के लिए स्वेच्छा से समझौता करे।

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राजीव खंडेलवाल क्यों मानते हैं कि प्यार में गुलाम बनना भी है जरूरी(Photo: Rajeev Khandelwal Insta)

Rajeev Khandelwal Relationhip Advice: हम अभी तक सुनते आए हैं कि जोरू का गुलाम होना गलत बात है। लेकिन एक्टर राजीव खंडेलवाल इससे बिल्कुल इत्तेफाक नहीं रखते। वह कहते हैं कि प्यार के रिश्तो में कई बार गुलाम बनना भी जरूरी होता है। वो कहते हैं कि कई बार प्यार को बनाए रखने के लिए अपने अहंकार को पीछे रखकर सोचना पड़ता है। इस अहंकार को पीछे करने को कोई गुलाम कहे तो कहता रहे।

मनाोविज्ञान भी कहता है कि अपने पार्टनर का गुलाम बनने का ये कतई मतलब नहीं होता कि आप पूरी तरह से अपने पार्टनर के कंट्रोल में हो। यहां गुलाम वो है जो रिश्ते की मजबूती के लिए स्वेच्छा से समझौता करे।

अमेरिकी मनोवैज्ञानिक डॉ. जॉन गॉटमैन, जिन्होंने दशकों तक वैवाहिक संबंधों पर शोध किया है, कहते हैं कि सफल रिश्तों में पार्टनर एकदूसरे के प्रभाव को स्वीकार करते हैं। वे हर बात पर अपनी ही बात मनवाने की कोशिश नहीं करते। जब दो लोग अपनी जिद छोड़कर एक-दूसरे की जरूरतों को समझते हैं, तभी रिश्ता मजबूत होता है।

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मनोविज्ञान कहता है कि दोनों लोग एक-दूसरे पर भरोसा करते हैं, एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करते हैं और कई बार अपनी सुविधा छोड़कर साथी के लिए जगह बनाते हैं। यही स्वस्थ रिश्ते की पहचान है।

हालांकि यहां एक बात समझना बहुत जरूरी है। प्यार में झुकना और भावनात्मक गुलामी दो अलग-अलग बातें हैं। अगर कोई व्यक्ति हमेशा अपनी इच्छाओं, सम्मान या आत्मसम्मान की कीमत पर रिश्ता निभा रहा है, तो यह स्वस्थ संबंध नहीं माना जाता। किसी भी रिश्ते में सम्मान, सहमति और बराबरी की भावना सबसे जरूरी होती है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि लंबे समय तक चलने वाले रिश्तों में दोनों साथी कभी न कभी एक-दूसरे के लिए अपनी पसंद छोड़ते हैं। कभी कोई अपनी छुट्टी की योजना बदलता है, तो कभी कोई अपने साथी के करियर के लिए दूसरे शहर जाने का फैसला करता है। यह हार नहीं, बल्कि रिश्ते में निवेश होता है।

इसलिए राजीव खंडेलवाल जिस गुलामी की बात कर रहे हैं वो गुलामी नहीं, समर्पण है। सफल शादी या प्रेम संबंध में दो लोग एक-दूसरे पर हुकूमत नहीं करते। वो समय-समय पर एक-दूसरे के लिए झुकना सीखते हैं।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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