Milk for Hubiscus plant: लोग घरों में कई तरह के फायदे के लिए गुड़हल का पौधा लगाते हैं। कोई पूजा में फूलों के लिए यह पौधा लगाते हैं तो कोई घर की सुंदरता बढ़ाने के लिए। बहुत से लोग गुड़हल के फूलों को चेहरे पर निखार लाने के लिए भी इस्तेमाल करते हैं। गुड़हल के पौधे की सबसे खास बात ये है कि ये साल के 12 महीने फूल देता है। बस जरूरत होती है इस पौधे के सही देखभाल की।
गुड़हल के पौधे को हरा-भरा रखने और उसमें ढेर सारे फूल के लिए लोग कई तरह के घरेलू उपाय अपनाते हैं। इन्हीं में से एक तरीका है पौधे में दूध डालना। आइए जानते हैं गुड़हल के पौधे में दूध डालने से क्या होता है:
गुड़हल के पौधे में दूध डालने से क्या होता है
गुड़हल के पौधे में दूध का उपयोग एक प्राकृतिक खाद और कीटनाशक के रूप में किया जाता है। गुड़हल के पौधे को अच्छी वृद्धि और फूलों के उत्पादन के लिए कैल्शियम की आवश्यकता होती है। दूध में मौजूद कैल्शियम मिट्टी की उर्वरता बढ़ाता है और पौधे की कोशिकाओं को मजबूती देता है। इसके साथ ही दूध और पानी का घोल एक बेहतरीन एंटी-फंगल स्प्रे का काम भी करता है। यह पौधे और फूल को किटाणुओं से सेफ रखता है।
गुड़हल में कैसे डालें दूध
कभी भी सीधे कच्चा या गाढ़ा दूध पौधे में न डालें। दूध और पानी का अनुपात 1:10 होना चाहिए.। इस घोल को आप या तो पौधे की जड़ों में डाल सकते हैं या स्प्रे बोतल की मदद से पत्तियों पर छिड़काव कर सकते हैं।
गुड़हल के पौधे में फूल लाने के लिए क्या करें
गुड़हल के पौधे में ज्यादा फूल पाने के लिए सही देखभाल जरूरी है। इसे रोज 4–6 घंटे धूप में रखें, क्योंकि धूप फूल आने के लिए सबसे अहम होती है। मिट्टी अच्छी जल निकासी वाली हो और समय-समय पर जैविक खाद डालते रहें। पौधे की नियमित छंटाई करें, इससे नई शाखाएं निकलती हैं और फूल बढ़ते हैं। जरूरत के अनुसार पानी दें, लेकिन ज्यादा पानी से बचें। महीने में एक बार पोटाश युक्त खाद देने से फूलों की संख्या और गुणवत्ता दोनों बेहतर होती है।
गुड़हल के पौधे में कौन सी खाद डालना चाहिए
सबसे बेहतर है गोबर की सड़ी हुई खाद या वर्मी कम्पोस्ट, जिसे महीने में 1–2 बार मिट्टी में मिलाएं। इसके अलावा, फूल बढ़ाने के लिए पोटाश बहुत जरूरी होता है। आप केले के छिलकों को सुखाकर पाउडर बनाकर मिट्टी में डाल सकते हैं, यह एक प्राकृतिक पोटाश का अच्छा स्रोत है। सरसों की खलीभी गुड़हल के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है। इसे पानी में भिगोकर 4–5 दिन बाद घोल बनाकर महीने में एक बार डालें।
