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असम की ‘पुएर चाय’ 12000 रुपये प्रति किलो के रिकॉर्ड दाम पर बिकी, आखिर क्या है Pu'er Tea और कैसे होती है तैयार?

Puer Tea Price: गुवाहाटी चाय नीलामी केंद्र में असम की स्पेशल ‘पुएर टी केक’ 12,000 रुपये प्रति किलो के रिकॉर्ड भाव पर बिकी। इस सफलता से स्थानीय चाय उद्योग को बढ़ावा और ‘फालाप’ चाय के लिए नए रास्ते खुलेंगे।

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गुवाहाटी नीलामी में चमकी असम की ‘पुएर टी’ (तस्वीर- istock/X)

Puer Tea Price : असम के चाय उद्योग के लिए एक बहुत ही गर्व की बात सामने आई है। गुवाहाटी चाय नीलामी केंद्र (GTAC) में राज्य की एक विशेष किस्म की चाय 'पुएर टी केक' (Pu-erh Tea Cake) पूरे 12,000 रुपये प्रति किलोग्राम की रिकॉर्ड कीमत पर बिकी है। इस नीलामी ने पूर्वोत्तर के चाय बाजार में एक नया उत्साह भर दिया है।

कैसे हुई इस खास चाय की बिक्री?

असम के गोलाघाट जिले में स्थित गौरीपुर टी इंडस्ट्री द्वारा इस खास 'पुएर टी केक' को तैयार किया गया था। शुक्रवार को हुई नीलामी में इसे बिक्री के लिए पेश किया गया, जहां इसका कुल 5 किलो का लॉट 12,000 रुपये प्रति किलो के भाव से बिका। इस ऐतिहासिक बिक्री को प्रसिद्ध चाय ब्रोकर फर्म जे. थॉमस (J. Thomas) के माध्यम से अंजाम दिया गया। इतनी ऊंची कीमत मिलने से निर्माता और चाय एक्सपर्ट्स दोनों ही काफी खुश हैं।

चाय उद्योग के लिए क्यों है यह गर्व का पल?

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक नॉर्थ ईस्टर्न टी एसोसिएशन (NETA) के सलाहकार बिद्यानंद बरकाकोटी ने इस सफलता पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि गौरीपुर टी इंडस्ट्री के मालिक अपराज सैकिया हमारे संगठन के सम्मानित सदस्य हैं। इतनी शानदार कीमत पर इस विशेष चाय का बिकना पूरे असम चाय उद्योग के लिए बेहद गर्व का पल है। उन्होंने अपराज सैकिया और उनकी पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि असम की स्पेशल चाय को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में मददगार साबित होगी।

आखिर क्या है 'पुएर' चाय और कैसे होती है तैयार?

'पुएर' (Pu-erh) मूल रूप से चीन के युन्नान प्रांत की एक पारंपरिक फर्मेंटेड (किण्वित) चाय है।

  • बनाने की खास प्रक्रिया:- इसे चाय के पौधे कैमेलिया साइनेंसिस की बड़ी पत्तियों (विशेष रूप से असामिका किस्म) से तैयार किया जाता है।
  • विशिष्ट रूप और स्वाद:- इस चाय को पत्तियों के रूप में बेचने के बजाय दबाकर गोल केक (टिक्की) या ईंट (Brick) का आकार दिया जाता है।
  • समय के साथ निखरता स्वाद:- इसे बनाने के बाद किण्वन (Fermentation) की लंबी प्रक्रिया से गुजारा जाता है। इसे जितना अधिक समय तक रखा जाता है, इसका स्वाद, रंग और सुगंध उतनी ही अधिक समृद्ध और अनोखी होती जाती है।

'फालाप' चाय के लिए भी खुलेंगे नए दरवाजे

बिद्यानंद बरकाकोटी ने एक और महत्वपूर्ण बात साझा की। उन्होंने बताया कि गुवाहाटी नीलामी केंद्र में 'पुएर' चाय की इस सफल बिक्री से असम की एक और पारंपरिक चाय 'फालाप' (Phalap) के लिए भी रास्ता साफ होगा। भविष्य में फालाप चाय को भी इस सार्वजनिक नीलामी मंच के जरिए बड़े पैमाने पर बेचा जा सकेगा।

क्या है 'फालाप' चाय की खासियत?

'फालाप' असम के तिनसुकिया और मरघेरिटा क्षेत्रों में रहने वाले सिंगफो (Singpho) समुदाय की बेहद पुरानी और पारंपरिक चाय है। इसे भी असामिका किस्म की बड़ी पत्तियों से खास देसी तरीके से तैयार किया जाता है। माना जाता है कि भारत में चाय की खोज से भी पहले सिंगफो जनजाति के लोग इस चाय का सेवन करते आ रहे हैं।

गुवाहाटी नीलामी में पुएर चाय को मिले इस शानदार रिस्पॉन्स से यह उम्मीद बढ़ गई है कि असम की अन्य पारंपरिक और दुर्लभ चाय किस्मों को भी अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सही पहचान और बेहतरीन कीमतें मिल सकेंगी।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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