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तो इस कारण पेरेंट्स को अपने दोस्तों से नहीं मिलाते कुछ बच्चे, एक्सपर्ट्स समझें कारण

कई रिसर्च बताते हैं कि बढ़ती उम्र में बच्चे अपनी व्यक्तिगत बातों और दोस्तों से जुड़ी गतिविधियों को पूरी तरह पेरेंट्स के साथ शेयर नहीं करना चाहते।

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जानिए कैसे जीतें बढ़ती उम्र के बच्चों का विश्वास (Photo: iStock)

बहुत से पेरेंट्स को इस बात की टेंशन होती है कि बच्चे बड़े होने लगते हैं तो अपने दोस्तों मिलवाने में हिचकिचाने लगते हैं। कई बार पूछने पर भी वह दोस्तों के बारे में ज्यादा बात नहीं करता। पेरेंट्स को लगता है कि बच्चा कुछ छुपा रहा है, उसकी संगति खराब हो गई है या वह किसी गलत काम में शामिल है। हालांकि बाल मनोविज्ञान के अनुसार, हर बार बच्चे का ऐसा करने के पीछे यही कारण नहीं होते। इसके और भी कई स्वाभाविक कारण होते हैं।

अपनी दुनिया बनाने की चाह

जैसे-जैसे बच्चे किशोरावस्था की ओर बढ़ते हैं, वे अपनी एक अलग पहचान गढ़ने लगते हैं। उनके लिए दोस्त उनकी आजाद दुनिया का हिस्सा होते हैं। शोध बताते हैं कि इस उम्र में बच्चे अपनी व्यक्तिगत बातों और दोस्तों से जुड़ी गतिविधियों को पूरी तरह पेरेंट्स के साथ शेयर नहीं करना चाहते। वे महसूस करते हैं कि यह उनका पर्सनल स्पेस है, जिस पर उनका अपना कंट्रोल होना चाहिए।

दो अलग-अलग दुनिया का आपस में टकराव

बच्चे अपने घर में माता-पिता के सामने जिस तरह का व्यवहार करते हैं, दोस्तों के बीच उनका अंदाज जुदा होता है। जब पेरेंट्स उनके दोस्तों से मिलते हैं, तो बच्चे को लगता है कि उसकी ये दो बिल्कुल अलग दुनिया आपस में टकरा रही हैं। इससे वे असहज महसूस करने लगते हैं।

लगातार पूछताछ का डर

बच्चे डरते हैं कि पेरेंट्स उनके दोस्तों को देखकर तुरंत कोई राय बना लेंगे। उन्हें यह भी डर रहता है कि एक बार दोस्तों से मिलने के बाद पेरेंट्स हर बार उनके बाहर जाने पर सवाल पूछना शुरू कर देंगे।

दोस्तों के सामने शर्मिंदगी की चिंता

किशोर उम्र में बच्चे अपने दोस्तों के सामने अपनी छवि को लेकर बहुत संवेदनशील होते हैं। उन्हें चिंता होती है कि कहीं माता-पिता उनके बचपन की कोई बात दोस्तों के सामने न छेड़ दें, कोई रोक-टोक न कर दें या कोई ऐसी बात न कह दें जिससे दोस्तों के बीच उनका नर्वस होना या मजाक बनना तय हो जाए।

माता-पिता क्या करें?

जासूस बनने या लगातार पूछताछ करने के बजाय बच्चों को और उनकी निजता को सपोर्ट दें। जब पेरेंट्स बच्चे पर भरोसा दिखाते हैं और उन्हें थोड़ी प्राइवेसी देते हैं, तो बच्चे खुद आकर अपने दोस्तों और जिंदगी के बारे में बातें शेयर करने लगते हैं।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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