What is Al Ayyala: हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अबू धाबी के दौरे पर थे। वहां के प्रेसिडेंशियल पैलेस कासल अल वतन में उनका बेहद शानदार तरीके से स्वागत हुआ। उनके स्वागत का वीडियो सोशल मीडिया में खूब वायरल हो रहा है। दरअसल उनके स्वागत में महिलाओं का एक ग्रुप अपने लंबे बालों को लहराते हुए नाच -गा रहा था। इस तरह के स्वागत से ट्रंप अभिभूत दिखे। जब उनका इस तरह से स्वागत हो रहा था तब वह इसकी तारीफ किये बगैर रह ना पाए। लेकिन लोग हैरान हैं कि आखिर स्वागत का ये कौन सा तरीका है।

अबू धाबी में डोनल्ड ट्रंप के स्वागत में अल अय्याला करती लड़कियां।
ऐसे जिज्ञासु लोगों के लिए बता दें कि इन महिलाओं का बालों को लहराते हुए नाचना संयुक्त अरब अमीरात का एक पारंपरिक सांस्कृतिक नृत्य का हिस्सा है। इस पारंपरिक नृत्य शैली को अल अय्याला (Al-Ayyala) कहते हैं। अल अय्याला पारंपरिक रूप से रूप से पुरुषों और लड़कों द्वारा किया जाता है, हालांकि अब इसमें महिलाओं और लड़कियों की भागीदारी भी बढ़ी है। आइए जानते हैं अल अय्याला से जुड़ी सारी जरूरी बातें:
अल अय्याला का इतिहास (History of Al Ayyala)
अल अय्याला की उत्पत्ति दुनिया के सबसे बड़े अरब प्रायद्वीप के बेदुइन कबीलों से मानी जाती है। ये कबीले रेगिस्तानी जीवनशैली और युद्ध की तैयारियों से गहराई से जुड़े थे। इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारियों और इतिहासकारों के मतों का निचोड़ निकालें तो पता चलता है कि अल अय्याला डांस की जड़ें प्राचीन अरबी परंपराओं में हैं, जो सामुदायिक एकता और युद्ध के दौरान कबीलों की ताकत को प्रदर्शित करने के लिए विकसित हुईं। देखा जाए तो अल अय्याला मूल रूप से युद्ध कौशल का प्रतीक है, जिसमें कबीले के योद्धा अपनी ताकत और एकजुटता का प्रदर्शन करते थे।

कबीलों से जुड़ा है अल अय्याला का इतिहास
7वीं शताब्दी में इस्लाम के उदय के साथ इस नृत्य शैली ने सांस्कृतिक और सामाजिक आयोजनों में अपनी जगह बनाई। वैसे इस्लाम के उदय के साथ ही इस नृत्य शैली में इस्लामिक प्रभाव देखने को मिला फिर भी इसकी मूल भावना बेदुइन संस्कृति से ही प्रेरित रही। 1971 में संयुक्त अरब अमीरात की स्थापना और ओमान की सल्तनत के आधुनिकीकरण हुआ तब अल अय्याला ने राष्ट्रीय पहचान के एक महत्वपूर्ण प्रतीक के रूप में अपनी जगह बना ली। आज यह वहां की संस्कृति का अहम हिस्सा है।

अरब की सांस्कृतिक पहचान है अल अय्याला
कैसे करते हैं अल अय्याला
यह एक तरह की ग्रुप एक्टिविटी है। इसमें दो कतार में नर्तक खड़े हो जाते हैं। उनके हाथ में पतली बांस की छड़ी होती है जो युद्ध के हथियारों का प्रतीक होती हैं। ये सारे नर्तक एक साथ एक स्थिर ताल पर इस तरह से चलते हैं जैसे किसी जंग में सैनिक संगठित होकर चलते हैं। इस पूरे प्रदर्शन के दौरान पारंपरिक वाद्य यंत्रों मधुर आवाज सुनाई देती है और गाना भी गाया जाता है।

अल अय्याला में बांस की छड़ी
इस नृत्य शैली का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है इसका संगीत। पारंपरिक वाद्य यंत्र जैसे दफ, रबाब और कभी-कभी नगाड़े का उपयोग किया जाता है। गाने के लिए उन कविताओं और छंदों को चुना जाता है जो अक्सर कबीले के इतिहास, वीरता और सामुदायिक मूल्यों की प्रशंसा करते हैं। इस नृत्य शैली में जो पुरुष शामिल होते हैं वह आमतौर पर पारंपरिक सफेद दिशदाशा (लंबा कुर्ता) और सिर पर रुमाल पहनते हैं।

कैसे करते हैं अल अय्याला
जैसा कि ट्रंप के स्वागत में हमने देखा अब इस अल अय्याला में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। वे अल अय्याला करते वक्त अपने बालों को लयबद्ध तरीके से झटकती हैं। यह अमीराती संस्कृति में स्वागत और आतिथ्य का प्रतीक है।
महिलाओं का बाल लहराना
तमाम मुस्लिम राष्ट्रों ने सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं के बाल लहराने को गैर इस्लामिक माना है। उनका मानना है कि इस्लाम में बाल ढंकने पर जोर दिया गया है। इसलिए बहुत से देशों में बालों को ढक कर रखने का कानून है। हालांकि यूएई में, दूसरे मुस्लिम देशों के विपरीत, महिलाओं के लिए अपने बाल ढकने की कोई कानूनी बाध्यता नहीं है। वैसे भी कुछ इस्लामिक विद्वानों का मानना है कि अल अय्याला कोई धार्मिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक अनुष्ठान है।

महिलाओं का बाल झटकना
अल अय्याला का सांस्कृतिक महत्व (Cultural Significane of Al Ayyala)
अमीराती संस्कृति में अल अय्याला केवल एक नृत्य शैली नहीं है, बल्कि यह अरब समाज के मूल्यों और परंपराओं का प्रतिबिंब है। यह सामुदायिक एकता और सहयोग को दर्शाता है, जो बेदुइन समुदायों के लिए तपते रेगिस्तान में जिंदा रहने के लिए जरूरी था। नृत्य के दौरान दो कतार में नर्तकों का समूह कबीले की एकजुटता और अनुशासन को दिखाता है।

यूएई और ओमान में अल अय्याला का महत्व
19वीं शताब्दी के लगभग यह नृत्य आतिथ्य और सम्मान का भी प्रतीक बन गया। इसे अक्सर खास मेहमानों के स्वागत में प्रदर्शित किया जाता है। इस अल अय्याला के जरिए अरब संस्कृति में मेहमाननवाजी की गहरी परंपरा का प्रदर्शन किया जाता है। यूएई और ओमान के राष्ट्रीय समारोह बिना अल अय्याला के पूरे नहीं होते। वहां की सल्तनत का मानना है कि अल अय्याला राष्ट्रीय गौरव और पहचान को मजबूत करता है।

अल अय्याला के माने
मौजूदा दौर में अल अय्याला
यूएई और ओमान के प्रयास से अल अय्याला ने वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बना ली है। साल 2014 में, यूनेस्को ने इसे मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की सूची में शामिल किया, जिसने इसकी वैश्विक मान्यता को बढ़ाया। यूएई और ओमान की सरकारें इस नृत्य को संरक्षित करने और बढ़ावा देने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। सांस्कृतिक उत्सवों, स्कूलों और पर्यटन आयोजनों में इसे शामिल किया जाता है ताकि नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ सके।

यूनेस्को ने माना मानवता की अमूर्त धरोहर
हालांकि, आधुनिकीकरण और वैश्वीकरण के प्रभाव ने अल अय्याला पर कुछ हद तक प्रभावित भी किया है। जैसा कि हर लोक परंपरा के साथ होता है शहरीकरण के कारण ग्रामीण समुदायों में इसकी भी लोकप्रियता कम हुई है। अब युवा पीढ़ी पश्चिमी संस्कृति की ओर आकर्षित हो रही है। फिर भी, सांस्कृतिक संगठनों और सरकारों के प्रयासों ने इसे जीवित रखने की सफल कोशिश की है।
पीएम मोदी भी ले चुके हैं अल अय्याला का आनंद
16 जुलाई 2023 को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा पर गए थे तो अबू धाबी के राष्ट्रपति भवन कासर अल वतन में उनका पारंपरिक स्वागत किया गया। इस दौरान यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने उनकी अगवानी की। पीएम मोदी के स्वागत में अल अय्याला नृत्य का प्रदर्शन किया गया था। पीएम मोदी भी वहां के इस पारंपरिक नृत्य शैली से काफी प्रभावित और प्रसन्न नजर आए थे।

अबू धाबी में पीएम मोदी
और अंत में
अल अय्याला ना सिर्फ एक पारंपरिक कला है बल्कि यह अरब समाज के इतिहास, मूल्यों और पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह नृत्य सामुदायिक एकता, सम्मान और आतिथ्य का प्रतीक है। अल अय्याला हमें यह सिखाता है कि परंपराएं समय के साथ बदलती हैं, लेकिन उनकी मूल भावना को संरक्षित रखना हमारी जिम्मेदारी है।
