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भूल जाएंगे AC की ठंडक! इन देसी नुस्खों से बिना एयर कंडीशनर भी बच्चा सोएगा घोड़े बेचकर

What are the side effects of AC on children: यदि आप अपने बच्चे को प्राकृतिक वातावरण में सोने की आदत डालना चाहते हैं, तो ये कुछ प्रभावी देसी नुस्खे आपके बेहद काम आएंगे।

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क्या बच्चे एसी में सो सकते हैं (AI Image)

बच्चों पर एसी के दुष्प्रभाव क्या हैं (What are the side effects of AC on children): भारत के ज्यादातर हिस्सों में गर्मी का कहर जारी है। पारा रोज बढ़ रहा है। घरों में दिन रात एएयर कंडीशनर और कूलर चल रहे हैं। AC की ठंडी हवा इस भयंकर गर्मी से तात्कालिक राहत तो देती है, लेकिन छोटे बच्चों की सेहत के लिए यह हमेशा अच्छी नहीं होती। लगातार एसी में रहने से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो सकती है। बाल विशेषज्ञों के मुताबिक बच्चों की इम्युनिटी घटने के साथ ही उन्हें साइनस या सूखेपन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

बच्चों के AC में सोने की आदत कैसे छुड़ाएं

ज्यादातर पेरेंट्स को लगातार एसी में रहने वाली दिक्कतों के बारे में पता तो है लेकिन वह चाहकर भी इस समस्या का समाधान नहीं कर पाते हैं। दरअसल आजकल के बच्चे भी ऐसी के आदि हो चुके हैं। ऐसे में यदि आप अपने बच्चे को प्राकृतिक वातावरण में सोने की आदत डालना चाहते हैं, तो ये कुछ प्रभावी देसी नुस्खे आपके बेहद काम आएंगे:

बच्चों के कमरे को प्राकृतिक रूप से ठंडा रखें

बच्चे का कमरा अगर प्राकृतिक रूप से ठंडा रहे तो उन्हें AC का कमी महसूस नहीं होगी। ऐसे में बिना एसी के कमरे को ठंडा रखने का सबसे पुराना और कारगर तरीका है अच्छा वेंटिलेशन। दोपहर के समय खिड़कियां और दरवाजे बंद रखें ताकि बाहर की लू अंदर न आए। शाम ढलते ही खिड़कियां खोल दें। यदि संभव हो, तो खिड़कियों पर खस के पर्दे लगाएं और उन पर पानी का छिड़काव करें। इससे कमरे में आने वाली हवा प्राकृतिक रूप से ठंडी हो जाएगी।

गर्मी के हिसाब से बिस्तर और कपड़ों का चुनाव

गर्मियों में बच्चों को जहां तक मुमकिन हो 100% सूती कपड़े ही पहनाएं। बच्चों के बिस्तर पर भी सूती चादर ही बिछाएं। सोने से कुछ देर पहले चादर को हल्का सा नम कर दें या ठंडे पानी का हल्का छिड़काव करें, इससे बिस्तर की तपन कम हो जाती है।

बच्चों के खान-पान में बदलाव

पेरेंट्स को ये समझना चाहिए कि बच्चा रात में चैन से सो सके, इसके लिए उसका पेट ठंडा रहना जरूरी है। इसके लिए रात के खाने में दही, छाछ या लौकी जैसी ठंडी तासीर वाली चीजें शामिल करें। सोने से कम से कम 2 घंटे पहले खाना खिला दें। शरीर में पानी की कमी न होने दें, क्योंकि हाइड्रेटेड शरीर तापमान को बेहतर तरीके से नियंत्रित कर पाता है।

सोने से पहले ठंडे पानी से नहाना

इस गर्मी से बचने के लिए रात को सोने से पहले हल्के ठंडे पानी से नहलाने की आदत डालें। आप स्पंज बाथ का भी सहारा ले सकते हैं। इससे शरीर का तापमान तुरंत गिर जाता है और मांसपेशियों को आराम मिलता है। नहाने के बाद शरीर पर थोड़ा सा ठंडा पाउडर या चंदन का लेप लगाने से भी घमौरियों से राहत मिलती है और बच्चा सुकून की नींद सोता है।

'क्रॉस वेंटिलेशन' और पंखे का सही उपयोग

सिर्फ पंखा चलाने से कई बार गर्म हवा ही घूमती रहती है। पंखे के नीचे या उसके सामने एक बाल्टी में बर्फ का पानी या गीला तौलिया रख दें। इससे पंखा हवा को ठंडा करके पूरे कमरे में फैलाएगा। इसे 'देसी एयर कंडीशनर' भी कहा जाता है।

इन सरृारे उपायों के बावजूद पेरेंट्स ये बात नोट कर लें कि बच्चों में बिना AC के सोने की आदत एक दिन में नहीं आएगी। इसकी शुरुआत धीरे-धीरे करें। पहले AC का तापमान बढ़ाएं और फिर धीरे-धीरे उसे बंद कर केवल पंखे की आदत डालें। इन देसी तरीकों से न केवल आपके बिजली का बिल बचेगा, बल्कि आपका बच्चा भी प्राकृतिक रूप से स्वस्थ और मजबूत बनेगा।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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