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Thought of the day: सफलता की जंग अकेले ही लड़नी पड़ती है, सैलाब उमड़ता है जीत जाने के बाद

Sunday Suvichar (संडे सुविचार): यह संडे सुविचार बताता है कि जब इंसान अपने सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहा होता है, तब अकसर उसे अकेले ही मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

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संडे का सुविचार

Sunday Suvichar (संडे सुविचार): जीवन में सुविचार यानी अच्छे विचारों का बहुत बड़ा महत्व होता है। दरअसल इंसान जैसा सोचता है, वैसा ही धीरे-धीरे बनता चला जाता है। सकारात्मक और प्रेरणादायक विचार न केवल हमारे मन को मजबूत बनाते हैं, कठिन परिस्थितियों में सही रास्ता दिखाने का काम भी करते हैं। अच्छे विचार हमारे व्यवहार और व्यक्तित्व को भी प्रभावित करते हैं।

सुविचार केवल प्रेरणा नहीं देते, जीवन जीने की कला भी सिखाते हैं। वे हमें यह समझाते हैं कि हर कठिनाई के पीछे कोई सीख छिपी होती है और हर असफलता आगे बढ़ने का अवसर बन सकती है। असल में, सुविचार मन के लिए उसी तरह जरूरी हैं जैसे शरीर के लिए अच्छा भोजन। यदि मन में अच्छे विचार होंगे, तो जीवन में सकारात्मकता, शांति और सफलता अपने आप बढ़ने लगेगी। इसी लिए हम आपको रोज एक सुविचार से रूबरू करवाते हैं। इसी कड़ी में आज का सुविचार है:

"सफलता की जंग अकेले ही लड़नी पड़ती है, सैलाब उमड़ता है जीत जाने के बाद”

यह संडे सुविचार बताता है कि जब इंसान अपने सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहा होता है, तब अकसर उसे अकेले ही मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। उस समय न तो ज्यादा लोग साथ खड़े दिखाई देते हैं और न ही दुनिया उसकी मेहनत को समझ पाती है।

संघर्ष के दिनों में व्यक्ति को ताने, असफलताएं, निराशा और अकेलापन सब कुछ सहना पड़ता है। कई बार अपने भी भरोसा नहीं करते, लेकिन जो इंसान खुद पर विश्वास बनाए रखता है, वही आगे चलकर सफलता हासिल करता है। असली परीक्षा उसी समय होती है, जब रास्ता कठिन हो और साथ देने वाला कोई न हो।

लेकिन जैसे ही इंसान सफल हो जाता है, वही दुनिया उसकी तारीफ करने लगती है। लोग उसकी सफलता की कहानी सुनना चाहते हैं, उसके साथ तस्वीरें खिंचवाना चाहते हैं और खुद को उसका करीबी बताने लगते हैं। यानी जीत के बाद लोगों का सैलाब उमड़ पड़ता है।

यह विचार हमें आत्मनिर्भर बनने की सीख देता है। हमें यह समझना चाहिए कि जीवन की सबसे बड़ी लड़ाइयां अपने दम पर ही जीतनी पड़ती हैं। दूसरों के सहारे से ज्यादा जरूरी खुद की मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास होता है।

साथ ही यह सोच इंसान को विनम्र भी बनाती है, क्योंकि जो व्यक्ति संघर्ष के दिनों को याद रखता है, वह सफलता मिलने के बाद भी जमीन से जुड़ा रहता है। असल में, सफलता केवल मंजिल पाने का नाम नहीं है, उस सफर का नाम है जिसे इंसान अकेले संघर्ष करते हुए तय करता है।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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