दसवें मिनट में लालरेम्सियामी के गोल और पेनल्टी स्ट्रोक पर गोलकीपर सविता पूनिया के शानदार बचाव के दम पर भारतीय महिला हॉकी टीम ने डिफेंडिंग चैम्पियन चीन को 1-0 से हराकर 44 साल बाद एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीत लिया। इस जीत के साथ ही सलीमा टेटे की टीम ने आगामी लॉस एंजिलिस ओलंपिक का टिकट भी कटा लिया।
महिला हॉकी टीम की इस ऐतिहासिक सफलता के बाद हॉकी इंडिया ने कैश प्राइज की घोषणा की है। हॉकी इंडिया ने एक्स पर पोस्ट के माध्यम से इसकी जानकारी है। इसके अनुसार टीम में मौजूद हर खिलाड़ी को 11 लाख और प्रत्येक सपोर्ट स्टाफ को 5.5 लाख कैश प्राइज दिया जाएगा।
भारत की ओर से अपना 200वां मैच खेल रही लालरेम्सियामी ने दसवें मिनट में ही भारत को बढत दिला दी और 24वें मिनट में भारत की सबसे अनुभवी खिलाड़ी सविता ने पेनल्टी स्ट्रोक पर चीन को गोल करने से रोका। भारत को पहला पेनल्टी कॉर्नर 13वें मिनट में मिला लेकिन नवनीत कौर की स्लैप हिट बाहर से निकल गई । चीन को पहला पेनल्टी कॉर्नर 18वें मिनट में मिला लेकिन भारत ने वैरिएशन को बखूबी भांपकर उसे नाकाम कर दिया।
लालरेम्सियामी की गलती पर चीन को 24वें मिनट में पेनल्टी स्ट्रोक मिला लेकिन सविता ने अपने बायीं ओर डाइव लगाकर जबर्दस्त बचाव किया। इस क्वार्टर के आखिरी मिनटों में भारतीय डिफेंस ने चीन के लगातार हमलों को नाकाम किया। इशिका चौधरी, बलजीत कौर ओर सुशीला चानू ने चीन को खुलकर खेलने नहीं दिया । गोलकीपर सविता और बिछू देवी ने विश्व कप वाली लय को कायम रखते हुए उनका पूरा साथ दिया। तीसरे और चौथे क्वार्टर फाइनल में चीन को कई मौके मिले, लेकिन भारतीय डिफेंड को भेदने में टीम असफल रही। चीन को रजत पदक मिला जबकि जापान ने शूटआउट में कोरिया को हराकर कांस्य पदक जीता ।
इससे पहले भारतीय महिला हॉकी टीम ने 1982 में दिल्ली में हुए एशियाई खेलों में स्वर्ण जीता था जब पहली बार महिला हॉकी को इन खेलों में शामिल किया गया था। टीम बसों के ट्रैफिक में फंसने के कारण मैच एक घंटा देर से शुरू हुआ। मैच शुरू होने के बाद भारतीय टीम ने शुरू से ही आक्रामक रूख अपनाया। पिछले महीने नीदरलैंड और बेल्जियम में विश्व कप में भारत ने अपने पहले ही ग्रुप मैच में चीन को 2 . 2 से ड्रॉ पर रोका था।
