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Smriti Mandhana Success Tips: स्मृति मंधाना से सीखें सफलता का सीक्रेट, क्यों टैलेंट से ज्यादा जरूरी है हार ना मानना

Smriti Mandhana Success Tips: जिंदगी में बड़ी कामयाबी किसी एक चमत्कार से नहीं आती। वह रोज की छोटी, साधारण और लगातार दोहराई जाने वाली कोशिशों से बनती है।

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क्रिकेटर स्मृति मंधाना की सफलता का मूल मंत्र (Photo: Smriti Mandhana Insta)

Smriti Mandhana Success Mantra: हर किसी की जिंदगी में ऐसे दौर आते हैं, जब मेहनत तो खूब होती है, लेकिन नतीजे दिखाई नहीं देते। कई लोग यहीं हार मान लेते हैं। वहीं भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार बल्लेबाज स्मृति मंधाना का मानना है कि सफलता रोज उठाए गए छोटे-छोटे कदमों से मिलती है। हाल ही में अपनी अब तक की जर्नी को याद करते हुए मंधाना ने कहा कि उनका करियर कुछ बड़े मौकों का नतीजा नहीं है। यह लगातार की गई मेहनत, धैर्य और मुश्किल समय में खुद पर भरोसा बनाए रखने का परिणाम है।

सिर्फ टैलेंट काफी नहीं होता

हम मान लेते हैं कि सफल लोग जन्म से ही असाधारण प्रतिभा लेकर आते हैं। मंधाना की सोच इससे अलग है। उनके मुताबिक, टैलेंट आपको शुरुआत में थोड़ी बढ़त जरूर दे सकता है, लेकिन लंबी दौड़ में वही लोग आगे निकलते हैं, जो मुश्किल समय में भी मेहनत करना नहीं छोड़ते।

बकौल स्मृति मंधाना सफलता महज उपलब्धियों का नाम नहीं है। यह इस बात पर भी निर्भर करती है कि आप असफलताओं और खराब दौर को कैसे संभालते हैं।

रूटीन ही बनाता है चैंपियन

स्मृति मंधाना अपनी सफलता का बड़ा श्रेय अनुशासन और रूटीन को देती हैं। उनके लिए लगातार अभ्यास करना, खुद को मानसिक रूप से तैयार रखना और हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना बेहद जरूरी है।

दरअसल, रूटीन हमें अनिश्चितता और तनाव से बचाता है। जब हम रोज छोटे-छोटे काम नियमित रूप से करते हैं, तो धीरे-धीरे उनमें महारत हासिल होने लगती है। यही छोटी आदतें आगे चलकर बड़े नतीजों में बदल जाती हैं।

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हर दिन एक जैसा नहीं होगा

जीवन हमेशा सीधी रेखा की तरह नहीं चलता। कभी बहुत अच्छी सफलता मिलती है, तो कभी लंबे समय तक कुछ खास हासिल नहीं होता। ऐसे समय में कई लोग खुद पर संदेह करने लगते हैं।

मंधाना कहती हैं कि उन्होंने कठिन दौर से सबसे ज्यादा सीखा है। धैर्य रखना, खुद पर भरोसा बनाए रखना और रोज अपना काम करते रहना ही उन्हें आगे बढ़ाता रहा।

सफलता का असली राज

मनोवैज्ञानिक भी मानते हैं कि लंबे समय तक सफलता हासिल करने के लिए प्रेरणा से ज्यादा जरूरी है एक मजबूत व्यवस्था बनाना। बड़े लक्ष्य को छोटे-छोटे कामों में बांटना, रोज थोड़ा-थोड़ा आगे बढ़ना और परिणाम की बजाय प्रक्रिया पर ध्यान देना ज्यादा कारगर होता है।

शायद यही वजह है कि स्मृति मंधाना की कहानी केवल क्रिकेट की कहानी नहीं है। यह उस सोच की कहानी है, जो हमें सिखाती है कि जिंदगी में बड़ी कामयाबी किसी एक चमत्कार से नहीं आती। वह रोज की छोटी, साधारण और लगातार दोहराई जाने वाली कोशिशों से बनती है।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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