Lord Ganesha Temple: भगवान गणेश की तस्वीर सामने आते ही हमारे मन में हाथी के सिर वाले गणपति की छवि बनती है। लेकिन क्या आपने कभी ऐसे गणेश जी के बारे में सुना है जिनका चेहरा इंसान जैसा है? तमिलनाडु में एक ऐसा मंदिर है, जहां गणपति का यही अनोखा स्वरूप देखने को मिलता है। इस मंदिर को आधि विनायक मंदिर (Adhi Vinayagar Temple) कहा जाता है और यहां भगवान गणेश को मानव मुख वाले रूप में पूजा जाता है।
कहां है यह अनोखा मंदिर
तमिलनाडु के थिलथरपनपुरी में मानव मुख वाले गणेश का यह मंदिर स्थित है। यह मंदिर मुक्तीश्वरार मंदिर परिसर का हिस्सा है। आम गणेश मंदिरों से अलग यहां गणपति की प्रतिमा हाथी के चेहरे वाली नहीं, बल्कि मानव मुख वाली मानी जाती है। इसी वजह से यह स्थान गणेश भक्तों के बीच खास आकर्षण का केंद्र है। मंदिर से जुड़ी मान्यताओं के कारण दूर-दूर से लोग यहां दर्शन करने पहुंचते हैं।
क्या है मानव मुख वाले गणेश की कहानी?
पौराणिक मान्यता के अनुसार, देवी पार्वती ने अपने शरीर के उबटन से एक बालक की रचना की थी और उसे अपना द्वारपाल बनाया था। जब भगवान शिव वहां पहुंचे तो उस बालक ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। इसके बाद दोनों के बीच विवाद हुआ और भगवान शिव ने क्रोध में बालक का सिर काट दिया।
बाद में देवी पार्वती के आग्रह पर भगवान शिव ने उस बालक को फिर जीवन दिया और उसके शरीर पर हाथी का सिर लगा दिया। इसके बाद वही बालक गणेश के नाम से प्रसिद्ध हुए। आधि विनायक मंदिर की मान्यता इसी कहानी के उस शुरुआती रूप से जुड़ी है, जब गणेश को मानव मुख वाले बालक के रूप में देखा जाता है।
यहां गणेश जी को 'नरमुख विनायक' भी कहते हैं
मानव चेहरे वाले इस स्वरूप को नरमुख विनायक कहा जाता है। 'नरमुख' का सामान्य अर्थ मानव चेहरे से है। यानी यहां गणपति का वह रूप देखने को मिलता है जो हाथी मुख वाले स्वरूप से अलग है। यही बात इस मंदिर को दूसरे गणेश मंदिरों से अलग बनाती है। हालांकि इस स्वरूप और इसकी पौराणिक कथा को लेकर अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में अलग व्याख्याएं भी मिलती हैं।
मुख्य मूर्ति की तस्वीर क्यों नहीं खींच सकते?
इस मंदिर की एक और खास बात यहां की मुख्य प्रतिमा से जुड़ी है। मान्यता के अनुसार गर्भगृह में मौजूद मुख्य मूर्ति की फोटोग्राफी की अनुमति नहीं है। इसलिए श्रद्धालु सीधे दर्शन तो कर सकते हैं, लेकिन प्रतिमा की तस्वीर नहीं ले सकते। मंदिर के बाहर मानव मुख वाले गणेश की एक तस्वीर प्रदर्शित की जाती है, जिससे श्रद्धालुओं को इस अनोखे स्वरूप की जानकारी मिलती है।
