उत्तर प्रदेश के भदोही में महाराजा चेतसिंह राजकीय जिला अस्पताल, ज्ञानपुर के सामने सड़क किनारे वनवासी महिला के प्रसव के मामले में जांच के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई की है। इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक डॉक्टर पंकज कुमार की सेवा समाप्त कर दी गई है। वहीं, अस्पताल के सीएमएस डॉ. एके तिवारी और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नीलिमा धवन के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भेजा गया है।
मामला मंगलवार रात का है, जब 20 वर्षीय रानी अपने परिजनों के साथ प्रसव के लिए जिला अस्पताल पहुंची थी। आरोप है कि उसे भर्ती नहीं किया गया। अस्पताल से लौटते समय सड़क किनारे ही उसने बच्चे को जन्म दे दिया। प्रसूता ने अस्पताल कर्मियों पर मुसहर समुदाय का होने के कारण भर्ती न करने का आरोप लगाया था। घटना की जानकारी मिलने पर सीएमओ डॉ. संतोष चक ने महिला को वापस अस्पताल पहुंचवाकर भर्ती कराया था।
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सीएमओ ने बताया कि जांच में इमरजेंसी चिकित्सक की ओर से मरीज को अटेंड न करने की लापरवाही सामने आई, जिसके बाद उनकी सेवा समाप्त कर दी गई। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मुकेश प्रजापति का एक माह का वेतन रोकने और स्टाफ नर्स नीलम मौर्या को सीएचसी औराई से संबद्ध करने की कार्रवाई की गई है। वहीं, सीएमएस और डॉ. नीलिमा धवन के खिलाफ कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी के निर्देश पर शासन को पत्र भेजा गया है।
उसे बीएचयू रेफर किया गया, लेकिन लौटते समय उसका प्रसव हो गया
सीएमओ के अनुसार, महिला सोमवार को भी अस्पताल आई थी। हीमोग्लोबिन पांच ग्राम होने के कारण उसे मिर्जापुर मंडलीय अस्पताल रेफर किया गया था। मंगलवार को दोबारा आने पर उसे बीएचयू रेफर किया गया, लेकिन लौटते समय उसका प्रसव हो गया। सीएमओ ने जातिगत भेदभाव के आरोपों को गलत बताया है।
