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बिहार में महिला कांस्टेबल भी नहीं सुरक्षित, बीच सड़क युवक ने जड़ा थप्पड़

बिहार के पटना में महिला सिपाहियों के साथ हाथापाई और बदसलूकी का मामला सामने आया है। आरोप है कि आपत्तिजनक कमेंट का विरोध करने पर युवक ने महिला कांस्टेबल को थप्पड़ जड़ दिया।

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बिहार में महिला कांस्टेबल से हाथापाई का आरोप

पटना : बिहार में इन दिनों महिलाओं और बेटियों के खिलाफ हो रहे आपराधित मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। अभी तक आम लड़कियों से बदसलूकी की खबरें सामने आ रही थी, लेकिन पटना से एक नया वीडियो सामने आया है, जिसमें महिलाओं की सुरक्षा के लिए तैनात महिला पुलिसकर्मी ही कथित तौर पर मनचलों की हरकत का शिकार हो गईं। रामकृष्ण नगर थाना क्षेत्र में अभया ब्रिगेड की महिला कांस्टेबलों के साथ बदसलूकी और हाथापाई का मामला सामने आया है।

बताया जा रहा है कि घटना कल शाम की है। अभया ब्रिगेड की तीन महिला कांस्टेबल स्कूटी से इलाके में पेट्रोलिंग कर रही थीं। इसी दौरान कुछ युवकों ने महिला पुलिसकर्मियों पर कथित तौर पर कमेंट किया। इसके बाद महिला कांस्टेबलों ने आगे जाकर अपनी स्कूटी रोकी और एक युवक को रोकने की कोशिश की। आरोप है कि इसी दौरान युवक ने एक महिला कांस्टेबल के साथ हाथापाई शुरू कर दी। घटना की जानकारी मिलने पर अन्य महिला कांस्टेबल भी मौके पर पहुंच गईं।

घटना के बाद मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसे हम आपको दिखा नहीं सकते। वीडियो में महिला पुलिसकर्मियों और युवक के बीच कथित तौर पर हुई झड़प दिखाई दे रही है।

SSP ने दिए जांच के आदेश

महिला पुलिसकर्मी के साथ कथित बदसलूकी और मारपीट के मामले को पटना के SSP ने गंभीरता से लिया है। SSP कार्तिकेय शर्मा ने घटना की जांच SP ईस्ट को सौंप दी है। SSP ने पूरी घटना के साथ-साथ सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो की भी जांच के आदेश दिए हैं। जांच के बाद ही घटना की पूरी स्थिति और इसमें शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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