Shayari of the Day: पसीना हमारे शरीर से निकलने वाली पानी की बूंदें मात्र नहीं हैं। ये तो हमारी कड़ी मेहनत और अटूट संकल्प का प्रमाण है। जब हम अपने सपनों को हकीकत में बदलने के लिए दिन-रात एक कर देते हैं, तो शरीर की थकान पसीने के रूप में बाहर आती है, जो यह बताती है कि आप सही रास्ते पर हैं। बड़े बुजुर्ग कहते भी हैं कि आरामदायक कमरों में बैठकर ऊंचे सपने देखना आसान है, लेकिन उन्हें पूरा करने के लिए तपती धूप और विपरीत परिस्थितियों में पसीना बहाना पड़ता है।
पसीना बहाने का सही अर्थ है- अपना शत-प्रतिशत देना। चाहे वह खेल का मैदान हो, पढ़ाई की मेज हो या कोई नया व्यवसाय, सफलता का स्वाद तभी मिलता है जब आप उसे अपने परिश्रम से सींचते हैं। इसी पसीने पर बहुत से शायरों ने कई खूबसूरत शेर लिखे हैं। आइए पढ़ते हैं पसीने पर शायरी हिंदी में:
मेहनत का पसीना शायरी
1. रुख़ पर पसीना जिस्म में रअशा जबीं प चीं
पूछा किधर चले तो ये बोले कहीं नहीं
- मीर अनीस
2. आंखों का अर्क़ रौगन-ए-बादाम से बेहतर
आरिज़ का पसीना है गुलाब-ए-गुल-ए-अहमर
- मिर्ज़ा सलामत अली दबीर
3. न मैं समझा न आप आए कहीं से
पसीना पोछिए अपनी जबीं से
- अनवर देहलवी
Pasina Shayari in Hindi
4. पसीने से मिरे अब तो ये रूमाल
है नक़्द-ए-नाज़-ए-उल्फ़त का ख़ज़ीना
- जौन एलिया
5. ये पसीना वही आंसू हैं जो पी जाते थे हम
'आरज़ू' लो वो खुला भेद वो टूटा पानी
- आरज़ू लखनवी
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7. हो गया मिट्टी अगर मेरा पसीना सूख कर
देखना मेरे दरख़्तों पर समर आ जाएगा
- आसिम वास्ती
8. हलाल रिज़्क़ का मतलब किसान से पूछो
पसीना बन के बदन से लहू निकलता है
- आदिल रशीद
pasine par Shayari
9. मिला दिया है पसीना भले ही मिट्टी में
हम अपनी आंख का पानी बचा के रखते हैं
- हस्तीमल हस्ती
10. ज़मीन के रुख़ पर जो है पसीना तो झिलमिलाती है मेरी मेहनत
ये चार-दीवारियां ये चादर गली सड़ी लाश को मुबारक
- फ़हमीदा रियाज़
11. अब इत्र भी मलो तो तकल्लुफ़ की बू कहां
वो दिन हवा हुए जो पसीना गुलाब था
- लाला माधव राम जौहर
12. ये सर्द सर्द ये बे-जान फीकी फीकी चमक
निज़ाम-ए-सानिया की मौत का पसीना है
- फ़िराक़ गोरखपुरी
13. माथे पे पसीना क्यूं आंखों में नमी कैसी
कुछ ख़ैर तो ही तुम ने क्या हाल-ए-जिगर देखा
- जिगर मुरादाबादी
Pasina Shayari in Hindi Text
14. पसीना मेरी मेहनत का मिरे माथे पे रौशन था
चमक लाल-ओ-जवाहर की मिरी ठोकर पे रक्खी थी
- नाज़िर सिद्दीक़ी
15. वो जीवन आज की रात आ के बरसाती है दीवाली
पसीना मौत के माथे पे छलकाती है दीवाली
- नज़ीर बनारसी
16. पसीने बांटता फिरता है हर तरफ़ सूरज
कभी जो हाथ लगा तो निचोड़ दूँगा उसे
- राहत इंदौरी
