Shayari of the Day: शेर-ओ-शायरी की दुनिया भी बड़ी कमाल की है। यहां छोटी से छोटी या फिर गंभीर से गंभीर बात तो भी बड़ी खूबसूरती से बयां कर दिया जाता है। दो लाइनों में जीवन की गहरी से गहरी बात को रखने का हुनर हमारे शायरों में बखूबी होता है। इन शायरियों का जादू कुछ ऐसा है कि पढ़ने वाले को लगता है कि ये तो बस उसी के लिए लिखा गया है। आज की शायरी (Aaj ki Shayari) में पढ़ते हैं ऐसा ही एक जादुई सा शेर। यह शेर लिखा है जलील मानिकपुरी (Zaleel Manikpuri) ने। शेर कुछ इस तरह से है:
"सब कुछ हम उन से कह गए लेकिन ये इत्तिफाक, कहने की थी जो बात वही दिल में रह गई"
जलील मानिकपुरी का यह शेर इंसानी जज्बातों की उस नाज़ुक हालत को बयां करता है, जहां दिल बहुत कुछ कहना चाहता है, लेकिन सबसे अहम बात जुबां तक नहीं आ पाती। शायर कहते हैं कि उन्होंने अपने महबूब से लगभग हर बात कह दी, दिल खोलकर अपने एहसास जाहिर किए, लेकिन अजीब इत्तिफाक यह हुआ कि वही एक बात, जो सबसे जरूरी थी, दिल में ही रह गई।
इस शेर में इत्तिफाक शब्द बहुत मायने रखता है। यह बताता है कि कभी-कभी जिंदगी में सब कुछ ठीक होते हुए भी कुछ अधूरा रह जाता है, और वही अधूरापन सबसे ज्यादा चुभता है। यहां वह अनकही बात शायद मोहब्बत का इजहार हो सकती है, कोई शिकायत, या कोई छिपा हुआ दर्द, जिसे कहने की हिम्मत या सही मौका नहीं मिल पाया।
यह शेर हमें यह भी समझाता है कि इंसान की सबसे बड़ी कमजोरी उसका संकोच और डर होता है। हम कई बार सब कुछ कह देते हैं, लेकिन असल बात कहने से हिचकिचा जाते हैं, क्योंकि हमें खोने का डर होता है या सामने वाले के जवाब का अंदेशा होता है।
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इस शेर की खूबसूरती इसकी सादगी में छिपी है। यह हर उस व्यक्ति की कहानी बन जाता है, जिसने कभी अपने दिल की बात अधूरी छोड़ दी हो। इसमें एक हल्की सी कसक है, एक अफसोस है, जो वक्त के साथ और गहरा होता जाता है।
जलील मानिकपुरी अपने इस शेर से हमें यह सिखाते हैं कि अपने जज्बातों को सही समय पर जाहिर करना कितना जरूरी है, क्योंकि कई बार खामोशी ही सबसे बड़ा पछतावा बन जाती है।
