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बारिश में स्कूल की पानी की बोतल कब बन जाती है बैक्टीरिया का घर, जानिए बच्चों को कैसे रखें सुरक्षित

School Water Bottle Bacteria Risk: बारिश के मौसम में बच्चों की स्कूल की पानी की बोतल अगर रोज अच्छी तरह साफ न की जाए, तो उसमें कीटाणु पनप सकते हैं। डॉ. दिलीप गुडे से जानिए इससे होने वाले नुकसान और बचाव के आसान उपाय।

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बारिश में बच्चों की स्कूल की बोतल कहीं बना ना दे उन्हें बीमार

School Water Bottle Bacteria Risk: बारिश का मौसम आते ही बच्चों को सर्दी-खांसी या बुखार से बचाने की चिंता तो हर माता-पिता करते हैं, लेकिन एक छोटी-सी लापरवाही भी बच्चे को बीमार कर सकती है। यह लापरवाही है स्कूल की पानी की बोतल को ठीक से साफ न करना। कई बार बोतल बाहर से चमकती हुई दिखती है, लेकिन उसके अंदर ऐसे कीटाणु छिपे होते हैं जो धीरे-धीरे बच्चे की सेहत पर असर डाल सकते हैं। यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद के सीनियर कंसल्टेंट फिजिशियन डॉ. दिलीप गुडे बताते हैं कि बारिश के मौसम (Monsoon) में नमी ज्यादा होने की वजह से पानी की बोतल में कीटाणु तेजी से बढ़ सकते हैं। अच्छी बात यह है कि कुछ आसान आदतें अपनाकर इस खतरे से बचा जा सकता है।

आखिर बारिश में बोतल जल्दी गंदी क्यों हो जाती है

बारिश के दिनों में हवा में नमी ज्यादा रहती है। अगर बच्चा जिस बोतल से पानी पीता है, उसे रोज अच्छी तरह धोकर पूरी तरह नहीं सुखाया जाता, तो उसके अंदर की बची हुई नमी में कीटाणु पनपने लगते हैं। बोतल का ढक्कन, स्ट्रॉ और रबर वाली रिंग जैसी जगहों पर गंदगी सबसे ज्यादा जमा होती है, क्योंकि इन्हें साफ करना थोड़ा मुश्किल होता है। बाहर से साफ दिखने वाली बोतल भी अंदर से गंदी हो सकती है।

ये छोटी-छोटी आदतें बढ़ा देती हैं संक्रमण का खतरा

अक्सर बच्चे पूरे दिन उसी बोतल में बार-बार पानी भर लेते हैं, लेकिन उसे धोते नहीं हैं। पानी पीते समय मुंह की थोड़ी-सी लार भी बोतल के अंदर चली जाती है। अगर कभी उसी बोतल में जूस या कोई मीठा पेय रखा गया हो, तो उसके बचे हुए अंश भी कीटाणुओं को बढ़ने का मौका देते हैं। इसके अलावा दोस्तों के साथ एक ही बोतल से पानी पीना भी संक्रमण फैलने की एक बड़ी वजह बन सकता है।

गंदी बोतल से बच्चे को क्या परेशानी हो सकती है

डॉ. दिलीप गुडे के मुताबिक, अगर बच्चा लंबे समय तक गंदी बोतल से पानी पीता है, तो उसे पेट खराब होना, दस्त लगना, उल्टी होना या गले में दर्द जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। अगर बोतल के अंदर फफूंदी जम जाए, तो कुछ बच्चों में एलर्जी की समस्या भी हो सकती है। हर बार बच्चा बीमार हो, ऐसा जरूरी नहीं है, लेकिन यह ऐसा खतरा है जिससे थोड़ी-सी सावधानी रखकर आसानी से बचा जा सकता है।

रोज सिर्फ 5 मिनट दें

स्कूल से आने के बाद पानी की बोतल को रोज गुनगुने पानी और हल्के साबुन से अच्छी तरह धोएं। ढक्कन, स्ट्रॉ और रबर की रिंग को भी अलग करके साफ करें। इसके बाद बोतल को खुला छोड़ दें ताकि वह पूरी तरह सूख जाए। रातभर या अगले दिन तक उसमें पुराना पानी न रहने दें। हमेशा ताजा पानी भरकर ही बच्चे को स्कूल भेजें।

कब नई बोतल खरीद लेना ही बेहतर है

अगर बोतल में दरार आ गई है, बार-बार धोने के बाद भी उसमें से बदबू आती है या अंदर काले या हरे निशान दिखाई देने लगे हैं, तो उसे बदल देना चाहिए। ऐसी बोतल में कीटाणु आसानी से छिप जाते हैं और पूरी तरह साफ भी नहीं हो पाते। याद रखें, एक साफ पानी की बोतल भी उतनी ही जरूरी है, जितना बच्चे का साफ टिफिन या पौष्टिक खाना। बारिश के मौसम में यही छोटी-छोटी आदतें बच्चों को कई तरह की बीमारियों से बचाने में मदद करती हैं।

Vineet
विनीतauthor

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विषयों पर गहरी समझ है। इन्होंने हेल्थ, फिटनेस, न्यूट्रिशन और सप्लीमेंट के फील्ड में प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी किए हैं। वे 6 साल से इस फील्ड से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 7,000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। विनीत की खासियत उनकी रिसर्च-बेस्ड लेखन शैली और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिखी गई जानकारीपूर्ण स्टोरीज हैं।

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