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मॉनसून में AC और बारिश का कॉम्बिनेशन क्यों बढ़ाता है सांस की दिक्कत, डॉक्टर से जानिए इसके पीछे की असली वजह

Monsoon And AC Breathing Problems: क्या आपने कभी नोटिस किया है कि मॉनसून में AC चलाने से कुछ लोगों में सांस की दिक्कत बढ़ जाती है? बता दें आप अकेले नहीं हैं, ज्यादातर लोग इस समस्या का सामना करते हैं। आइए डॉक्टर से जानते हैं बारिश, नमी और AC का कॉम्बिनेशन कैसे अस्थमा, एलर्जी और फेफड़ों की समस्याओं को बढ़ा सकते हैं।

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मॉनसून और बारिश में AC कैसे बन सकता है परेशानी

Monsoon And AC Breathing Problems: बारिश का मौसम आते ही गर्मी से राहत तो मिल जाती है, लेकिन साथ में उमस भी काफी बढ़ जाती है। ऐसे में ज्यादातर लोग AC का सहारा लेते हैं। बाहर चिपचिपी गर्मी और अंदर ठंडी हवा.. यह आराम तो देता है, लेकिन कुछ लोगों के लिए यही कॉम्बिनेशन सांस से जुड़ी परेशानियों की वजह भी बन सकता है।

अगर आपको पहले से अस्थमा, एलर्जी, बार-बार जुकाम या फेफड़ों से जुड़ी कोई परेशानी रहती है, तो मॉनसून में थोड़ी-सी लापरवाही भी दिक्कत बढ़ा सकती है। यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद के कंसल्टेंट इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. प्रणय साई चंद्रगिरी बताते हैं कि AC बीमारी नहीं करता, लेकिन अगर इसका सही तरीके से इस्तेमाल और सफाई न हो, तो बारिश के मौसम में सांस लेने में परेशानी बढ़ सकती है।

बाहर की उमस और अंदर की ठंडक डालती है असर

मॉनसून में हवा में नमी काफी ज्यादा होती है। ऐसी हवा में सांस लेना कई बार भारी-भारी महसूस होता है। अब सोचिए, आप उमस भरे मौसम से सीधे बहुत ठंडे AC वाले कमरे में चले जाएं और फिर कुछ देर बाद दोबारा बाहर निकल जाएं। शरीर को बार-बार बदलते तापमान के हिसाब से खुद को ढालना पड़ता है।

डॉ. प्रणय साई चंद्रगिरी कहते हैं कि यही अचानक होने वाला बदलाव कुछ लोगों के गले और सांस की नलियों को परेशान कर सकता है। इसकी वजह से खांसी आना, गले में जलन होना, सीने से आवाज आना या सांस फूलने जैसी दिक्कतें शुरू हो सकती हैं।

किन लोगों को सावधान रहने की जरूरत

किन लोगों को सावधान रहने की जरूरत

अस्थमा और एलर्जी वालों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत

अगर आपको धूल, नमी या मौसम बदलने से एलर्जी होती है या पहले से अस्थमा की समस्या है, तो मॉनसून में थोड़ा ज्यादा ध्यान रखने की जरूरत होती है। इस मौसम में छोटी-सी लापरवाही भी परेशानी बढ़ा सकती है।

डॉक्टर सलाह देते हैं कि ऐसे लोग अपनी दवा समय पर लेते रहें और बिना डॉक्टर की सलाह के दवा बंद न करें। साथ ही जिन चीजों से एलर्जी होती है, उनसे जितना हो सके दूरी बनाए रखें।

गंदा AC भी बिगाड़ सकता है आपकी सेहत

बारिश के मौसम में घरों में सीलन बढ़ जाती है। जहां नमी होती है, वहां फफूंदी और बहुत छोटे-छोटे कीटाणु आसानी से पनपने लगते हैं। अगर AC के फिल्टर लंबे समय तक साफ नहीं किए जाते, तो ये चीजें हवा के साथ पूरे कमरे में फैल सकती हैं।

ऐसी हवा में ज्यादा देर रहने से एलर्जी बढ़ सकती है। जिन लोगों को पहले से सांस की दिक्कत है, उनकी परेशानी और बढ़ सकती है। इसलिए AC की सर्विस सिर्फ मशीन को ठीक रखने के लिए नहीं, बल्कि आपकी सेहत के लिए भी जरूरी है।

किन बातों का रखें ध्यान

किन बातों का रखें ध्यान

मॉनसून में AC चलाते समय इन बातों का रखें ध्यान

डॉ. प्रणय साई चंद्रगिरी के मुताबिक, मॉनसून में AC का तापमान बहुत कम नहीं रखना चाहिए। 24 से 26 डिग्री के बीच का तापमान आरामदायक भी रहता है और शरीर पर अचानक ज्यादा असर भी नहीं पड़ता। अगर कमरे में बहुत ज्यादा नमी हो, तो AC का ड्राई मोड इस्तेमाल किया जा सकता है।

इसके अलावा, जब भी मौका मिले, कमरे की खिड़कियां या दरवाजे कुछ देर के लिए खोल दें ताकि ताजी हवा अंदर आ सके। इससे कमरे में नमी कम होगी और सीलन भी नहीं जमेगी।

छोटी-छोटी सावधानियां बड़ी परेशानी से बचा सकती हैं

बारिश के मौसम में दिनभर थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें ताकि गला सूखे नहीं। AC के फिल्टर समय-समय पर साफ कराएं और घर में सीलन बनने न दें। अगर आपको पहले से अस्थमा या एलर्जी है, तो अपनी दवा नियमित लेते रहें और डॉक्टर की सलाह का पालन करें।

डॉ. प्रणय साई चंद्रगिरी का कहना है कि AC खुद किसी को सांस की बीमारी नहीं देता। परेशानी तब बढ़ती है, जब गंदा AC, घर की सीलन, हवा में नमी और बार-बार बदलता तापमान एक साथ असर डालते हैं। अच्छी बात यह है कि थोड़ी-सी सावधानी बरतकर इन समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है। इसलिए मॉनसून में AC जरूर चलाइए, लेकिन सही तरीके से। तभी बारिश का मौसम भी सुहाना लगेगा और आपकी सांसें भी स्वस्थ रहेंगी।

Vineet
विनीतauthor

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विषयों पर गहरी समझ है। इन्होंने हेल्थ, फिटनेस, न्यूट्रिशन और सप्लीमेंट के फील्ड में प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी किए हैं। वे 6 साल से इस फील्ड से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 7,000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। विनीत की खासियत उनकी रिसर्च-बेस्ड लेखन शैली और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिखी गई जानकारीपूर्ण स्टोरीज हैं।

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