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आलिया भट्ट को लग गई थी फोटो कलेक्ट करने की 'लत', जानिए क्यों तस्वीरों के मोह में फंस जाता है इंसान

आलिया कहती हैं कि यही चीजें एक मकान को 'घर' बनाती हैं, वरना वे सिर्फ चार दीवारें हैं। असली घर तो उन यादों से बनता है जो तस्वीरों के साथ जुड़ी होती हैं।

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क्यों तस्वीरें बन जाती हैं हम इंसानों की सबसे अच्छी दोस्त?

एक्ट्रेस आलिया भट्ट ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्हें तस्वीरें इकट्ठा करने की लत लग गई थी। बकौल आलिया उन्होंने कई सालों तक दीवानों की तरह तस्वीरें इकट्ठा की। आलिया का मानना था कि जब वो अपने नए घर में शिफ्ट हो तो वहाँ उनकी, परिवार की, बचपन की, सफर की और यहां तक कि खाने-पीने तक की तस्वीरें होनी चाहिए। आलिया कहती हैं कि यही चीजें एक मकान को घर बनाती हैं, वरना वे सिर्फ चार दीवारें हैं। असली घर तो उन यादों से बनता है जो तस्वीरों के साथ जुड़ी होती हैं।

आलिया भट्ट के इस बयान के बाद इस तरह की चर्चा ने जोर पकड़ लिया कि आखिर हम इंसान अपने घर को तस्वीरों से सजाना और यादों को इकट्ठा करना इतना क्यों पसंद करते है। मनोविज्ञान कहता है कि पुरानी तस्वीरें हमें कुछ पल ठहरने का मौका देती हैं। वे हमें याद दिलाती हैं कि हम कहां से आए हैं, हमने किससे प्यार किया है और किन अनुभवों ने हमें गढ़ा है। ये हमारे लिए इमोशनल एंकर का काम करती हैं।

इंसान और यादों का मनोवैज्ञानिक संबंध

मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो इंसान स्वभाव से कहानियां बुनने और सुनने वाला जीव है। हम अपने जीवन के अर्थ को अपनी यादों के जरिए ही समझते हैं। हमारी पहचान बस इस बात से नहीं बनती कि आज हम क्या हैं। उन सभी अनुभवों, रिश्तों, सफलताओं, संघर्षों और खुशियों के संकलन से बनती है जो हमें इस मुकाम तक लेकर आए हैं।

तस्वीरें हमें उन लोगों की याद दिलाती हैं जिन्होंने हमारे व्यक्तित्व को संवारा, उन जगहों की याद दिलाती हैं जिन्होंने हमें बदला और उन पलों की जो हमारे लिए बेहद मायने रखते थे। जीवन के कठिन दौर में ये तस्वीरें एक थेरेपी की तरह काम करती हैं और इंसान को सकारात्मक ऊर्जा देती हैं।

हर किसी का तरीका अलग

मनोवैक्षानिक और एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यादों को सहेजने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप घर की हर दीवार को फोटो फ्रेम से भर दें। इसका सीधा सा मतलब है कि आप खुद को उन चीजों से घेर कर रखें जो आपके लिए मायने रखती हैं।

पीढ़ियों के बीच का पुल है तस्वीरें

तस्वीरों की सबसे खूबसूरत बात यह है कि ये अलग-अलग पीढ़ियों के बीच एक पुल का काम करती हैं। जब घर में दादा-दादी या नाना-नानी की तस्वीर के बगल में बच्चों की तस्वीरें होती हैं, या शादी एलबम की तस्वीरों के साथ छुट्टियों की तस्वीरें सजी होती हैं, तो वे एक कहानी कहती हैं। ये तस्वीरें हमें अहसास कराती हैं कि हम किसी बहुत बड़े और खूबसूरत परिवार का हिस्सा हैं। वे हमें याद दिलाती हैं कि हमारे रिश्ते समय के पार भी हमें आकार देते रहते हैं।

यही वजह है कि जब भी हम खुश होते हैं, उदास होते हैं, या पुरानी यादों में खोना चाहते हैं, तो हमारा हाथ अनजाने में ही पुरानी तस्वीरों की तरफ बढ़ जाता है। जब हम तस्वीरें देख रहे होते हैं तो हम अपने अतीत और अपने जीवन के उन खूबसूरत हिस्सों से दोबारा जुड़ रहे होते हैं।

Suneet Singh
सुनीत सिंह author

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे ... और देखें

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