हाल ही में अभिनेता राजेश शर्मा को फिल्म फौजी की शूटिंग के दौरान कीड़े ने काट लिया। प्रभास स्टारर इस फिल्म की शूटिंग के बीच में ही वह गंभीर रूप से बीमार पड़ गए। शुरुआत में मामला सामान्य लगा, लेकिन बाद में उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
हालांकि, बाद में फिल्म फौजी के निर्माताओं ने सेट पर हुई इस घटना से जुड़े दावों का खंडन भी किया। ऐसे में यह मामला इस बात पर ध्यान दिलाता है कि किसी भी कीड़े के काटने को हल्के में नहीं लेना चाहिए। कुछ केसेज में इंसेक्ट बाइट गंभीर मेडिकल इमरजेंसी भी बन सकती है।
दिल्ली के सीके बिरला हॉस्पिटल में इंटरनल मेडिसिन विभाग में कंसल्टेंट डॉ. अमित प्रकाश सिंह बताते हैं कि इंसेक्ट बाइट को हल्के में लेना हमेशा सही नहीं होता। यह कुछ परिस्थितियों में यह गंभीर एलर्जिक रिएक्शन, इंफेक्शन या शरीर में तेज प्रतिक्रिया पैदा कर सकता है, जिसके लिए तुरंत इलाज जरूरी होता है। डॉ. नवनीत अरोड़ा (प्रिंसिपल कंसल्टेंट, संक्रामक रोग (इन्फेक्शियस डिजीज), पारस हेल्थ, पंचकूला) का कहना है कि कीड़े के काटने के बाद उस जगह को मॉनिटर करना चाहिए। साथ ही शरीर में आ रहे बदलावों को भी नोट करना चाहिए।
राजेश शर्मा का मामला इतना गंभीर कैसे हुआ
कीड़े के काटने की वजह से एक्टर राजेश शर्मा की गंभीर हालत के बारे में डॉक्टर ने विस्तार से बताया। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति आने की वजह होती है एनाफिलेक्सिस (Anaphylaxis)। यह शरीर की बहुत तेज एलर्जिक प्रतिक्रिया है, जिसमें कुछ ही मिनटों में सांस लेने में दिक्कत, ब्लड प्रेशर गिरना और बेहोशी जैसी स्थिति बन जाती है।
डॉ. नवनीत अरोड़ा बताते हैं कि कुछ कीड़ों के काटने की वजह से बैक्टीरिया त्वचा के अंदर पहुंच जाते हैं, जिससे इंफेक्शन तेजी से फैल सकता है। अगर समय पर इलाज न मिले तो यह संक्रमण गंभीर रूप भी ले सकता है।
कुछ मकड़ियों के काटने में विष (Venom) भी होता है, जिससे शरीर की जवाबी प्रतिक्रिया और ज्यादा गंभीर हो सकती है। हालांकि अधिकांश मकड़ियां व कीड़े खतरनाक नहीं होते हैं लेकिन कुछ प्रजातियों के काटने पर तत्काल इलाज की जरूरत पड़ सकती है।
कीड़े का काटना कैसे क्रिटिकल हो सकता है
किन लोगों के लिए ज्यादा खतरनाक हो सकता है कीड़े का काटना
डॉ. अमित प्रकाश बताते हैं कि कीड़े के काटने पर हर व्यक्ति के शरीर की प्रतिक्रिया एक जैसी नहीं होती। कुछ लोगों में सामान्य कीड़े के काटने पर भी शरीर में बड़ा एलर्जिक रिएक्शन हो सकता है। ऐसे में खास तौर पर इन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए -
- जिन्हें पहले किसी कीड़े के काटने पर गंभीर एलर्जी हो चुकी हो।
- अस्थमा के मरीज।
- किडनी या लिवर की गंभीर बीमारी से पीड़ित लोग।
- कमजोर प्रतिरक्षा (इम्यूनिटी) वाले मरीज।
- छोटे बच्चे और बुजुर्ग।
इन लोगों में मामूली दिखने वाला इंसेक्ट बाइट भी तेजी से गंभीर रूप ले सकता है।
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कीड़े का काटना कब खतरनाक होता है
कैसे पहचानें कि कीड़े का काटना सामान्य नहीं है
अगर कीड़े के काटने के बाद केवल हल्की खुजली या छोटी सूजन है तो अक्सर घबराने की जरूरत नहीं होती। लेकिन कुछ लक्षण ऐसे हैं जिन्हें बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
जैसे कि
- होंठ, जीभ या चेहरे पर तेजी से सूजन आना।
- गले में जकड़न या सांस लेने में कठिनाई।
- चक्कर आना या बेहोशी जैसा महसूस होना।
- बार-बार उल्टी या तेज मितली।
- काटे गए स्थान के आसपास लालिमा का लगातार फैलना।
- तेज दर्द या सूजन का लगातार बढ़ना।
- बुखार आना या पस बनने जैसे संक्रमण के संकेत।
डॉ. अमित चेताते हैं कि ऐसे किसी भी लक्षण के दिखते ही बिना देरी किए अस्पताल पहुंचना चाहिए।
कीड़ा काटने पर सबसे पहले क्या करें
अगर कीड़ा काट लेता है तो घबराने की बजाय सही फर्स्ट एड करना सबसे जरूरी है। सबसे पहले प्रभावित हिस्से को साबुन और साफ पानी से अच्छी तरह धो लें। इसके बाद 10 से 20 मिनट तक ठंडी सिकाई (Cold Pack) करें। इससे दर्द और सूजन कम करने में मदद मिलती है।
काटे हुए स्थान को बार-बार खुजलाने से बचें। ऐसा करने पर त्वचा फट सकती है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। अगर केवल खुजली हो रही है तो डॉक्टर की सलाह से एंटी-एलर्जिक दवा ली जा सकती है। हल्का बुखार या दर्द होने पर पैरासिटामोल राहत दे सकती है।
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मधुमक्खी के डंक को हल्के में न लें
डॉक्टरों के अनुसार मधुमक्खी (Bee) के डंक के बाद शरीर की प्रतिक्रिया कभी-कभी बहुत तेजी से बढ़ सकती है। इसलिए यदि डंक लगने के बाद सूजन बढ़ रही हो, सांस लेने में दिक्कत हो या एलर्जी के लक्षण दिखें तो नजदीकी अस्पताल जाना सबसे सुरक्षित कदम है।
कीड़े के काटने से बचने की फस्ट एड किट में क्या रखें
इंसेक्ट बाइट की फर्स्ट एड किट कैसे बनाएं
बरसात और गर्मियों के मौसम में ऐसी एक बेसिक फर्स्ट एड किट काफी काम आ सकती है। इसमें ये चीजें जरूर रखें -
- एंटीसेप्टिक लोशन
- साफ गॉज (Gauze) और बैंडेज
- पैरासिटामोल
- डॉक्टर द्वारा सलाह दी गई एंटी-एलर्जिक दवा
अगर किसी व्यक्ति को पहले कभी गंभीर एलर्जिक रिएक्शन या एनाफिलेक्सिस हो चुका है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार एड्रेनालिन ऑटो-इंजेक्टर (Epinephrine Auto Injector) साथ रखना जीवनरक्षक साबित हो सकता है।
कब बिल्कुल इंतजार नहीं करना चाहिए
डॉक्टर अमित प्रकाश सिंह कहते हैं कि यदि एलर्जी के लक्षण बढ़ने लगें या सांस, गले या पूरे शरीर पर असर दिखाई देने लगे तो घरेलू उपायों में समय गंवाना ठीक नहीं है। ऐसी स्थिति मेडिकल इमरजेंसी हो सकती है और तुरंत अस्पताल पहुंचना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है। कई बार सही समय पर मिला इलाज बड़ी जटिलता को टाल सकता है।
