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राम मंदिर ट्रस्ट 22 जुलाई को CEO पद पर लेगा फैसला, एजेंडे में मौजूदा बैंकिंग व्यवस्था में बदलाव करने पर भी विचार

Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Bylaws Amendment: SIT की अंतरिम रिपोर्ट में कैश हैंडलिंग पर सवाल के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने 22 जुलाई को एग्जीक्यूटिव कमेटी बुलाई है।

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राम मंदिर ट्रस्ट 22 जुलाई को CEO पद पर लेगा फैसला (फाइल फोटो)

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट बेहतर फंड मैनेजमेंट के लिए CEO की नियुक्ति की इजाजत देने के मकसद से अपने नियमों (bylaws) में बदलाव करने पर विचार कर रहा है। ट्रस्ट से जुड़े एक व्यक्ति ने बताया कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नियमों में बदलाव किया जा सकता है ताकि संस्था के लिए एक चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) की नियुक्ति की जा सके और सुपरवाइजिरी जिम्मेदारियों को साफ़ तौर पर तय किया जा सके।

उस व्यक्ति ने बताया कि ट्रस्ट अपनी मौजूदा बैंकिंग व्यवस्था में बदलाव करने पर भी विचार कर रहा है। ट्रस्ट के खाते स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक और बैंक ऑफ़ बड़ौदा में हैं। उस व्यक्ति ने बताया कि ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी और ट्रस्टी व सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील के. पारासरन ने नियमों में बदलाव पर चर्चा की है। पारासरन ने ही फरवरी 2020 में ट्रस्ट के गठन के समय इसके नियम बनाए थे।

मकसद जवाबदेही बढ़ाना, निगरानी सख्त करना

उसी व्यक्ति के अनुसार, परासरन ने बदलावों को शामिल करने पर काम शुरू कर दिया है। ट्रस्ट के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा, 'चीफ़ एग्ज़ीक्यूटिव ऑफ़िसर की नियुक्ति और ट्रस्ट में प्रशासनिक व वित्तीय बदलाव करने के लिए इसके उप-नियमों में संशोधन करना होगा।' उन्होंने कहा, 'SIT की शुरुआती जांच में कैश-गिनने की प्रक्रिया में गंभीर कमियां सामने आने के बाद, ट्रस्ट अपने प्रशासनिक और वित्तीय ढांचे की समीक्षा कर रहा है। इसका मकसद जवाबदेही बढ़ाना, निगरानी सख्त करना और ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोकना है।'

ट्रस्ट के डीड में CEO की नियुक्ति का कोई प्रावधान नहीं है

ट्रस्ट के डीड में CEO की नियुक्ति का कोई प्रावधान नहीं है, हालांकि इसमें स्टाफ़ सदस्यों की नियुक्ति की अनुमति है। इसमें प्रेसिडेंट, जनरल सेक्रेटरी और ट्रेज़रर के अलावा ट्रस्ट के सदस्यों की किसी खास ज़िम्मेदारी का ज़िक्र नहीं है। ट्रस्ट से जुड़े एक व्यक्ति ने बताया कि ट्रस्ट 22 जुलाई को अयोध्या में होने वाली अपनी अगली एग्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक में ये प्रस्ताव पेश करने की योजना बना रहा है। साथ ही, खाली पदों को भरने के लिए नए ट्रस्टियों के नाम भी रखे जाएंगे।

ट्रस्ट ने CEO के पद के लिए नामों की सिफारिश करने के लिए तीन सदस्यों की एक कमेटी बनाई है। इस कमेटी में जस्टिस (रिटायर्ड) प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) विष्णुकांत चतुर्वेदी और NIT रायपुर के पूर्व चेयरमैन सुरेश हवारे शामिल हैं।

सारा कैश अयोध्या में SBI की नया घाट ब्रांच में जमा किया जाता है

अभी, मंदिर के दान-पात्रों से इकट्ठा सारा कैश अयोध्या में स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया (SBI) की नया घाट ब्रांच में जमा किया जाता है। हालांकि, उस व्यक्ति ने बताया कि ट्रस्ट दूसरे विकल्पों पर भी सक्रिय रूप से विचार कर रहा है, जैसे कि किसी दूसरे बैंक को शामिल करना या कई योग्य बैंकों में जमा राशि को बांटना। यह कदम बुधवार को अयोध्या में एक प्राइवेट सेक्टर बैंक के सीनियर अधिकारियों के साथ कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि की बैठक के बाद उठाया गया है।

मौजूदा नियम ट्रस्टी बोर्ड को एक या ज़्यादा शेड्यूल्ड या नेशनलाइज़्ड बैंकों में पैसे जमा करने का अधिकार देते हैं। इससे बोर्ड को ट्रस्ट के वित्तीय हितों की सुरक्षा करते हुए, बोर्ड के फ़ैसले से मौजूदा बैंकिंग व्यवस्था में बदलाव करने की छूट मिलती है। बोर्ड के सदस्यों को किसी भी नुकसान से सुरक्षा दी गई है।

बुनियादी सुरक्षा उपायों को लागू न कर पाने का आरोप

यह समीक्षा तब हो रही है जब ट्रस्ट के पूर्व जनरल सेक्रेटरी चंपत राय ने SIT को दिए अपने बयान में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया पर कैश संभालने से जुड़े बुनियादी सुरक्षा उपायों को लागू न कर पाने का आरोप लगाया। इन उपायों में गिनती करने वाले स्टाफ़ की अनिवार्य तलाशी, बिना जेब वाली यूनिफ़ॉर्म और बड़ी रकम के कैश ऑपरेशन के लिए तय अन्य सुरक्षा प्रोटोकॉल शामिल हैं।

सुरक्षा नियमों के बार-बार उल्लंघन का भी जिक्र

SIT की शुरुआती रिपोर्ट में कैश गिनने के दौरान सुरक्षा नियमों के बार-बार उल्लंघन का भी ज़िक्र किया गया है और यह सवाल उठाया गया है कि क्या सुपरवाइज़री कमियों की वजह से कथित चोरी हुई। ट्रस्ट की अगली बैठक से पहले आने वाली इसकी अंतिम रिपोर्ट में न केवल दान की चोरी के सीधे आरोपी लोगों की, बल्कि गिनती की प्रक्रिया की देखरेख करने वाले अधिकारियों की भी जवाबदेही तय होने की उम्मीद है।उम्मीद है कि SIT की रिपोर्ट की जांच करने के बाद ट्रस्ट, प्रस्तावित उप-नियम संशोधनों और बैंकिंग सुधारों पर अपना अंतिम निर्णय लेगा।

Ravi Vaish
रवि वैश्य author

रवि वैश्य टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर कार्यरत एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 20 वर्षों का व्यापक अनुभव हासिल है। खबरों... और देखें

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